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बड़ा ऑफर: ई-चालान नहीं भरने वाले को पकड़ो, 500 रुपए इनाम पाओ

-ई-चालान नहीं भरने वाले वाहन पकड़ो, ₹500 तक पाओ इनाम-एक दिन में घर-घर-चालान जाकर 300 ई चालान की वसूली

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इंदौर। ई-चालान की वसूली को लेकर ट्रैफिक पुलिस सख्त हो गई है। सोमवार को आठ टीमों ने घर घर जाकर करीब 300 ई-चालान की वसूली की। जो लोग पते पर नहीं मिल रहे हैं, उन वाहनों के नंबर फील्ड में तैनात कर्मचारियों को दिए जा रहे हैं। जो कर्मचारी इन वाहनों को पकड़ेगा, उन्हें पहली बार में प्रशंसा का प्रमाण-पत्र मिलेगा। इससे अधिक वाहन पकड़ने पर 100 से 500 रुपए तक इनाम दिया जाएगा।

यह राशि पुलिसकर्मियों के बैंक खातों में जमा कराई जाएगी। पिछले तीन साल से ई-चालान की वसूली 15 प्रतिशत से आगे नहीं बढ़ पाई है। ट्रैफिक डीसीपी महेशचंद्र जैन ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को इसे बढ़ाने का लक्ष्य दिया है। करीब 5 प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जिसमें पते पर वाहन नहीं मिल रहा है। डीसीपी ने स्पष्ट किया है कि जो भी इन्हें पकड़ेगा उसे इनाम दिया जाएगा।

चालान भरो या गाड़ी दो

पुलिस ने हाल ही में ऐसी सिटी वैन को पकड़ा, जिस पर 63 ई चालान पेडिंग थे। उपनगरीय बसों में किसी पर 28 तो किसी पर 25 ई-चालान पेंडिंग थे। ऑटो रिक्शा भी जब्त किए गए। एसीपी बसंतकुमार कौल के मुताबिक, लंबित ई-चालान वाले वाहनों को जब्त कर ट्रैफिक थाने में खड़ा कराया जा रहा है। मालिक जब तक पूरी राशि जमा नहीं करेगा, गाड़ी नहीं छोड़ी जाएगी।

रेड लाइट तोड़ने की प्रवृत्ति पर लगाना है रोक

डीसीपी के मुताबिक, सिग्नल तोड़ने पर एक्सीडेंट की आशंका रहती है। इस प्रवृत्ति पर रोक लगाना है। उधर, परिवहन आयुक्त से आग्रह किया है कि जिन वाहनों के ई-चालान पेडिंग हैं, उनके नाम ट्रांसफर नहीं किए जाएं।

ई-चालान को लेकर अब तक कानून नहीं बना है, लेकिन पुलिस महकमा इसके आधार पर चालान भेजने के साथ ही वसूली भी कर रहा है। वसूली के लिए घर जाने के बाद अब चौराहे पर गाड़ियों की जब्ती करना अनुचित है। यातायात नियमों की अनदेखी पर बनने वाले चालान कोर्ट में जमा भी किए जाते हैं।

कपिल बिरथरे, सचिव, इंदौर अभिभाषक संघ

शहर की यातायात व्यवस्था को मजबूत करने के लिए पुलिस द्वारा नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाना ठीक है, लेकिन चालान की वसूली के लिए पुलिसकर्मियों को घर भेज देना और सड़कों पर गाड़ियों की जब्ती करने का फैसला अनुचित प्रतीत होता है। नियमों के पालन के लिए जनता को जागरूक करने का अधिक प्रयास किया जाना चाहिए।

महेंद्र मौर्य, एडवोकेट, जिला कोर्ट