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मन पर जमी विकारों की धूल हटाकर आचरण को निर्मल बनाती है भागवत

- भव्य कलशयात्रा के साथ नृसिंह वाटिका में आठ दिवसीय भागवत ज्ञानयज्ञ का शुभारंभ

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मन पर जमी विकारों की धूल हटाकर आचरण को निर्मल बनाती है भागवत

इंदौर। दर्पण में वास्तविक तस्वीर तभी नजर आएगी, जब उस पर चढ़ी धूल साफ होगी। श्रीमद भागवत हमारे मन पर चढ़े काम, क्रोध और लोभ-मोह की धूल को हटाकर आचरण को निर्मल और पवित्र बनाती है। यह भगवान श्रीकृष्ण के मुखारविंद से प्रवाहित हुआ अमृत रूपी ऐसा निर्झर है, जो युगों-युगों से मानव मात्र का कल्याण बिना किसी भेदभाव के करते आ रहा है। भागवत के प्रत्येक संदेश में जीवन को संस्कारित और वंदनीय बनाने के अनमोल मंत्र छुपे हुए हैं। भागवत का स्वाध्याय मानव से महामानव की मंजिल प्रशस्त बनाता है।
शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर स्थित ज्ञानगंगा आश्रम के स्वामी विश्वात्मानंद सरस्वती महाराज ने नृसिंह वाटिका में प्रारंभ हुए संगीतमय भागवत ज्ञानयज्ञ के शुभारंभ सत्र में उक्त विचार व्यक्त किए। इसके पूर्व सुबह बड़ा गणपति मंदिर पर पूजन के साथ भव्य कलश यात्रा का शुभारंभ हुआ। स्वामी विश्वात्मानंद ने एशिया के सबसे बड़े गणेशजी का पूजन भी किया। शोभायात्रा में बैंड-बाजे, मंगल कलश एवं गन्नाधारी सैकड़ों महिलाओं के साथ भजन एवं गरबा मंडलियां तथा कश्मीर घाटी से आए सैकड़ों साधु-संत भी शामिल थे। मार्ग में जगह-जगह स्वागत मंच लगाकर खुली बग्घी में सवार स्वामी विश्वात्मानंद एवं अन्य संतों पर पुष्प वर्षा की गई। आयोजन समिति के प्रमुख घनश्यामदास लुधियानी पूरे समय भागवत को मस्तक पर लेकर नंगे पैर चले। यात्रा में सिलीगुड़ी से आए श्याम अग्रवाल, कोलकाता की सुश्री श्रेया नागरेचा, उल्हास नगर की कोमल दीदी एवं कुमार भाई सहित देश के विभिन्न शहरों से आए भक्त भी नाचते-गाते हुए शामिल हुए। नृसिंह वाटिका में कथा शुभारंभ के पूर्व घनश्यामदास लुधियानी ने स्वामीजी को मालवा की पगड़ी पहनाई और नरेंद्र कटारिया, त्रिलोकसिंह परिहार, मनोहर गुरनानी, अशोक ओमप्रकाश खंडेलवाल आदि ने व्यासपीठ का पूजन किया। कथा प्रतिदिन दोपहर 3 से 7 बजे तक होगी।