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अपराधियों को जमानत देकर ऐसे उलझे एफडी वाले

कमिश्नरी लागू होने से प्रकरण हो गए शिफ्ट, प्रशासन और पुलिस के फेर में सैकड़ों जमानतदारों के उलझे लाखों रुपए

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अपराधियों को जमानत देकर ऐसे उलझे एफडी वाले

अपराधियों को जमानत देकर ऐसे उलझे एफडी वाले

इंदौर। सालभर पहले प्रतिबंधित धारा में गिरफ्तार होने वालों को एफडी के माध्यम से जमानत देने वाले रिश्तेदार व परिचित अब परेशान हैं। बैंक ने एफडी को नकद करने से इनकार कर दिया। कहना है कि जमानत निरस्त कराओ। वे प्रशासन और पुलिस के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन कोई अफसर इस फेर में उलझना नहीं चाहता है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इंदौर और भोपाल में कमिश्नरी लागू करने की घोषणा कर दी थी, जिसके बाद 9 दिसंबर 2021 से कानून व्यवस्था की सारी जिम्मेदारी पुलिस के पास पहुंच गई। अब प्रशासन के पास सिर्फ रासुका ही रह गई है। इसके अलावा जिलाबदर, प्रतिबंधित धाराओं में गिरफ्तारी का फैसला करने सहित कई मामले अब सीधे पुलिस के पास आ गए हैं। प्रशासनिक संकुल में अब पुलिस विभाग से संबंधित कोई काम नहीं बचा है। सभी एसडीएम के यहां सिपाही जरूर तैनात हैं, जो छोटे-मोटे मामलों को देखते हैं।

पुलिस कमिश्नरी के फेर में जमानत देने वाले उलझ गए हैं। जी हां, ये बात बिलकुल सही है। सालभर पहले तक सभी प्रतिबंधित धाराओं में एसडीएम की अदालत में जमानत होती थी, जहां पर एफडी या संपत्ति के दस्तावेज से जमानत ली जाती थी। चूंकि 5 से 25 हजार रुपए तक की जमानत रहती थी, इसलिए पक्षकार ज्यादातर एफडी का इस्तमाल करते थे। जमानत देते ही उस पर जमानत दिए जाने की एंट्री व एसडीएम अदालत की सील व साइन हो जाती थी।

सालभर में प्रकरण भी खत्म हो गए तो कई की एफडी भी पक गई। वे अब नकद कराने बैंक पहुंच रहे हैं तो उन्हें पैसे देने से इनकार किया जा रहा है। बैंक भी अपनी जगह सही है, क्योंकि जब तक एफडी पर से जमानत निरस्त नहीं होगी, वे राशि नहीं दे सकते। इस चक्कर में पीडि़त अब प्रशासनिक संकुल जा रहे हैं, वहां पहले तो मुंशी मिलना मुश्किल। बाबुओं को इस बारे में जानकारी नहीं तो वे साफ बोल रहे हैं कि सारा रिकॉर्ड पुलिस के पास पहुंच गया है। उधर, पुलिस के पास जाने वाले व्यक्ति की पहले ही आधी जान सूख जाती है। बची वे चलता करके पूरी कर देते हैं। इस चक्कर में सैकड़ों जमानतदारों के लाखों रुपए अटके हुए हैं।

कैसे कर दें साइन, डर रहे अफसर
सालभर पहले एसडीएम ने जमानत ली थी। अब एफडी वाले जमानतदार चाहते हैं कि जमानत निरस्त हो जाए। हालांकि छह माह के लिए ही बाउंड ओवर होता है लेकिन उस बीच में सारे प्रकरण पुलिस के पास पहुंच गए। ऐसे में पकड़ाए जाने वाले शख्स ने कोई नया बवाल तो नहीं कर दिया या प्रकरण में उलझ गया, इसकी जांच कौन करेगा? इसको देखते हुए कोई भी साइन नहीं कर रहा है। इधर पुलिस का कहना है कि जमानत एसडीएम स्तर पर हुई थी, उसे निरस्त हम कैसे करें। इस फेर में एफडी वाले परेशान हो रहे हैं।