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”मैं लौटकर आऊंगा कूच से क्यों डरूं”….जिंदगी के संघर्ष में जोश भरती है वाजपेयी की ये कविताएं

पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्थिति बेहद नाजुक

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इंदौर

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Amit Mandloi

Aug 16, 2018

Atal Bihari Vajpayee

जब देर रात दुकान पर नमकीन लेने पहुंच गए थे पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी

इंदौर. भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की स्थिति बेहद नाजुक है। देर रात एम्स ने अटलजी का मेडिकल बुलेटिन जारी किया। इसमें बताया गया कि तबीयत पिछले 24 घंटे में वाजपेयी की काफी बिगड़ गई है। फिल्हाल उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। एम्स कुछ देर में मेडिकल बुलेटिन जारी कर सकता है। गुरुवार सुबह से ही लोगों के एम्स आने का सिलसिला शुरू हो गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार शाम को एम्स पहुंचे थे। अटलजी को यूरिन इन्फेक्शन की शिकायत के चलते 11 जून को एम्स में भर्ती किया गया था। वे पिछले 9 साल से बीमार चल रहे हैं। इसके बाद केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल, सुरेश प्रभु, हर्षवर्धन, जितेंद्र सिंह और अश्विनी कुमार चौबे भी एम्स गए। देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी एक अच्छे लेखक और वक्ता भी है। उनकी कविताएं जीवन के संघर्ष में आगे बढऩे की प्रेरणा देती हैं। उनकी कविता हार नहीं मानूंगा हर असंभव कार्य संभव बनाने का जोश भरती है। आज हम आपको बता रहे हैं ऐसी ही कुछ कविताएं जो जीवन को दिशा देती है।

1.ठन गई!
मौत से ठन गई!

जूझने का मेरा इरादा न था,
मोड़ पर मिलेंगे इसका वादा न था,

रास्ता रोक कर वह खड़ी हो गई,
यूं लगा जिंदगी से बड़ी हो गई।

मौत की उमर क्या है? दो पल भी नहीं,
जिंदगी सिलसिला, आज कल की नहीं।

मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं,
लौटकर आऊंगा, कूच से क्यों डरूं?

तू दबे पांव, चोरी-छिपे से न आ,
सामने वार कर फिर मुझे आजमा।

मौत से बेखबर, जिंदगी का सफ़र,
शाम हर सुरमई, रात बंसी का स्वर।

बात ऐसी नहीं कि कोई ग़म ही नहीं,
दर्द अपने-पराए कुछ कम भी नहीं।

प्यार इतना परायों से मुझको मिला,
न अपनों से बाक़ी हैं कोई गिला।

हर चुनौती से दो हाथ मैंने किए,
आंधियों में जलाए हैं बुझते दिए।

आज झकझोरता तेज़ तूफ़ान है,
नाव भंवरों की बांहों में मेहमान है।

पार पाने का क़ायम मगर हौसला,
देख तेवर तूफ़ां का, तेवरी तन गई।

मौत से ठन गई।

2.बाधाएं आती हैं आएं
घिरें प्रलय की ओर घटाएं
पांवों के नीचे अंगारे
सिर पर बरसे यदि ज्वालाएं
निज हाथों में हंसत-हंसते
आग जलाकर जलना होगा
कदम मिलाकर चलना होगा

3. क्या हार में क्या जीत में
किंचित नहीं भयभीत मैं
कर्तव्य पथ पर जो भी मिला
यह भी सही वो भी सही
वरदान नहीं मागूंगा
हो कुछ पर हार नहीं मानूंगा

4. देश एक मंदिर है, हम पूजारी हैं
राष्ट्र देव की पूजा हमें, खुद को समर्पित कर देना चाहिए

5.अभिनंदन की भूमि है
अपर्ण की भूमि है
यहां की हर नदी
हमारे लिए गंगा है
हर कंकड़ में है शंकर है
जियेंगें इस देश के लिए
और मेरेंगे तो भी इसी देश के लिए

6.छोटे मन से कोई बड़ा नहीं होता
टूटे मन से कोई खड़ा नहीं होता

7. मैं जी भर जिया, मैं मन से मरूं
लौटकर आऊंगा कूच से क्यों डरूं
तू दबे पांव चोरी छिपे से ना आना
सामने वार कर फिर मुझे आजमा
ंंमौत से बेखबर जिंदगी का सफर
शाम हर सुरमई, रात बसंी का स्वर

8. बेनकाब चेहरे हैं,
दाग बड़े गहरे हैं,
टूटता तिलस्म, आज सच से भय खाता हूँ ।
गीत नही गाता हूँ ।

लगी कुछ ऐसी नज़र,
बिखरा शीशे सा शहर,
अपनों के मेले में मीत नहीं पाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ ।

पीठ मे छुरी सा चाँद,
राहु गया रेखा फाँद,
मुक्ति के क्षणों में बार-बार बँध जाता हूँ ।
गीत नहीं गाता हूँ ।