
भीड़ में कार्यकर्ताओं को पहचान लेते थे अटलजी, जानिए इंदौर यात्रा के कुछ रोचक किस्से
मोहित पांचाल @ इंदौर. भारत रत्न और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की तबीयत नाजुक है। एम्स में उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर रखा गया है। वाजपेयी को इंदौर से भी खासा मोह रहा है। यहां के नेताओं को वे नाम से पहचानते थे। मालवा का भोजन व नाश्ता भी उन्हें बहुत पसंद था। उनके साथ काम करने वाले कई नेताओं के जहन में आज भी उनकी यादें कैद हैं, जो भुलाए नहीं भूल सकतीं।
कवि के साथ भाजपाई होने की वजह से सत्यनारायण सत्तन से अटलजी का विशेष प्रेम व लगाव था। 2 मई 1980 को दिल्ली के बोट क्लब पर कश्मीर बचाओ रैली में देशभर से दस लाख कार्यकर्ता इकट्ठा हुए थे। सत्तन कार्यकर्ताओं की तरह मंच के नीचे बैठे थे, जिस पर अटलजी की नजर पड़ गई। उन्होंने मंच से नाम लेकर बुलवाया। इसी प्रकार मुंबई में जब भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन था, जिसमें अखिल भारतीय कवि सम्मेलन रखा गया, उसकी संचालन की जिम्मेदारी सत्तन को दी गई। इस पर अटलजी ने उन्हें तलब कर कहा कि तीन घंटे में सम्मेलन समाप्त हो जाना चाहिए। सत्तन का कहना था कि ढाई घंटे में हो जाएगा। अटलजी बोले कि मैं तीन घंटे बोल रहा हूं और तुम ढाई घंटे की बात कर रहे हो। सत्तन ने जवाब दिया कि हम सब कवि ढाई घंटे में बोल लेंगे और आधा घंटा आपको भी तो देना पड़ेगा। ये सुनकर अटलजी मुस्कुरा दिए। आइए जानते हैं अटलजी से जुड़े नेताओं के किस्से
किस्सा-ए-चरणसिंह
सत्यनारायण सत्तन ने बताया कि संयुक्त मोर्चा के दौरान इंदौर के राजबाड़ा में चौधरी चरणसिंह और अटलजी की संयुक्त सभा रखी गई थी। रेसीडेंसी कोठी में तैयारी चल रही थी कि सिंह समर्थक रमाशंकर सिंह ने कहा कि अटलजी के बाद चरणसिंहजी को बोलने के लिए बुलाया जाए। इस पर सत्तन ने टिप्पणी कर दी कि क्यों भद्द पिटवाने पर तुले हो। ये बातें कमरे में अटलजी तक पहुंच गई। वे बाहर आकर मुझसे बोले कि क्या बात है सत्तन? मैंने जवाब दिया कि ये लोग बोल रहे हैं कि चरणसिंहजी को बाद में बुलवाया जाए। अटलजी मांजरा भांप गए बोले कि ठीक तो बोल रहे हैं। वे मेरे वरिष्ठ हैं, मैं उनका सम्मान करता हूं। जैसा ये बोल रहे हैं, वैसा ही होगा। सभा में अटलजी का भाषण खत्म हुआ और चरणसिंह को बोलने के लिए बुलाया गया। ये सुनकर भीड़ जाने लगी। तब अटलजी भी बैठाने का बोलने लगे, लेकिन जनता नहीं मानी तब श्रीवल्लभ शर्मा ने मुझे बुलाया। मैंने कविता सुनाई, जब और, और के नारे लगे, तब मैंने लालच दिया कि चरणसिंहजी के भाषण के बाद। तब जाकर चौधरी का भाषण पूरा हो पाया।
जब अटलजी ने कान मरोड़े
लघु उद्योग निगम के अध्यक्ष बाबूसिंह रघुवंशी ने बताया कि 1983 में भाजपा का राष्ट्रीय अधिवेशन इंदौर में रखा गया था। मैं नगर भाजपा का महामंत्री होने के साथ अधिवेशन का सहप्रभारी भी था। अटलजी ने सभा के पहले मुझे बुलवाया। पहुंचने पर बोले बाबूसिंह सभा कहां है? मैंने जवाब दिया मैदान में। तीन बार पूछने पर मंैने वही बोला, तो मेरे कान मरोडक़र बोले- तुम मालवा वाले नहीं सुधरोगे। मैदान नहीं मैदान होता है। उन्होंने दस बार मुझसे मैदान बुलवाया। अटलजी खान-पान के शौकीन थे। प्रदेश में पटवा सरकार बनने के बाद इंदौर में राष्ट्रीय परिषद का अधिवेशन हुआ था। इसमें पलासिया क्षेत्र में एक जगह उनका नाश्ता रखा गया था, जिसमें कॉर्नफ्लेक्स, जैम-बटर और सैंडविच रखे थे। कुछ देर बाद मैं वहां पहुंच गया तो मुझे बोले देख बाबूसिंह ये क्या खिला रहे हैं मुझे? इस पर मैं उनके लिए छावनी से पोहे, जलेबी और कचोरी लेकर पहुंचा, तब उन्होंने नाश्ता किया। प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वे जब मुझसे मिले तो पूछते थे कैसे हो बाबूसिंह।
Updated on:
16 Aug 2018 01:01 pm
Published on:
16 Aug 2018 12:45 pm

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