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घोड़ी चढ़ निकली दुल्हन, बंदूक और तलवार लहराते पहुंची लड़के वालों के घर

लड़कों के घोड़ी चढ़ने की कहावत तो आम है लेकिन इंदौर में एक युवती घोड़ी पर चढ़कर बारात लेकर लड़के के घर पहुंची।

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Narendra Hazare

Dec 12, 2016

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इंदौर। शादी में बारातियों के समाने वर का घोड़ी पर चढ़ना और वधू को डोली में बैठा घर लाना आम रस्म है। लेकिन यही रस्म तब खास हो जाती है जब दुल्हन डोली की जगह घोड़ी चढ़े और तलवार लहराती हुई- बंदूक थामें घरातियों के साथ शहर का चक्कर लगाए।

हम यहां रेखा के मशहूर गाने 'दू्ल्हे राजा देख दुल्हनियां डोली लाई है' कि बात नहीं कर रहे हम बता कर रहे हैं फैशन डिजाइनर मनीषा की शादी की। जिसमें मनीषा, दुल्हन के जोड़े में घोड़ी पर सवार हुई। तलवार लहराई और पूरे शहर का चक्कर भी लगाया।


सुभाष नगर निवासी भूपेश शर्मा के घर शनिवार को शादी थी। लोग बारात में शामिल होने की तैयारियों में लगे थे। बैंड-बाजा तैयार थे। घोड़ी वाला भी दरवाजे पर आ चुका था। यह तैयारियां किसी लड़के के घर की नहीं बल्कि भूपेश की बेटी मनीषा की शादी की थीं। फैशन डिजाइनर की पढ़ाई कर चुकी मनीषा की शादी राहुल पंचोली पिता ओम पंचोली से शनिवार को संपन्न की गई।

शादी में खास बात यह थी कि दुल्हन की भी बारात उनके घर से उठी और दूल्हे के घर होती हुई विवाह स्थल पर पहुंची। इस दौरान सभी रिश्तेदारों ने जमकर डांस किया। बैंड-बाजों और साजो सामान के साथ पूरी शान-ओ-शौकत के साथ मनीषा अपने पति राहुल के घर पहुंची। यहां पर बारात के साथ लड़के के घरवालों ने भी डांस किया। इसके बाद मनीषा की बारात विवाह स्थल पर पहुंची जहां पर इनकी शादी की अन्य रस्में पूरी की गईं।


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बचपन का सपना हुआ साकार

मनीषा का इस तरह की बारात में निकलना बचपन का सपना था। उनके रिश्तेदार भूपेंद्र ने बताया कि मनीषा बचपन से ही चाहती थी कि उसकी भी लड़कों की तरह बारात निकाली जाए। ज्वॉइंट फैमिली में रहने वाली मनीषा का सपना उस वक्त पूरा हुआ जब पूरे परिवार सहित सभी रिश्तेदारों ने इस कदम की सराहना की।

दूल्हे ने भी दिया साथ

मनीषा की बारात निकालने की इच्छा का राहुल ने भी आदर किया। यहां तक कि राहुल के घरवालों ने भी इस फैसले को हाथों-हाथ लिया। रूढ़ीवादी परंपराओं को तोड़ते हुए मनीषा की बारात जब इंदौर की सड़कों पर निकली तो हर कोई बस देखता रह गया।

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बंनोली प्रथा में होता था ऐसा

राजस्थान में पहले के समय में बंनोली प्रथा के तहत दुल्हन इसी तरह से साज श्रंगार के साथ अपने रिश्तेदार के यहां जाती थी। उन दिनों शादी करीब 25-30 दिन की होती थी। इसलिए लड़की पक्ष के रिश्तेदार दूल्हा और दुल्हन समेत सारे रिश्तेदारों को अपने घर पर खाने के लिए आमंत्रित करते थे। इस दौरान बंनोली में दु्ल्हा और दुल्हन अपने - अपने रिश्तेदारों के साथ इसी तरह खाना खाने जाते थे।

रविवार को महिला संगीत, सोमवार को रिशेप्शन

मनीषा की शादी शनिवार को वैदिक मंत्रों और पूरे रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुई। रविवार को मनीषा के यहां महिला संगीत का आयोजन है इसके बाद सोमवार को इन दोनों का रिशेप्शन रखा गया है।

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