
इंदौर. हाई वे पर चूक सड़क दुर्घटना का कारण बनती है और लोगों की जान चली जाती है। वर्ष 2022 के दस महीने यानी जनवरी से अक्टूबर तक की सड़क दुर्घटनाओं का आंकलन करने से पता चलता है कि शहरी इलाके में सबसे ज्यादा दुर्घटनाओं में 44 मौतें लसूडिय़ा इलाके में हुई है, वह भी बायपास पर ज्यादा। दूसरे नंबर पर तेजाजीनगर थाना है और वहां भी बायपास का ही ब्लैक स्पॉट है।
वर्ष 2022 में सड़क दुर्घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले जिले में करीब 30 प्रतिशत ज्यादा मौतें हो चुकी है जिसे लेकर सभी गंभीर है। जनवरी से अक्टूबर तक 525 मौतें हुई है। इसमें से 302 मौतें ग्रामीण इलाके तो 223 मौतें शहरी इलाके में है। हाई वे एक्सीडेंट जोन बनकर उभरे है। पुलिस कमिश्नर कारणों की समीक्षा करवा रहे है ताकि सभी विभागों के साथ मिलकर इसे कम करने के लिए काम किया जा सके। महापौर व कलेक्टर ने ट्रैफिक सुधार को प्राथमिकताओं में शामिल किया है, इसलिए जल्द सुधार के प्रयास शुरू होने की उम्मीद है।
सबसे ज्यादा मौतें लसूडिय़ा इलाके में
दुर्घटनाओं के आंकलन से पता चलता है कि सबसे ज्यादा मौतें लसूडिय़ा थाना क्षेत्र में हुई है। दूसरे नंबर पर तेजाजीनगर और तीसरे पर थाना बाणगंगा है। सभी शहरी के बाहरी इलाके के थाने है और हाई वे से घिरे हुए है।
थाना क्षेत्र दुर्घटनाएं मौतें घायल
लसूडिय़ा 220 44 170
तेजाजीनगर 112 32 79
बाणगंगा 236 25 166
भंवरकुआं 182 15 127
कनाडिया 123 14 81
राऊ 59 13 51
एरोड्रम 131 10 104
बायपास पर अंडरपास नहीं होना दुर्घटना का कारण
तेजाजीनगर टीआइ आरडी कानवा के मुताबिक, उनके इलाके में बायपास का रालामंडल चौराहा व कैलोद फाटा चौराहा बड़ा एक्सीडेंट जोना है। यहां अंडरपास नहीं होने से छोटे वाहन सीधे बायपास पर आते है और गंभीर दुर्घटना होती है। एनएचएआइ को कई बार इसके लिए पत्र भी लिख दिया है।
रांग साइड वाहनों के कारण दुर्घटनाएं
लसूडिय़ा टीआइ संतोष दूधी के मुताबिक, उनके क्षेत्र में बायपास पर ज्यादा दुर्घटना होती है। यहां भी मुख्य कारण वाहनों का रांग साइड आना है। लोग शार्ट कट केचक्कर में रांग साइड गाड़ी लेकर आ जाते है और दुर्घटना का कारण बन जाते है।
Published on:
22 Nov 2022 05:28 pm
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