18 जनवरी 2026,

रविवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आबकारी अधिकारी के पास मिली 100 करोड़ की संपत्ति, डायरी ने उगले राज

काली कमाई... काले कोड डायरी ने उगले राज : ये क्या है... मुंगावली 30 और कोलारस 20

2 min read
Google source verification

इंदौर. लोकायुक्त पुलिस धार के जिला आबकारी अधिकारी पराक्रम सिंह चंद्रावत की बेहिसाब संपत्ति की जांच कर रही है। छापामार कार्रवाई के दौरान पांच बोरे दस्तावेज जब्त किए गए हैं।

एक हिसाब-किताब की डायरी भी निकली है, जिसमें मुंगावली 30 और कोलारस 20 लिखा मिला है। इसके अलावा कई लोगों से कोड में लेन-देन लिखा है। इधर, आज लॉकर खोलकर भी देखे जाएंगे। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की कृपा से जिला आबकारी अफसर बने पराक्रमसिंह ने नौकरी के हिसाब से अब तक एक करोड़ रुपए कमाए हैं, लेकिन उसके पास मिली संपत्ति का आंकड़ा 500 करोड़ के पार आंका जा रहा है।

कल छापामार कार्रवाई के दौरान कई अहम दस्तावेज भी मिले जिसमें एक डायरी भी है जिसमें सांकेतिक भाषा में लेन-देन का हिसाब लिखा गया है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि ये आंकड़ा लाख का है जिसे चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

नीरज-पंजवानी के नाम की एंट्री
इसके अलावा डायरी में नीरज और सन्नी के नाम की कई एंट्री मिली हैं। नीरज यानी नीलू पंजवानी से लगाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि सन्नी भी पंजवानी का ही कर्मचारी है। इसके चलते ही लोकायुक्त टीम ने बीआरटीएस स्थित पिं्रसेस बिजनेस पार्क की दूसरी मंजिल स्थित पंजवानी के ऑफिस पर छापा मार कार्रवाई की थी।

उन्हें जानकारी लगी है कि दोनों ही बिजनेस पार्टनर हंै। हालांकि पंजवानी के ऑफिस से कोई दस्तावेज नहीं मिले हैं। बताते हैं कि उसे लोकायुक्त के ऑफिस आने का अंदेशा हो गया था जिसके चलते पहले ही सतर्क हो गया था।

आज खुलेगा लॉकर
चंद्रावत के पास से करोड़ों रुपए की संपत्ति सामने आई है। साथ में दो एचडीएफसी बैंक के लॉकर भी मिले हैं जिन्हें पुलिस आज खंगालेगी। संभावना जताई जा रही है कि इसमें भी संपत्ति के दस्तावेज और हीरे जवाहरात निकल सकते हैं।

एक शहादत और दो पुरस्कार
पराक्रम के पिता नरेंद्रसिंह चंद्रावत 1996 में महू टीआई थे। एक गुंडे को पकडऩे के दौरान चाकू लगने से उनकी मौत हो गई थी। उनके बाद 2001 में पराक्रम की अनुकंपा नियुक्ति हो गई। उसे तृतीय श्रेणी कर्मचारी बना गया था। तत्कालिन मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह की कृपा से उसे सीधे आबकारी अधिकारी बना दिया गया।

टीआई चंद्रावत की मौत के बाद आर्थिक स्थिति खराब बताई गई और पराक्रम की मां पुष्पलता के नाम पर पेट्रोल पंप भी आबंंटित कर दिया गया। ये सारी कृपा इसलिए थी कि वे पूर्व मंत्री महेंद्रसिंह कालूखेड़ा के रिश्तेदार हंै।

कर रहे हैं जांच
हां, पराक्रम की संपत्ति निकाली जा रही है। कई दस्तावेज मिले हैं, जिनमें लेन-देन का हिसाब भी है। उसकी जांच की जा रही है।
संतोष सिंह भदौरिया, डीएसपी लोकायुक्त