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भाजपा सांसद ने किया विश्व आदिवासी दिवस का विरोध बताया विदेशी एजेंडा

सांसद ने संयुक्त राष्ट्र की अवधारणा का भी दिया तर्क कहा षडयंत्रकारी विदेशी ताकतें युवाओं को भ्रमित कर रही है।

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इंदौर. विश्व आदिवासी दिवस को लेकर खरगोन-बड़वानी क्षेत्र से भाजपा सांसद और अदिवासी नेता गजेंद्र सिंह पटेल ने सवाल उठाया है। आयोजन को विदेशी एजेंडे की साजिश बताते हुए कुछ साक्ष्य भी दिए हैं। आदिवासियों को सनातन धर्मी बताते हुए कहा है कि कुछ षडयंत्रकारी ताकतें हमारी परंपराओं को धूमिल करके युवाओं को गुमराह कर रही हैं।

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सांसद ने पत्रिका से चर्चा में कहा जनजातीय समाज को कई वो सेशाष्ट्र विरोधी संगठन कुछ सहायता देकर अपने धर्म में जोड़ने का प्रयत्न कई रहे हैं। षडयंत्रकारी विदेशी ताकतें युवाओं को भ्रमित करने के लिए देश में नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनवा रही है। विभिन्न स्थानों पर कार्यक्रमों का आयोजन कर युवा शक्ति को गुमराह किया जा रहा है। इससे हमारे समाज की पारंपरिक सांस्कृतिक विरासत, रीति-रिवाज, मूल्य एवं पूर्वजों की प्रथाएं धूमिल हो रही रही हैं।

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सांसद ने बताया कि जिस प्रस्ताव को कुछ संगठन आधार बनाकर आदिवासी दिवस मना रहे हैं, उसकी हकीकत ये है कि अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के प्रस्ताव को केवल 22 देशों ने स्वीकार किया। पहली बैठक 9 अगस्त 1982 को हुई थी। इसीलिए 9 अगस्त के दिन को विश्व आदिवासी दिवस मनाने की घोषणा संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा की गई।

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एक साक्ष्य यह भी है कि संयुक्त राष्ट्र संघ को विश्व मूल निवासी दिवस 12 अक्टूबर को ही मनाना था, लेकिन इसका स्थानीय स्तर पर विरोध हुआ। उसके बाद कैथोलिक प्रचार शुरू करने की तिथि 9 अगस्त थी। इसी दिन को यादगार बनाने संयुक्त राष्ट्र संघ ने गुप्त षडयंत्र के तहत मूल निवासी दिवस मनाने का निर्णय लिया।

उधर, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने रविवार को राज्यपाल मंगुभाई पटेल से
मुलाकात की और मांग की, आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जाए। साथ ही आरोप लगाया कि सरकार कई जिलों में धारा 144 लगाकर इस दिवस को मनाने से रोकने का काम कर रही है।

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