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बीएड पर माफिया का पहरा हर काम का फिक्स रेट

शासन के लाख प्रयास के बाद भी बीएड में फर्जीवाड़ा थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रवेश प्रक्रिया व ऑनलाइन काउंसलिंग भी इस पर रोक नहीं लगा पा रही। निजी कॉलेज से आसानी से बीएड की डिग्री दिलाने का लालच देकर शिक्षा माफिया हर साल लाखों कमा रहे हैं। कॉलेज में हर चीज का रेट तय हैं। बीएड दो साल का होने के बाद भले ही प्रदेश के छात्रों का रुझान कम हुआ हो, पर अब भी भारी संख्या में अन्य राज्यों के छात्र प्रदेश के किसी निजी कॉलेज से ही बीएड करना चाह रहे हैं।

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Subhash Sharma

Mar 09, 2016

इंदौर . पैक्टिकल परीक्षा हो या क्लास बंक करना। शिक्षा माफियाओं ने हर बात के रेट तय कर रखे हैं। यदि विद्यार्थी क्लास नहीं आता है कॉलेज दस हजार रुपए तक वसूल कर प्रसेंट लगा देते हैं। पत्रिका टीम ने जब मामले की पड़ताल की तो चौंकने वाली हकीकत सामने आईं। यदि कोई विद्यार्थी कॉलेज आना भी चाहे तो उसे बहाना बनाकर टाल दिया जाता है फिर उस पर रकम चुकाने का दबाव बनाया जाता है। निजी कॉलेजों प्रेक्टिकल परीक्षा को लेकर भी रेट तय कर रखे हैं। यदि कोई छात्र अच्छे नंबर चाहता है तो उससे सात से दस हजार तक वसूल किए जाते हैं।

8 राज्यों में फैले गुर्गे
हनुमानगंज थाने में ऐसा ही एक मामला सामने आया था। जहां बंगाल के करीब नब्बे विद्यार्थियों के दल को शिक्षा माफियाओं के दो गुर्गे अग्रदीप एवं मनींद्र परीक्षा दिलाने के नाम पर लेकर आए थे। इन्हें एक होटल के कमरे में ही परीक्षा दिलाई जानी थीं। ऐसा नहीं है कि यह इस तरह का पहला मामला हो। बीएड कॉलेज के संचालक के गुर्गे बिहार, राजस्थान, गुजरात,दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब और हरियाणा तक फैले हैं। इन राज्यों में सरकार की सख्ती के कारण बीएड करना इतना आसान नहीं है। यहां अपेक्षाकृत फीस भी बहुत ज्यादा है। इसी बात का फायदा उठाकर गुर्गे विद्यार्थियों को मध्यप्रदेश के निजी कॉलेज में बिना पढ़ाई किए और कॉलेज आए बीएड कराने का लालच देकर लाखों रुपए वसूल कर लेते हैं।

पुलिस ने नहीं ली दिलचस्पी
बंगाल से आए विद्यार्थियों ने पुलिस को आवेदन लिखकर दे दिया कि वे कोई कार्रवाई नहीं चाहते। पुलिस ने भी इस मामले को पश्चिम बंगाल का बताकर दिलचस्पी नहीं ली। यदि गुर्गों को पकड़कर पूछताछ करती तो बीएड में हो रहे फर्जीवाड़े से जुड़े कई खुलासे हो सकते थे, पर पुलिस ने ऐसा कुछ नहीं किया।

पंद्रह से बीस हजार रुपए खर्च
इतना ही नहीं, यदि छात्र पंद्रह से बीस हजार रुपए खर्च करता है तो उसे प्रेक्टिकल देने आने तक जरूरत नहीं होती। कॉलेज स्टाफ उत्तर पुस्तिका में खुद ही लिखकर अंक चढ़ा देता है। एक्सजाम फीस और भवन शुल्क के नाम पर भी कॉलेज संचालक पंद्रह से बीस हजार रुपए वसूल लेते हैं। भले ही शासन ने बीएड कोर्स की दो वर्ष की फीस करीब सत्तर हजार रुपए तय कर रखी हो, लेकिन कॉलेज दबाव बनाकर करीब दो लाख रुपए वसूल लेते हैं। कई कॉलज तो पास कराने तक की गारंटी देते हैं। इसके बदले अलग से तीस से चालीस हजार शुल्क लिया जाता है।