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शिवराज ने नहीं सुनी फरियाद, अब कमलनाथ से गुहार

पुष्प विहार के रहवासियों ने सीएम को भेजी पाती, मांगा मिलने का समय

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इंदौर

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Reena Sharma

Jul 12, 2019

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शिवराज ने नहीं सुनी फरियाद, अब कमलनाथ से गुहार

इंदौर. योजना-171 में फंसी हाउसिंग सोसाइटियों को लेकर पुष्प विहार कॉलोनी के सदस्य भाजपा सरकार के जनप्रतिनिधियों और पूर्व मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान से गुहार लगा-लगाकर थक गए, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। अब रहवासियों को उम्मीद बंधी है कि कमलनाथ सरकार उनकी सुनेगी। इसी आस में रहवासियों ने सीएम को पाती भेजी और उनसे मिलने का समय मांगा है।

पुष्प विहार के रहवासियों ने पिछली भाजपा सरकार में सीएम सहित नगरीय विकास एवं पर्यावरण मंत्री, कलेक्टर, आईडीए चेयरमैन, संचालकों सबके सामने अपनी पीड़ा व्यक्त की थी। उनके सामने कई-कई बार फरियाद की थी कि जवानी में प्लॉट लिए थे, बुढ़ापा आ गया मगर खुद के घर का सपना अब तक पूरा नहीं हो सका। उन्हें यह प्रस्ताव तक दे दिया कि या तो उनकी कॉलोनी को योजना से मुक्त कर दिया जाए या फिर यहां तत्काल भू-अर्जन कर आगे की प्रक्रिया कर मुआवजा दे दिया जाए।

सदस्यों ने पीड़ा रखी कि करीब 1200 सदस्यों के प्लॉट फंसे हैं। पिछली सरकार ने तो उनकी सुनवाई नहीं की। चुनाव के पहले कांग्रेस के घोषणा-पत्र ने जरूर उनकी उम्मीदें जगाईं, जिसके चलते अब रहवासियों ने सीएम कमलनाथ को पत्र भेजा है और उनसे कहा है कि घोषणा पत्र में पुरानी योजनाएं निरस्त करने का वादा किया था।

इस योजना को खत्म किया जाए, ताकि 26 साल से प्लॉट की उम्मीद लगाए सदस्यों को राहत मिले। पिछली सरकार से तो निवेदन करते-करते थक गए, लेकिन कुछ नहीं हुआ। अब इसी सरकार से उम्मीद है, इसलिए सदस्यों को मिलने का समय दें, ताकि प्रत्यक्ष उपस्थित होकर पीड़ा बता सकें।

ये है पुष्प विहार का मामला

वर्ष 1988 में कॉलोनी का रजिस्ट्रेशन हुआ और सदस्यों को प्लॉट मिले। टीएनसीपी से ले-आउट पास हुआ, आईडीए ने एनओसी दी और विकास शुल्क ले लिया। प्रशासन ने भी डायवर्सन टैक्स लिया, नगर निगम ने विकास कार्यों की जांच कर एनओसी दे दी। 1994 में आईडीए ने यहां योजना 132 लागू कर दी।

इसके चलते सदस्यों को प्लॉट नहीं मिले। पीडि़त हाईकोर्ट गए और अदालत ने 2007 में योजना निरस्त कर दी। आईडीए बाज नहीं आया और रिट पीटिशन लगा दी। हाईकोर्ट ने इसे खारिज कर दी और कहा कि जरूरी हो तो नई योजना लाई जा सकती है। आईडीए ने 2009 में 171 के नाम से नई योजना लागू कर दी गई। योजना का अंतिम प्रकाशन अप्रैल 2012 में हुआ, इसके बाद से प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी।