14 मई 2015 को अभियांत्रिकी विभाग को जमीन का कब्जा देने के दौरान शर्तें तय थी, जितनी जमीन कृषि कॉलेज मुहैया करवा रहा है, उस जमीन के पिछले हिस्से में कृषि कॉलेज की जमीन को सुरक्षित करने के लिए अभियांत्रिकी विभाग बाउंड्रीवॉल बनाएगा। अभियांत्रिकी विभाग ने इस पर सहमति भी दी, लेकिन इस शर्त को विभाग ने पूरा नहीं किया। 6 माह तक विभाग ने बाउंड्रीवॉल नहीं बनाई तो कृषि विभाग ने जमीन का हस्तांंतरण रद्द करने की बजाय स्वयं की शर्तों का उल्लंघन कर दिया। कॉलेज के जिम्मेदारों ने कॉलेज के राजकोष में सेंध लगाई और करीब 40 लाख रुपए की लागत से बाउंड्रीवॉल का निर्माण कर दिया।