सीईपीआरडी के सचिव संदीप नारूलकर ने कहा, नदी की प्रणाली में सुधार के लिए कई सालों से अलग-अलग सरकारी विभागों ने काम किया। कई योजनाएं आज भी चल रही हैं। इनमें खान-सरस्वती संगम पर झील बनाना, डे्रनेज लाइनें बिछाना, नाला टैपिंग करना आदि काम कराए गए, लेकिन वह सफल नहीं हुए। कबीटखेड़ी में जल-मल शुद्धिकरण के लिए अत्याधुनिक संयंत्र भी लगाए गए, लेकिन मामला आज तक हल होता नहीं दिख रहा है। योजनाएं अलग-अलग बनाई गईं, जिससे कोई भी योजना सफल नहीं हो सकी। नदी सफाई को लेकर प्रोजेक्ट बना चुकी अर्शिया नूर कुरैशी कहती हैं कि खान नदी में इतने नाले और मलबा डाल दिया गया कि नदी का सांस लेना मुश्किल हो गया। सबसे पहले उसकी सफाई कर गाद, मलबा हटाना होगा, जिससे वह सांस ले सके।