
नृत्य, संगीत, नाटक सहित कई कलाओं का साक्षी बना एक मंच
इंदौर. विश्व रंगमंच दिवस के मौके पर इंदौर थिएटर ने अभिनव कला समाज अनूठी पेशकश की। लगातार १४ घंटे चलने वाले कार्यक्रम में एक मंच पर अनेक कलाओं की प्रस्तुति दी गई। इस आयोजन के पीछे विचार यह था कि चूंकि नाट््य विधा में केवल अभिनय ही नहीं बल्कि नृत्य, संगीत, साहित्य, चित्रकला, मार्शल आर्ट आदि शामिल होते हैं इसलिए सभी को एक मंच पर लाया जाए। सुबह नौ बजे से करीब आधी रात तक चले इस आयोजन में शहर के कई कलाकारों, साहित्यकारों ने शिरकत की। कला जगत के इस अनूठे समागम ने गुरुवार को यादगार बना दिया। सुबह नौ बजे इस कार्यक्रम की शुरुआत रंगकर्मी संतोष जोशी ने कहानी पाठ से की। उनके कहानी पाठ के बाद कई साहित्यकारों ने कहानी पाठ किया, जिनमें किसलय पंचोली, ज्योति जैन, गरिमा दुबे, नियति सप्रे सहित अन्य शामिल थे। दोपहर में यथार्थ रंग समूह ने गुलरेज खान के निर्देशन में नाटक भास- आभास का मंचन किया जिसमें भिाखारियों की दशा का चित्रण तो था ही साथ ही देश की राजनीति पर भी व्यंग्य था।
ईश्वर की आराधना की तरह देखें कला
कथक की पेशकश के बाद रागिनी मख्खर ने संक्षिप्त व्याख्यान भी दिया उन्होंने कहा, कला साधना ईश्वर की आराधना की तरह करें। उन्होंने कला में गुरु का महत्व भी बताया।
चतुरंग की बंदिश थी श्याम तुम मोरी अरज सुनो....
शाम के सत्र में डालिया दत्ता की शिष्याओं ने ओडिसी की मनमोहक प्रस्तुति दी। इसके बाद कथक नृत्यांगना रागिनी मख्खर ने अपने शिष्यों के साथ कथक पेश किया। इसमें उन्होंने गणेश वंदना से शुरुआत की और फिर चतुरंग पेश किया। चतुरंग की बंदिश थी श्याम तुम मोरी अरज सुनो....। इसमें उन्होंने कृष्ण के प्रति समर्पण, प्रेम, लगन और वात्सल्य के भाव पेश किए। प्रस्तुति का समापन राग मालकौंस में तराना से किया। मंच पर रागिनी के साथ उनके शिष्य गौतम सिंह राज, उर्वशल दिघे, खुशी सिंह ओर रिद्धिमा तिवारी थीं। नृत्य की कंपोजिशन चिन्मय कोल्हटरकर की थी।
मार्शल आर्ट करतब
शाम के सत्र में मणिपुर के कलाकारों ने डांस स्टूडियो के सहयोग से मार्शल आर्ट को संगीत की धुन के साथ पेश किया। रनबीर सिंलेशराम के निर्देशन में इन कलाकरों ने इंडियन मार्शल आर्ट के हैरतअंगेज मूव्स पेश किए और तालियां बटोरी।
कई विधाएं प्रस्तुत
चित्रकार अनिता पांचाल ने पेंटिंग्स की प्रदर्शनी लगाई। साथ ही पेंेटिंग का लाइव डेमो भी दिया। कई युवा कलाकारों ने एकल अभिनय भी किया, संगीत की प्रस्तुति भी हुई। सरोज कुमार ने कविता पढ़ी तो किरण शानी ने नाट्य कला पर व्याख्यान दिया। कार्यक्रम का समय बहुत लंबा होने से दोपहर में कार्यक्रम ढीलाढाला भी रहा। दोपहर के सत्र में कहानी पाठ के सत्र भी उबाऊ रहे।
Published on:
29 Mar 2019 02:43 pm
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