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BJP NEWS : पुत्र मोह में उलझे कैलाश… पुराने साथी को भूले

नई कलाबाजी : मुख्यमंत्री के साथ फोटो खिंचवाने में नजर आया पुत्र मोह, आवाज देकर बुलाया- नहीं बुलाया मेंदोला को  

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BJP NEWS : पुत्र मोह में उलझे कैलाश... पुराने साथी को भूले

BJP NEWS : पुत्र मोह में उलझे कैलाश... पुराने साथी को भूले

इंदौर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदाई देने के बाद कल हवाई अड्डे पर फोटो सेशन शुरू हो गया था। मुख्यमंत्री के साथ बारी-बारी से सभी फोटो खिचवा रहे थे। कैलाश की बारी आने पर उन्होंने हमेशा की तरह आवाज लगाई, लेकिन वह हमेशा की तरह विधायक रमेश मेंदोला के लिए नहीं, बल्कि बेटे आकाश विजयवर्गीय के लिए थी। नए समीकरण देखकर सब चकित थे। घटना को विधानसभा चुनाव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

प्रवासी भारतीय सम्मेलन से लौट रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विदाई देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित सभी प्रमुख नेता एयरपोर्ट पर पहुंचे थे। मोदी का दौरा अच्छे से निपट गया, जिसको लेकर सभी खुश भी थे। उस दौरान फोटो खिंचाने की बात हुई तो चौहान ने सहजता से उसे स्वीकार कर लिया। एक-एक करके सभी नेता सिंगल-सिंगल फोटो खिंचवा रहे थे। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय फोटो खिंचाने के लिए आगे बढ़े और उन्होंने अपने बेटे को आवाज लगा दी। इशारा साफ था कि दोनों के साथ में फोटो खिंचाएंगे। मुख्यमंत्री भी समझ गए। कैलाश और आकाश एक-एक तरफ खड़े हो गए और बीच में शिवराज के साथ फोटो खिंचवाया।
ये नजारा मौके पर खड़े सभी नेता देख रहे थे, क्योंकि अब तक विजयवर्गीय हमेशा फोटो की बात आने पर विधायक रमेश मेदोला को बुलाते थे या मेंदोला साथ में रहते थे। इस बार उन्होंने मेंदोला को बुलाना तो दूर ध्यान भी नहीं दिया। इसके कई मायने भी निकाले जा रहे हैं, क्योंकि विजयवर्गीय व उनका परिवार चाहता है कि इस बार आकाश को दो नंबर विधानसभा से चुनाव लड़ाया जाए। इधर, विधायक मेंदोला टस से मस होने के मूड में नहीं हैं। कुछ का मानना है कि उसी रणनीति के तहत विजयवर्गीय अब बेटे को सभी जगह आगे कर रहे हैं।

वार्डों का भी किया दौरा
कुछ समय पहले देव से महादेव संस्था के बैनर तले विधायक आकाश विजयवर्गीय ने बड़ी ही योजना से दो नंबर विधानसभा का दौरा किया था। वे वार्ड-वार्ड जाकर बैठकें ले चुके हैं। इधर, पिछले कुछ समय से विजयवर्गीय ने विधायक मेंदोला के कट्टर समर्थकों की तरफ ध्यान देना भी बंद कर दिया। वे दूरी बनाकर चलते हैं, जबकि पूर्व में तवज्जो देने में पीछे नहीं हटते थे।