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15 दिन तक रोशनी जाने का करते रहे इंतजार

बड़वानी नेत्र शिविर कांड : ऑपरेशन के दूसरे ही दिन सामने आ गया था संक्रमण, फिर भी जिम्मेदारों ने मरीजों को नहीं भेजा इंदौर

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Hussain Ali

Dec 28, 2015

इंदौर. बड़वानी नेत्र शिविर में मरीजों की आंखों में संक्रमण फैलने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग उन्हें इलाज मुहैया कराने की बजाय अपनी गलतियां छिपाने में जुटा रहा। जिम्मेदार 15 दिन तक संक्रमित मरीजों को जिला अस्पताल से निजी आई सेंटर की दौड़ लगवाते रहे। मामला गंभीर हो गया तो डॉक्टरों ने 16वें दिन इंदौर रैफर किया। विभागीय लेतलाली ने 63 मरीजों की आंखों की रोशनी छीन ली। पत्रिकाÓ की पड़ताल में रविवार को इसका खुलासा हुआ।

अरबिंदो अस्पताल में दो मरीजों की कंसेन्ट रिपोर्ट और बड़वानी में हुई जांच व इलाज की रिपोर्ट ने अफसरों की यह पोल खोली है। विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण के दूसरे-तीसरे दिन ही मरीजों को बेहतर इलाज उपलब्ध होता तो करीब 80 फीसद मरीजों की रोशनी बचाई जा सकती थी।

ऐसे बरती गई लापरवाही

सेंधवा के 65 वर्षीय रशीद खान का 17 नवंबर को ऑपरेशन हुआ। 18 नवंबर को आंख में संक्रमण नजर आया। रसीद के मुताबिक इस दौरान उन्हें दिखाई दे रहा था। हालांकि रोशनी थोड़ी कम थी। रशीद के रिकॉर्ड के मुताबिक परेशानी होने पर वे जिला अस्पताल पहुंचे। अपनी पीड़ा बताई, लेकिन डॉक्टरों ने गंभीरता नहीं दिखाई। 10 दिन तक जैसे-तैसे उनका इलाज चलता रहा। 28 नवंबर को दोपहर 3.45 बजे बड़वानी में ही सरस्वती आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर में भेज दिया, जहां डॉ. राजेंद्र मालवीय ने इलाज किया। चार दिन इलाज के बाद रशीद की हालत नहीं सुधरी तो डॉ. मालवीय ने उन्हें फिर जिला अस्पताल भेजा। तब उन्हें 3 दिसंबर को इंदौर रैफर किया, जहां रात 11.22 बजे अरबिंदो में इलाज शुरू हुआ। एेसी ही हालत नजीरन बी की भी रही। नजीरन को भी डॉक्टरों ने 3 दिसंबर को इंदौर रैफर किया।

जवाब मांगते सवाल

सवाल : संक्रमण की शुरुआत में ही सर्जरी करने वाले डॉ. आरएस पलोड़ ने मरीजों को इंदौर रैफर क्यों नहीं किया?

सवाल-: बड़वानी में ही निजी आई सेंटर पर भेजने की जल्दबाजी क्यों दिखाई?

सवाल-: संक्रमण रोकने में जरूरी इन्ट्राविट्रियल इंजेक्शन की सुविधा न होने पर भी मरीजों को 15 दिन तक क्यों रोका?

सवाल-: अस्पताल में जरूरी विक्ट्रेक्टॉमी सर्जरी सुविधा न होने पर भी मरीजों को बड़वानी में क्यों रोका?

80 फीसद मरीजों की लौट आती रोशनी

ऑपरेशन के बाद संक्रमण होने पर इसे ठीक किया जा सकता है। संक्रमण होने के दूसरे या तीसरे दिन भी मरीजों को बेहतर इलाज मुहैया हो तो 80 फीसद मामलों में संक्रमण तेजी से ठीक होता है। एेसे में 80 फीसद मरीजों की आंखों की रोशनी लौटने की संभावना होती है।
- डॉ. सुष्मिता कौशिक, एडिशनल प्रोफेसर, पीजीआई, चंडीगढ़

मरीज डॉ. पलोड़ ने भेजे थे

संक्रमण के बाद मरीजों को मेरे पास नेत्र सर्जन डॉ. आरएस पलोड़ ने भेजा था। मैंने इलाज किया। करीब 20 इंजेक्शन भी लगाए थे।
- डॉ. राजेंद्र मालवीय, सरस्वती आई हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, बड़वानी

कलेक्टर व सीएमएचओ पर कृपा क्यों?

मामले को सिर्फ ऑपरेशन करने वाले नेत्र सर्जन के ईर्द-गिर्द ही घुमाया जा रहा है। जिला अंधत्व निवारण समिति अध्यक्ष कलेक्टर और सचिव सीएमएचओ को बाहर रखा है। बड़ा सवाल है, आखिर 15 दिन तक मरीजों को वे छिपाते रहे। ऑपरेशन थिएटर, दवाइयां और ऑपरेशन में इस्तेमाल टूल्स को भी सरकार जांच में शामिल करे। कलेक्टर व सीएमएचओ पर भी कार्रवाई करे।
- एसआर आजाद, जनस्वास्थ्य अभियान, भोपाल

हां, गलती तो हुई है

संक्रमण के 48 घंटे तक मरीजों को इलाज मिलने पर उनकी रोशनी लौटने की संभावना 80 फीसद तक होती है। सरकार ने जांच कमेटी बनाई है। जांच चल रही है। कार्रवाई होगी।
- डॉ. शरद पंडित, संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य