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जानिए अघोरियों का जीवन कितना कठिन और मस्तमौला…

भगवान शिव की प्राप्ति के लिए रहते हैं तपस्या में लीन

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Kamal Singh

Apr 25, 2016

Aghori baba life story

Aghori baba life story

महाकाल की नगरी उज्जैन में सिहंस्थ के लिए साधु-संतों का डेरा लगा हुआ है। कुछ अपनी विशेष साधना के कारण चर्चा में हैं। इन साधुओं से अलग एक और दुनिया है- अघोरी बाबाओं की।

ये अपने तंत्र-मंत्र के कारण प्रसिद्ध हैं। अघोरी साधुओं के बारे में जानने की जिज्ञासा सभी को होती है कि ये कौन हैं और कैसे रहते हैं, इनका जीवन कैसा है। भारत के योगी अघोरी साधु अपनी रोजाना की भयानक रीतियों और अनुष्ठानों के लिए कुख्यात हैं। अघोरी भारत के साधुओं और संन्यासियों का एक विशेष कबीला है। इनका अस्तित्व कई हजारों सालों से हैं। सबसे पहले अघोरी साधु कीनाराम थे। वे वाराणसी (बनारस) में गंगा नदी के किनारे रहते थे जहां काशी विश्वनाथ मंदिर है। मोक्ष की तलाश में ये साधु भैरव के रूप में भगवान शिव की पूजा करते हैं। यह स्वतंत्रता उन्हें उस परम तत्व के साथ अपनी पहचान का अहसास कराती है। जिस मौत का हम खौफ लेकर जीते हैं ये उसी मौत का आनंद लेते हुए सम्मान करते हैं।

भगवान को प्राप्त करने का अलग तरीका
उनका भगवान को प्राप्त करने का बिलकुल अलग तरीका है। एक ओर जहां हम पवित्रता और शुद्धि में भगवान को तलाशते हैं वहीं उनका मानना है कि गंदगी में पवित्रता को ढूंढऩा ही ईश्वर प्राप्ति है।


नाराजगी नहीं रखते
अघोरी साधु दिल में किसी के प्रति नाराजी नहीं रखते। इनका मानना है कि जो लोग नफरत करते हैं, वे ध्यान नहीं कर सकते। कुत्तों और गायों के साथ अपना भोजन बांटने में इन्हें कोई घृणा नहीं होती है। ये जब भी खाना खाते हैं उनके साथ रहने वाले जानवर भी एक ही प्याले में साथ खाते हैं। उनका मानना है कि यदि वे पशुओं के खाना गंदा करने जैसी तुच्छ चीजों पर गौर करेंगे तो वे भगवान शिव को प्राप्त करने के लिए ध्यान केंद्रित नहीं कर पाएंगे।

भस्म ही वस्त्र
इन्हें मृत या श्मशान का भय नहीं होता है उनका जीवन इनके बीच ही बीतता है। वे रात और दिन वहीं रहते हैं। राख या भस्म इनके लिए वस्त्र की तरह है जिसे भगवान शिव ने भी धारण किया था। बचपन से ही वे इसका इस्तेमाल करते हैं। 5 तत्वों से बनी यह भस्म उन्हें अनेक बीमारियों और मच्छरों से बचाती है। उनका पूर्ण ध्यान भगवान शिव को प्राप्त करना होता है और इसके लिए वे बाहर कम ही निकलते हैं। उन्हें अपने ध्यान और आराधना में सच्चे सुख की प्राप्ति होती है।

श्मशान में बैठकर ध्यान करना
रात में लोग भूतों और राक्षसों के डर से जिस शमशान में जाने से डरते हैं ये लोग वहां बैठकर ध्यान करते हैं। साफ. दूषित, पवित्र-अपवित्र के अंतर को मिटाकर वे उस जादुई शक्तियों को हर चीज का इलाज करने के लिए हासिल करते हैं।

नर भक्षी
घनी आबादी वाला शहर होने के बावजूद अघोरी वाराणसी में बिना किसी रोकटोक के नर मांस खाते हैं। वे अपनी जरूरत के लिए लोगों को मारते नहीं हैं, केवल श्मशान से शव लेकर खाते हैं। इन शवों को ये कच्चा ही खाते हैं। कभी-कभी इन्हें खुले में आग जलाकर भी पकाते हैं। मांस की एक निश्चित मात्रा खाने के बाद वे शव के ऊपर बैठकर साधना करते हैं जो पूरी रात चलती है।

डरावना रंग-रूप
अघोरी अपने शरीर पर सिर्फ जूट का एक छोटा कपड़ा लपेटे नग्न ही घूमते हैं। उनके लिए नग्न होने का मतलब है सांसारिक चीजों से लगाव न रखना। अधिकतर बार वे अपनी नग्नता मिटाने के लिए शरीर पर मानव शवों की भस्म रगड़ते हैं। मानव खोपड़ी को सिर में आभूषण की भांति धारण करते हैं।

रहस्यमयी दवाएं
अघोरी दावा करते हैं कि कई लाइलाज बीमारियों का इलाज उनके पास है। ये दवाइयां हैं मनुष्य की हड्डियों से निकला हुआ तेल जिसे ये जलती चिता से प्राप्त करते हैं। ये दावा करते हैं कि इस तेल में कई बीमारियों का इलाज है।










तांत्रिक शक्तियां और काला जादू
ऐसा माना जाता है कि इलाज करने की शक्ति उनमें काले जादू से आती है। वे कहते हैं कि वे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कभी बुरे कार्यों के लिए नहीं करते। इसके बजाय वे लोगों के रोग को समझते हैं और उनके पास आए हुए लोगों का इलाज अपने काले जादू से करते हैं। काले जादू का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले कुछ अघोरी साधुओं के अनुसार वे भगवान शिव और काली मां को जितना प्रसन्न करेंगे उनकी शक्ति उतनी ही बढ़ेगी।

मानव कंकाल और खोपड़ी उनकी निशानी है। नदी पर तैरती हुई पवित्र लोगों की लाशों से ये सब निकालना इनका पहला काम होता है। अपने गुरु से जादुई मंत्र हासिल करने के बाद ये अघोरी के रूप में जीवन बिताना शुरू करते हैं और मृत अवशेषों को खाते हैं और गंगा के ठंडे बर्फीले पानी में नहाते हैं। आग का धूना उनका मंदिर होता है और भूतों और बुरी आत्माओं का निवास श्मशान उनका घर होता है।

भयानक भूख
अघोरी अपनी भयानक भूख के लिए जाने जाते हैं। वे ऐसी चीजें खाते हैं जो एक सभ्य व्यक्ति नहीं खा सकता। जैसे कचरा पात्र में डाला खाना, मल, मूत्र और सड़े हुए मानव शव। इस भयानक भूख के पीछे उनके अपने तर्क हैं। मल, मूत्र जैसी उत्सर्ग चीजों को खाने के पीछे उनका मानना है कि इससे अहंकार का नाश होता है और सुंदरता का मानवीय दृष्टिकोण हटता है जो कि अघोरी के रूप में जीवन जीने के लिए आवश्यक है।

तांत्रिक शक्तियां और काला जादू
ऐसा माना जाता है कि इलाज करने की शक्ति उनमें काले जादू से आती है। वे कहते हैं कि वे अपनी शक्तियों का इस्तेमाल कभी बुरे कार्यों के लिए नहीं करते। इसके बजाय वे लोगों के रोग को समझते हैं और उनके पास आए हुए लोगों का इलाज अपने काले जादू से करते हैं। काले जादू का ज्यादा इस्तेमाल करने वाले कुछ अघोरी साधुओं के अनुसार वे भगवान शिव और काली मां को जितना प्रसन्न करेंगे उनकी शक्ति उतनी ही बढ़ेगी।

मंत्र और गांजा
कोई भी अघोरी अपने आपको भांग और गांजे के सेवन से नहीं रोक सकता। उनका मानना है कि इससे उन्हें दैनिक क्रियाएं करने और धार्मिक मंत्रों पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिलती है।

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