
सरकार में ठगा-सा महसूस कर रहे भाजपाई
इंदौर। नगर निगम चुनाव में भाजपा की एकतरफा जीत हुई, लेकिन कार्यकर्ता अंदर ही अंदर नाराज और कुंठित है। 15 महीने छोड़कर 18 साल से भाजपा सत्ता में है, लेकिन एक दशक से राजनीतिक नियुक्तियां नहीं हुईं। निगम चुनाव में न जाने कितनों को एल्डरमैन बनाने का लॉलीपॉप दिया गया। कई ऐसे पद हैं, जो खाली पड़े हैं। कार्यकर्ताओं को उपकृत करने की न तो सत्ता पक्ष की नीयत है न संगठन की इच्छा है।
राजनीतिक दल में कार्यकर्ता विचारधारा के लिए काम करता है, सरकार बनती है तो उसे सांसद, विधायक और पार्षदों की तरह ही सत्ता के पद की अपेक्षा होती है। इस मामले में भाजपा कार्यकर्ता ठगा महसूस कर रहा है। सच्चाई कड़वी है, क्योंकि 18 साल से प्रदेश में भाजपा सरकार है। 2003 में जब सरकार बनी थी तब जरूर इंदौर विकास प्राधिकरण के संचालक मंडल का गठन हुआ था।
महापौर परिषद में एल्डरमैन के अलावा जेल समिति, आरटीओ समिति सहित दर्जनों समितियों में कार्यकर्ताओं को उपकृत किया गया था लेकिन एक दशक से कार्यकर्ता सत्ता और संगठन की तरफ मुंह ताक रहे हैं। एक दशक पहले भाजपा नगर अध्यक्ष पद से हटाकर शंकर लालवानी को आईडीए की कमान सौंपी थी, तब उनके साथ संचालक मंडल घोषित किया गया था। बाद में जब दूसरी बार नियुक्ति हुई तब लालवानी अकेले अध्यक्ष बनकर आए। पूरा कार्यकाल निकल गया, लेकिन कोई संचालक नहीं बना। अब जयपाल सिंह चावड़ा के हाथ में आईडीए सौंपा, लेकिन संचालक मंडल नहीं बनाया गया।
पूर्व महापौर मालिनी गौड़ के पूरे कार्यकाल में एल्डरमैन की नियुक्तियां नहीं की गईं। बात यहीं तक सीमित नहीं थी, उस दौरान तो जोन अध्यक्ष तक नहीं बनाए गए थे। उनकी नियुक्ति हो जाती तो कम से कम 18 पार्षद उपकृत हो जाते, लेकिन सत्ता के सामने संगठन भी लाचार नजर आया। एक बार फिर हाल ही में नगर निगम चुनाव के दौरान बागी व नाराज कार्यकर्ताओं को मनाने के लिए उनके साथ में एल्डरमैन व आईडीए में जगह देने का आश्वासन दिया, जबकि विधानसभा चुनाव में सिर्फ सवा साल बचा है। ऐसी सैकड़ों नियुक्तियां हैं, जिनमें कार्यकर्ता खुश हो सकता है। उसे भी सत्ता में रहने का अहसास हो सकता है।
देने के नाम पर कुछ नहीं
पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश भाजपा संगठन ने लगातार आयोजन और अभियान चलाए। आगे की भी योजना बनाकर तैयार कर ली है। संगठन चाहता है कि कार्यकर्ता बताए हुए काम को ईमानदारी से करें, पूरी ताकत झोंक दें। ठीक से नहीं होने पर फटकार भी जमकर लगाई जाती है, लेकिन उपकृत करने के नाम पर धता बता दिया जाता है। संगठन ने कभी दूसरी पंक्ति के नेताओं और कार्यकर्ताओं की चिंता नहीं की कि उन्हें सत्ता के खाली पड़े पदों पर नियुत दिया जाए।
हवा हुए प्रभारी मंत्री के दावे
दो साल पहले इंदौर के प्रभारी मंत्री नरोत्तम मिश्रा जब पहली बार आए थे। उस दौरान दीनदयाल भवन में स्वागत समारोह में उन्होंने अपने जेब से एक सूची निकालकर नगर अध्यक्ष गौरव रणदिवे व जिला अध्यक्ष राजेश सोनकर को सौंपी थी। कहना था कि ये समितियों की सूची है, जिसमें कार्यकर्ताओं के नाम दिए जाएं। मैं एक माह में सारी घोषणाएं कर दूंगा, लेकिन उसके बाद दर्जनों दौरे हो गए और दो दर्जन महीने बीत गए। आज तक एक भी कार्यकर्ता को कोई पद नहीं मिला। बताते हैं कि नगर व जिला संगठन ने सूची मिश्रा को सौंप दी थी।
Published on:
05 Aug 2022 11:25 am
