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भोजशाला: राज्य सरकार का कोर्ट में बड़ा दावा- मंदिर को दबाव में बताया गया मस्जिद

MP News: धार भोजशाला मामले में दरगाह सोसायटी के तर्कों को महाधिवक्ता ने किया खारिज, हाई कोर्ट में रखा शासन का पक्ष। महाधिवक्ता बोले- आजादी से पहले जारी किसी भी अधिसूचना को जस की तस लागू नहीं कर सकते।

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इंदौर

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Akash Dewani

May 07, 2026

Bhojshala Dispute State Government Presents Its Side in indore high court mp news

Bhojshala Dispute State Government Presents Its Side (फोटो-Patrika.com)

Bhojshala Dispute:इंदौर हाईकोर्ट में भोजशाला को लेकर चल रही सुनवाई गुरुवार को भी जारी रही। युगलपीठ में महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने राज्य सरकार का पक्ष रखा। उनका कहना था कि कोर्ट को यह नहीं बताया कि धार रियासत ने किन परिस्थितियों में भोजशाला को मस्जिद बताया था। सुप्रीम कोर्ट भी कहता है कि संविधान की कसौटी पर जांचे बगैर किसी राज-दरबार द्वारा स्वतंत्रता के पूर्व जारी किसी अधिसूचना को जस का तस कानून के रूप में स्वीकार्य नहीं किया जा सकता। कोर्ट को ये नहीं बताया गया कि तत्कालीन ब्रिटिश सरकार के जिस परिपत्र के आधार पर धार दरबार की अधिसूचना को वैध ठहराया जा रहा है वह 1 अप्रैल 1937 के बाद जारी अधिसूचनाओं पर लागू होता है, इसके पूर्व पर नहीं। भोजशाला सर्वे में जो तथ्य और साक्ष्य मिले, वे स्पष्ट कह रहे हैं कि यह मंदिर है। (MP News)

दबाव में भोजशाला को मस्जिद बताया- महाधिवक्ता

महाधिवक्ता सिंह ने दलील दी कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के सर्वे में भोजशाला में जो मूर्तियां मिलीं वे बता रही हैं कि भोजशाला मंदिर ही है। ये मूर्तियां 10वीं से 11वीं सदी के बीच की हैं। उन्होंने काजी जकुल्ला की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शोभा मेनन द्वारा दी गई धार रियासत के गजट की दलीलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस आदेश की सच्चाई अलग है। मामले की पूरी सच्चाई यह है कि भोजशाला पहले सरस्वती मंदिर और शिक्षा का केंद्र थी। जुलाई 1935 में धार दरबार के दीवान नाटकर को एक पत्र मिला कि भोजशाला में नमाज पढऩे की अनुमति दी जाए, अनुमति दे दी गई। इसका उल्लेख नाटकर ने अपनी पुस्तक में भी किया है। शासक के दबाव में भोजशाला को मस्जिद बताया गया था।

भोजशाला को दबाव में मस्जिद बताया


महाधिवक्ता ने बताया कि तत्कालीन धार शासक के दबाव में भोजशाला को मस्जिद बताते हुए अधिसूचना जारी की गई थी। इसकी वैधता नहीं है, क्योंकि जिस परिपत्र के आधार पर इसे सही ठहराया जा रहा है, वह अधिसूचना के दो वर्ष बाद जारी हुआ था। जिससे इसकी वैधता भी संदिग्ध हो जाती है। वहीं उन्होंने धार में भोजशाला के बोर्ड हटाए जाने और उस पर की गई कार्रवाई का उल्लेख भी किया।

जैन गुरुकुल बताने वाली याचिका में तर्क पूरे


दिल्ली के सलकचंद जैन की ओर से भोजशाला को जैन गुरुकुल बताने वाली याचिका पर भी गुरुवार को सुनवाई हुई। उनकी ओर से अभिभाषक दिनेश पी राजभर ने कोर्ट से सर्वे की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की मांग की, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। गुरुवार को राजभर ने अपनी बात रखते हुए तर्क पूरे होने की बात कही। मामले में शुक्रवार को भी कोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। शुक्रवार से कोर्ट सभी के प्रति उत्तर सुनेगी। (MP News)