
अर्जुन रिछारिया
इंदौर। देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टॉफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत कितने सरल और मिलनसार थे इसका उदाहरण इंदौर के डेली कॉलेज में हुए एक कार्यक्रम में देखने को मिला था। साल 2017 दिसंबर में डेली कॉलेज के एनुअल अवॉर्ड फंक्शन में मुख्य अतिथि के रूप में आए रावत का पूरा प्रोग्राम और रूट फिक्स था। रक्षा विभाग के प्रोटोकॉल के तहत उनकी सुरक्षा में लगी टीम उनके तय रूट को दिशा निर्देशित कर रही थी। तभी डेली कॉलेज के प्रिंसिपल नीरज कुमार बधौतिया ने उन्हें कहा कि बच्चों की गुजारिश है कि आप उनकी एग्जीबिशन देखने के लिए भी चलें। इसमें उन्होंने अपने हाथों से कई सुंदर कलाकृतियां बनाई हैं। यह सुनते ही रावत अपना रास्ता बदल तुरंत एग्जीबिशन की ओर मुड़ गए। यहां सभी बच्चों की पेंटिंग, क्रॉफ्ट और अन्य कलाकृतियां देखी और उनके काम को खूब सराहा।
स्कूल को दी थी पाक युद्ध में चली आरएलसी गन
बिपिन रावत ने यहां पर बच्चों को तोहफे में 2 आरएलसी गन दी थी। इन गन्स को 1965 और 1971 के युद्ध में उपयोग किया गया था। बिपिन रावत के साले यशवर्धन सुहागपुर ओल्ड डेलियन हैं। यशवर्धन की बेटी भी यहीं की स्टूडेंट है। प्रिंसिपल बधौतिया ने कहा कि उनके पूरे परिवार के लिए यह बहुत ही मुश्किल घड़ी है और हम पूरे डेली कॉलेज की तरफ से प्रार्थना करते हैं कि ईश्वर उन्हें यह दु:ख सहने की शक्ति दे।
सफलता के 3 मंत्र बता गए थे रावत
हैलीकॉप्टर हादसे में 2 बार बचे
प्रिंसिपल के साथ डिनर के दौरान बिपिन रावत ने वहां मौजूद हर्षवर्धन को बताया था कि वे दो बार हैलिकॉप्टर क्रैश में बच चुके हैं। वे कह रहे थे भगवान की कृपा रही वरना दोनों बार बचना मुश्किल था।
Published on:
09 Dec 2021 01:01 pm
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