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25 देशों के बीच इंदौर की इस सुंदरी ने जीता मिस डेफ एशिया का खिताब

ताइवान में 8 से 16 जुलाई तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी कांटेस्ट मिस डेफ एशिया 2018 का खिताब शहर की सुंदरी ने हासिल किया।

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इंदौर

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Amit Mandloi

Jul 21, 2018

deshna jain

25 देशों के बीच इंदौर की इस सुंदरी ने जीता मिस डेफ एशिया का खिताब

इंदौर. ताइवान में 8 से 16 जुलाई तक आयोजित अंतरराष्ट्रीय ब्यूटी कांटेस्ट मिस डेफ एशिया 2018 का खिताब शहर की देशना जैन ने 25 कंट्री की कंटेस्टेंट्स को पछाडक़र हासिल किया। उन्होंने मिस डेफ वल्र्ड में भी थर्ड प्लेस हासिल किया। देशना इसके पूर्व ऑल इंडिया डेफ आर्ट एंड कल्चरल सोसायटी द्वारा गत फरवरी में आयोजित मिस डेफ इंडिया 2018 का खिताब भी जीत चुकी हैं। भारत का मिस डेफ इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन में पिछले 10 वर्षों में यह अब तक का सबसे शानदार प्रदर्शन है। देशना ने ‘पत्रिका’ के साथ खास बातचीत में बताया, पहले उनका इंटरेस्ट पढ़ाई के साथ ही अदर एक्टिविटी तक ही सीमित था। लेकिन मूक बधिर संस्थान की मोनिका पंजाबी मैडम ने उनकी काबिलियत को पहचानते हुए उन्हें इस फील्ड में आने के लिए एनकरेज किया। जब उन्होंने मेरे पैरेंट्स से बात की तो वे असहज हुए लेकिन फिर उन्होंने स्वीकृति दे दी। आज मेरी इस उपलब्धि पर सबसे अधिक खुश मेरे पैरेंट्स हैं।

गुजराती परिधान पहना

देशना ने बताया, वे 8 जुलाई को ताइवान पहुंची। डिफरंट कंट्री के कंटेस्टंट्स से मिलकर उनके कल्चर बारे में कई बातें जानी। 10 दिनों तक लगातार ट्रेनिंग व ग्रूमिंग के थका देने वाले सेशन चले। तनाव कम करने के लिए हमें 12 जुलाई को ताइपे शहर घुमाने ले जाया गया। 13 जुलाई को कल्चरल राउंड हुआ, जिसमें उन्होंने गुजराती परिधान पहने। फिनाले के दिन वे काफी नर्वस थी, लेकिन टॉप 10 में जगह बनाने के बाद थोड़ी राहत की सांस ली। टॉप-५ में आने के बाद एक बार फिर क्वेश्चन-आंसर का राउंड शुरू हुआ, जिसमें हमारी मेंटल एबिलिटी देखी गई। उसके बाद जब मेरे नाम का अनाउंसमेंट हुआ तो वह मोमेंट मेरे लिए अद्भुत था।

डांस, कैट वॉक सीखा

देशना ने बताया, कॉम्पिटिशन के लिए उन्होंने कड़ी मेहनत की। डांस सीखा, कैटवॉक की लगातार प्रैक्टिस की, ब्यूटीफुल स्किन को कैसे मेंटेन करना, मेकअप आदि पर बारीकी से काम किया। कॉम्पीटिशन के लिए पूरी शॉपिंग बड़े शहरों से ही की। खानपान पर विशेष ध्यान दिया।

ये बाधाएं आड़े आई

देशना की मां दिव्या जैन ने बताया कि डे्रस डिजाइन के लिए दिल्ली के डिजाइनर को काम सौंपा था। तय हुआ कि १५ दिन बाद दिल्ली से ये डे्रस लेकर ताइपे के लिए उड़ान भरेंगे। लेकिन निकलने के ठीक १ दिन पहले जब हमने परिधान देखे तो वे बिल्कुल भी इंटरनेशनल स्टैंडर्ड के नहीं थे। उसके बाद हमने तय किया कि जो गाऊन देशना के पास पहले से था उसे ही फिनाले में पहनकर उतरेगी। इसके अलावा ताइवान में खाने को लेकर उसे कई परेशानियों का सामना करना पड़ा।

इस आंसर ने जीता जजेस का दिल

अगर आप यह खिताब जीत लेती हैं तो उसके बाद क्या करेंगी?
यहां से जीतकर जाने के बाद मैं हमारे देश की डेफ कम्यूनिटी के लिए एक उदाहरण पेश करना चाहती हूं। जो लोग अपनी लाइफ के प्रति कांफिडेंट नहीं हैं, उन्हें मेरी जीत से पॉजिटिव संदेश मिलेगा। मुझे यहां पर जो कड़ी ट्रेनिंग दी है, उसके अनुभव मैं अन्य गल्र्स के साथ शेयर करूंगी, जिससे वे अभी से इंटरनेशनल लेवल के लिए तैयार हो सकें।