
बुंदेलखंडी घरों में आज होगी गजलक्ष्मी व्रत कथा
- सुहागिन महिलाएं व्रत रख करेंगी पूजन
इंदौर. शहर के बुंदेलखंडी घरों में मंगलवार को महिलाएं गजलक्ष्मी व्रत रखेंगी। सुहागिन मिट्टी के हाथी (ऐरावत) पर सवार मां लक्ष्मी की पूजा करेंगी। घर-घर में हाथी पर सवार माता लक्ष्मी की मिट्टी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। आटे से बने मिष्ठान्न व आभूषण मां को अर्पित किए जाएंगे। पं. शशि भूषण शर्मा ने बताया, व्रत प्रतिवर्ष आश्विन कृष्ण अष्टमी पर किया जाता है। कथा होती है और शाम को पूजन किया जाता है।
इस व्रत की कक्षा के अनुसार एक समय महर्षि वेदव्यासजी हस्तिनापुर गए। व्यासजी से माता कुंती तथा गांधारी ने पूछा आप हमें ऐसा सरल व्रत तथा पूजन बताएं, जिससे हमारी राज्यलक्ष्मी, सुख-संपत्ति, संतानें समृद्ध बनी रहें। व्यासजी ने महालक्ष्मी व्रत व गजलक्ष्मी व्रत के बारे में बताया। इस दिन स्नान कर 16 सूत के धागों का डोरा बनाकर, उसमें 16 गांठ लगाए, हल्दी से पीला करें, 16 दूब व 16 गेहूं डोरे को चढ़ाएं। उपवास रखकर गजलक्ष्मी की स्थापना कर पूजन करें।
इस दिन गांधारी ने नगर की सभी महिलाओं को बुलाया, लेकिन कुंती को नहीं बुलाया। कुंती ने इसे अपमान समझा। उनकी उदासी देख पुत्रों ने प्रश्न किया। कुंती ने बताया, गांधारी ने मिट्टी का हाथी बनाकर उसके पूजन के लिए नगर की महिलाओं को बुलाया है। अर्जुन ने कहा, आप भी सभी महिलाओं को बुला लें, पूजा की तैयारी करें, हमारे यहां स्वर्ग से आने वाले ऐरावत हाथी की पूजन होगी।
शाम होते ही इंद्र ने अपना ऐरावत हाथी भेजा और सभी महिलाओं ने उसकी पूजा की। 16 गांठों वाला डोरा लक्ष्मीजी को चढ़ाया। मंत्रोच्चार के साथ पूजन किया और पूजन के बाद महालक्ष्मी जी को जलाशय में विसर्जित किया। वहीं, ऐरावत हाथी को इंद्रलोक भेज दिया। इस तरह इस व्रत का पूजन शुरू किया। यह व्रत अधिकांशत बुंदेलखंड में किया जाता है। इंदौर के आसपास धार, देवास में भी प्रमुखता से त्योहार मनाया जाता है।
Published on:
02 Oct 2018 06:11 am
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