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फीनिक्स टाउनशिप: कलेक्टर बोले ‘जिनके पास रजिस्ट्रियां हैं उन्हें 15 दिन में मिलेंगे प्लॉट’

चंपू अजमेरा की कॉलोनी फीनिक्स टाउनशिप में लोगों के साथ हुई धोखाधड़ी में लोगों की सुनवाई के लिए कलेक्टर पी नरहरि, एसडीएम और तहसीलदार पहुंचे।

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Narendra Hazare

Jul 15, 2016

collector

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इंदौर.
चंपू और चिराग शाह द्वारा की गई प्लॉटों की धोखाधड़ी मामले में
कलेक्टर की अगुवाई में प्रशासन ने गुरुवार को जनसुनवाई की। इस दौरान
पीडि़तों ने कहा, 'हमारी शिकायतों पर पुलिस ने भी ध्यान नहीं दिया। एक
थानेदार तो यहां तक बोले कि पांच प्रतिशत का हिस्सा दो तो तुम्हारे प्लॉट
की समस्या का हल करवा दूंगा। थाने जाओ तो केस दर्ज करने में आनाकानी की
जाती है। कलेक्टर ने इस मामले में डीआईजी से बात करने का आश्वासन दिया। साथ
ही कहा, '15 दिन में जिनके पास प्लॉट की रजिस्ट्री है, उन्हें कब्जा
दिलाया जाएगा।


फीनिक्स टाउन में गुरुवार दोपहर एसडीएम रवीश श्रीवास्तव व तहसीलदार
राजकुमार हलदर अमले के साथ पहुंचे। फीनिक्स वेलफेयर सोसायटी के पदाधिकारी
मुकेश चौकसे के साथ अन्य पीडि़त प्लॉटधारक बड़ी संख्या में मौजूद थे।
अफसरों की टीम ने पीडि़तों के आवेदन लेना शुरू किए। कुछ देर बाद कलेक्टर
पी. नरहरि भी लोगों के बीच पहुंचे। जनसुनवाई में अधिकांश ऐसे लोग आए थे,
जिनके पास प्लॉट की रजिस्ट्री है, लेकिन प्लॉट नहीं मिला।

यहां देखिए वीडियो:-




2010 से काट रहे चक्कर
पीडि़तों ने बताया कि वे वर्ष 2010 से परेशान होकर प्रशासन व पुलिस के चक्कर काट रहे हैं। दिसंबर 2012 में लसूडिय़ा थाने में हुई जनसुनवाई में शिकायत की, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ी। प्लॉटधारकों ने बताया कि चंपू अजमेरा ने जहां प्लॉट बताकर रजिस्ट्री की वहां खेती होती है, जमीन पर किसानों का कब्जा है। मकान बनाकर रहने वाली वैशाली तिवारी का कहना था कि कॉलोनी में आधारभूत सुविधाएं नहीं हैं।

तीन चरण में होगा काम

1. जिन लोगों के पास प्लॉट की रजिस्ट्री है, उनकी सूची बनेगी। नक्शे के हिसाब से प्लॉटों की जानकारी निकालेंगे। जिन लोगों के पास रजिस्ट्री है, उन्हें उपलब्ध प्लॉट पर 15 दिन में कब्जा दिलाएंगे। प्रशासन सभी को प्रमाण-पत्र भी देगा।

2. जिन्होंने पैसा दिया, लेकिन रजिस्ट्री नहीं हुई, उनकी विधि अनुरूप रजिस्ट्री कराएंगे।

3. जिन लोगों को प्लॉट नहीं मिले हैं, उन्हें पैसा दिलाने का प्रयास होगा।

एकजुट हों रहवासी
कलेक्टर पी. नरहरि ने कहा कि सभी पीडि़तों को तीन चरणों में उनका हक दिलाया जाएगा। इसके अलावा जहां तक विकास की बात है तो बिजली कंपनी से लाइट कनेक्शन की पूरी जानकारी ले रहे हैं। विकास प्रशासन कराएगा, पैसा कॉलोनाइजर से ही लेगा, इसकी रणनीति तैयार हो रही है। उन्होंने पीडि़तों से कहा कि वे एकजुट रहें और धोखाधड़ी करने वाले को सजा दिलवाएं। कलेक्टर का कहना था कि कड़ी कार्रवाई होगी, तभी भविष्य में कोई जमीन के नाम पर धोखाधड़ी नहीं करेगा।

एक भी प्लॉट नहीं मिला

- राजेश पुराणिक ने बताया कि उनके तीन प्लॉट थे, तीन बार अलग-अलग प्लॉट नंबर की रजिस्ट्री कराई, लेकिन एक भी प्लॉट नहीं मिला। पुलिस से शिकायत की तो तत्कालीन लसूडिय़ा टीआई का तर्क था कि हमारे ऊपर से हाथ बंधे हैं, चंपू अजमेरा पर कार्रवाई नहीं कर सकते।

-पीडि़त डीपी शुक्ला ने प्रशासन पर ही सवाल खड़े कर दिए। उनका कहना था कि प्रशासन की गलती से कॉलोनाइजर ने धोखाधड़ी की। प्रशासन ने बंधक प्लॉट कैसे छोड़ दिए, जिस अफसर ने छोड़े उस पर क्या कार्रवाई हुई?

-हीरालाल मलोरिया ने बताया कि उन्होंने घाना में रहकर काम किया। वापस आकर वर्ष 2008 में फीनिक्स में प्लॉट लिया। रजिस्ट्री हुई, लेकिन अब तक प्लॉट नहीं मिला।

- डिम्पल तुरवानिया निवासी स्कीम नं. 74 की ओर से उपस्थित हुए पिता ने बताया कि प्लॉट की रजिस्ट्री हो चुकी है, लेकिन प्लॉट कहां है, पता नहीं। मोनिका पालीवाल, सुरभि तलवार ने भी ऐसी ही शिकायत की।

- संदीप जैन ने बताया कि मुंबई में रहने वाली बहन ने प्लॉट लिया, रजिस्ट्री कराई, लेकिन कब्जा नहीं मिला। जिनेश जैन ने बताया कि उनकी बेटी एनआरआई है, रजिस्ट्री के बाद प्लॉट नहीं दे रहे।

- अमित शर्मा ने बताया कि पहले जिस प्लॉट की रजिस्ट्री कराई, वह मौजूद नहीं था। कॉलोनाइजर ने दूसरे प्लॉट की रजिस्ट्री की, उसका आधा हिस्सा दूसरी कॉलोनी का है।

- शशि जैन ने बताया कि उनके प्लॉट की भी दो बार अलग-अलग नंबर पर रजिस्ट्री हुई, लेकिन प्लॉट नहीं मिला।

- प्रमिला ने बताया कि जेवर बेचकर तीन प्लॉट की रजिस्ट्री कराई, लेकिन प्लॉटों का पता नहीं है। अब बेटी की शादी है तो प्लॉट बेचकर आर्थिक तंगी भी दूर नहीं कर सकते।

फैक्ट फाइल

- 2303 प्लॉट हैं कॉलोनी में।
- 1000 लोगों को हुए हैं आवंटित।

-80 लोगों ने दर्ज कराई शिकायत।

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