
चंपू ने रचा था सैटेलाइट हिल्स में ऐसा चक्रव्यूह, सैकड़ों लोगों के बेच दिए थे प्लॉट
मोहित पांचाल @ इंदौर. तीन साल पहले इंदौर तो ठीक पूरे मध्यप्रदेश में बैंक के साथ ठगी का सबसे बड़ा मामला, जिसमें बेची हुई जमीन को बंधक रखकर 110 करोड़ का लोन ले लिया गया। पर्दे के पीछे भूमाफिया चंपू अजमेरा की भूमिका थी। सारा चक्रव्यूह उसने रचा था, क्योंकि सैटेलाइट हिल्स में लोगों को प्लॉट बेचने के बाद उसकी कंपनी ने जमीन उद्योगपति कैलाश गर्ग को दे दी। जनता से ठगी के साथ बैंक को चपत लगा दी गई। यूको, पंजाब नेशनल और कॉर्पोरेशन बैंक ने कैलाश गर्ग व सुरेश गर्ग की नारायण निर्यात प्रा. लि. को नायता मूंडला की 42 एकड़ जमीन बंधक रखते हुए 110 करोड़ रुपए का लोन दिया था।
किस्त चुकाने का समय आया तो इन्होंने हाथ खड़े कर दिए। बैंक ने जमीन नीलाम कर अपना पैसा वसूलना चाहा, लेकिन गुत्थी उलझ गई। सरफेसी एट में जब केस जिला प्रशासन के पास पहुंचा तो तत्कालीन अपर कलेटर सुधीर कुमार कोचर ने इनकार कर दिया। साफ कर दिया कि जमीन के प्लॉट जब पूर्व में बेचे जा चुके हैं तो वह बैंक को कजा नहीं दिला सकते हैं। पूरे कांड में बड़ी योजना से बैंक को चपत लगाई गई, जिसमें भूमाफिया चंपू अजमेरा की भूमिका संदिग्ध थी।
घोटाले की कहानी
मेसर्स अवलंच रियालिटी ने बायपास से लगे नायता मूंडला में 42 एकड़ जमीन खरीदी। कपनी में नितेश मोहन चुघ, पिंटू छाबड़ा व चंपू अजमेरा डायरेटर थे। कपनी ने मेसर्स अबिका सॉल्वेस को कॉलोनी विकास करने का काम सौंपा तो दूसरी तरफ डायरेटर चंपू को प्लॉट बेचने का पॉवर दिया गया। वर्ष 2007 में जमीन की टीएंडसीपी व डायवर्शन कराने के बाद सैटेलाइट हिल्स के नाम पर टाउनशिप लॉन्च की गई। 400 रुपए वर्ग फीट के भाव में 1500 से 5000 वर्ग फीट तक प्लॉट की बुकिंग की गई। करीब 300 लोगों ने पूरा पैसा जमा करवा दिया। इसमें से 50 लोगों की चंपू ने रजिस्ट्री की, बाकी को वह टल्ले देते रहा। इधर कॉलोनी का विकास भी रोक दिया गया। आखिर में चंपू और उसकी टीम ने 2009 में सारी जमीन कैलाश गर्ग को बेच दी। गर्ग ने 2011 में बैंक में जमीन बंधक रखकर लोन ले लिया।
चंपू व गर्ग में गहरी सांठगांठ
गौरतलब है कि चंपू और गर्ग के बीच गहरी सांठगांठ हुआ करती थी। इसके चलते चंपू ने सारी जमीन गर्ग को बिकवा दी। बाद में दिखावे के लिए दोनों एक- दूसरे के विरोधी हो गए। यहां तक कि दोनों ने एक-दूसरे के खिलाफ तेजाजी नगर थाने में आपराधिक मुकदमा भी दर्ज करवाया, जिसकी खात्मा रिपोर्ट पेश की गई। कुछ लोगों को मामले की भनक लग गई थी, जिसके चलते चंपू के खिलाफ वर्ष 2014 में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया।
आज भी भटक रहे लोग
गौरतलब है कि चंपू अजमेरा और उसकी टीम ने सैकड़ों लोगों को प्लॉट बेचकर कर उनसे पैसा वसूल कर लिया। कुछ लोगों के पास रजिस्ट्री है तो कई ऐसे भी हैं, जिनके पास एग्रीमेंट व डायरी है। एग्रीमेंट व डायरी वाले तो दूर रजिस्ट्रीवाले लोग अपने प्लॉट के लिए यहां-वहां भटक रहे हैं। विकास के नाम पर सिर्फ एक सडक़ बना रखी है।
Published on:
28 Dec 2019 11:16 am
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