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जल्द ही सामने आएंगे एल्डरमैन व आईडीए बोर्ड

  भाजपा में सुगबुगाहट हुई तेज, दर्जनभर होंगे निगम में वरिष्ठ पार्षद, वहीं आठ प्राधिकरण में, कार्यकर्ताओं को संतुष्ट करेगा संगठन

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जल्द ही सामने आएंगे एल्डरमैन व आईडीए बोर्ड

जल्द ही सामने आएंगे एल्डरमैन व आईडीए बोर्ड

इंदौर। भाजपा में एक बार फिर एल्डरमैन और आईडीए बोर्ड को लेकर सुगबुगाहट तेज हो गई है। प्रदेश का संगठन चाहता है कि जल्द से जल्द से नियुक्ति हो ताकि चुनाव से पहले कुछ कार्यकर्ता उपकृत होकर सत्ता का स्वाद चखें। इधर, स्थानीय संगठन अब विधायकों से समन्वय करके नाम निकालकर प्रदेश को भेजेगा।

इंदौर विकास प्राधिकरण (आईडीए) में पिछले दिनों गोलू शुक्ला को उपाध्यक्ष बना दिया गया, जिसके बाद से भाजपा हलकों में हलचल तेज हो गई। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता नाराज हैं जो कि सरकार के आने पर उम्मीद से थे कि उनका भी भला होगा। उनकी भी मेहनत को सरकार का प्रतिसाद मिलेगा, लेकिन तीन साल से अधिक होने आ गए, अब तक सत्ता से बंटने वाली रेवड़ी से भाजपाई वंचित हैं। सरकार आने के बाद शुक्ला से पहले दो ही नियुक्तियां हुईं थीं। इनमें आईडीए अध्यक्ष जयपालङ्क्षसह चावड़ा तो दूसरे सावन सोनकर (अजा वित्त विकास निगम अध्यक्ष) का नाम शामिल हैं।

अंदर ही अंदर कार्यकर्ताओं में नाराजगी है, क्योंकि नगर निगम चुनाव में भी टिकट वितरण में वे ठगा गए। विधायकों ने अपने खास चेलों को टिकट दिलाया। हालांकि सरकार में कई पद हैं, जो खाली पड़े हैं। इन्हें भरकर नेता व कार्यकर्ताओं को उपकृत किया जा सकता है। उसमें इंदौर से १२ एल्डरमैन तो ८ लोगों का आईडीए में संचालक मंडल बनाया जाना है। इन नियुक्तियों से इंदौर के २० नेताओं को सत्ता का अहसास हो सकता है, लेकिन आइडीए में शुक्ला को बनाने के बाद से बवाल मचा हुआ है। नेताओं ने प्रदेश संगठन की घेराबंदी कर रखी है, जिसके चलते खासा माहौल तैयार हो गया है। अब प्रदेश संगठन ने नाम मांग लिए हैं ताकि सरकार पर दबाव बनाकर घोषणा कराई जा सके।

कम चलेगा पॉकेट का माल
आमतौर पर भाजपा का संगठन अब सत्ता आधारित हो गया है। विधायकों से पूछकर नियुक्तियां होती हैं और विधायक अपनी पॉकेट के समर्थकों को उपकृत करते हैं ताकि उनकी सल्तनत बनी रहे। चाहे मंडल अध्यक्ष की नियुक्ति हो या पार्षद का टिकट व आइडीए सहित अन्य सत्ता व संगठन की राजनीतिक नियुक्तियां हों। ऐसे में वे नेता व कार्यकर्ता हमेशा उपेक्षा के शिकार हो जाता हैं जो संगठन के प्रति वफादार हैं। इन नियुक्तियों में ऐसे नामों पर भी विचार किया जाएगा। संभावना है कि एक नियुक्ति विधायक की पसंद से होगी तो दूसरे को संगठन के हिसाब से बनाया जाएगा। इधर, बड़े नेता भी अपने चेले चपाटों को बनाने के लिए दबाव बना रहे हैं।