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मजबूरी में मान गए मोघे, हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष बने

शहर के चुने हुए जनप्रतिनिधि जरूर लालबत्ती पाने में पीछे रह गए, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने जरूर लालबत्ती हासिल कर ली। 

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Narendra Hazare

Jul 13, 2016

krishna murari moghe

krishna murari moghe

इंदौर। शहर के चुने हुए जनप्रतिनिधि जरूर लालबत्ती पाने में पीछे रह गए, लेकिन वरिष्ठ नेताओं ने जरूर लालबत्ती हासिल कर ली। मंगलवार को पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे को मप्र गृह निर्माण मंडल का अध्यक्ष बनाकर लालबत्ती से नवाजा गया। मोघे इंदौर से लालबत्ती पाने वाले पांचवें नेता हैं। मोघे की मंशा तो राज्यसभा की थी, इसके लिए काफी जोर भी लगाया, लेकिन अब संभावनाएं समाप्त होने के बाद उन्होंने समझौता कर लिया। उधर मोघे की नियुक्ति को लेकर पार्टी हलकों में चर्चा है कि मंत्रिमंडल विस्तार के समय उन्हें शहर से मंत्री बनाने की पैरवी के लिए भोपाल भेजा गया था। इसमें तो सफलता नहीं मिली, अपने लिए जरूर लालबत्ती का इंतजाम कर लिया।

दरअसल, कृष्णमुरारी मोघे भाजपा संगठन और संघ के वरिष्ठ नेताओं की श्रेणी में आते हैं। पार्टी की तीसरी पारी में आने के बाद से ही उन्हें उम्मीद थी कि प्रदेश से राज्यसभा में प्रतिनिधित्व मिल जाएगा। इसे लेकर वे इतने आश्वस्त थे कि प्रारंभ से ही निगम मंडल में नियुक्ति को लेकर इनकार करते रहे। हाल में राज्यसभा चुनावों के दौरान बदले परिदृश्य और भविष्य में संभावनाएं धूमिल होते देख आखिरकार गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष पद पर काबिज होना ही उचित समझा। राजनीतिक विश्लेषक इसे समझौता मान रहे हैं। उनकी नियुक्ति से इंदौर के राजनीतिक हलकों में एक नई चर्चा शुरू हो गई है।

संगठन ने किसी भी जनप्रतिनिधि को तो अवसर नहीं दिया, लेकिन वरिष्ठ नेताओं की मंशा और लालसा को जरूर तुष्ट किया। हालांकि इस नियुक्ति से इंदौर को राजनीतिक रूप से किसी तरह का फायद नहीं होगा, उलटे भविष्य में मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व की संभावनाएं भी कमजोर होंगी। देखा जाए तो इंदौर से वर्तमान में मोघे सहित चार नेता, बाबूसिंह रघुवंशी, देवराजसिंह परिहार और मधु वर्मा लालबत्ती के हकदार हैं। हाल में निगम मंडलों में हुई नियुक्तियों में इंदौर के कुछ नेताओं को बड़ी उम्मीद थी।

गोविंद मालू, गोपीकृष्ण नेमा, भंवरसिंह शेखावत जैसे नेता आस लगाकर बैठे थे। मालू तो अपने संबंधों के आधार पर सभी को साध रहे थे। उन्हें पूरी उम्मीद थी कि अगला नाम उन्हीं का होगा, लेकिन फिलहाल इंतजार से ही संतोष करना होगा। बताया जा रहा है कि मोघे को नियुक्त कर मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने शहर की राजनीति में सक्रिय एक गुट को फिर अलग संदेश दिया है। मामले में मोघे का कहना है, 'संगठन ने निर्णय लिया है, जल्द ही पद संभालूंगा।'

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