
Indore News : ड्रेनेज सफाई के लिए चार भागों में बांट दिया शहर
उत्तम राठौर
इंदौर. ड्रेनेज पाइप लाइन और चेंबर चोक होने पर सफाई के लिए नगर निगम हर वर्ष करोड़ों रुपए खर्च करता है। इसके साथ ही कर्मचारियों की लंबी फौज और सफाई के लिए मशीनरी भी बड़ी संख्या में है। बावजूद इसके समस्या जस की तस है और सीएम हेल्पलाइन से लेकर इंदौर-311 मोबाइल एप पर शिकायतों का ढेर लगा रहता है। आमजन परेशान होते रहते हैं। ऐसे में निगम एक प्रयोग करने जा रहा है, जो ड्रेनेज सफाई के लिए इंदौर को चार भागों में बांटने का है। शहर के चार भाग कर चार टास्क फोर्स का गठन होगा और एक-एक में 20 कर्मचारी व 2 डिस्टेल्टींग मशीन सहित अन्य संसाधन रहेंगे। यह पूरा सिस्टम ठेके पर रहेगा। इसको लेकर मेयर-इन-कौसिंल (एमआइसी) ने संकल्प पारित कर दिया पर जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग तक नहीं पहुंचा है।
शहर की सबसे बड़ी समस्या है ड्रेनेज। इसके समाधान के लिए जेएनएनयूआरएम प्रोजेक्ट के तहत शहर में जहां बड़ी-बड़ी सीवर की प्राइमरी पाइप लाइन बिछाई गई है, वहीं पानी साफ करने के लिए कबीटखेड़ी में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) बनाया गया। करोड़ों रुपए खर्च करने के बावजूद समस्या काफी हद तक हल नहीं हुई और अब अमृत प्रोजेक्ट के तहत फिर से बिगड़े ड्रेनेज सिस्टम को सुधारने का काम किया जा रहा है। शहर के कई कॉलोनी-मोहल्लों में ड्रेनेज पाइप लाइन चोक होने और गंदा पानी रोड पर बहने या फिर लोगों के घरों में भराने की शिकायतें आए दिन निगम मुख्यालय सहित जोनल ऑफिस पर आती हैं।
सीएम हेल्पलाइन और इंदौर-311 एप पर भी शिकायतों का ढेर लगा रहता है। इनका निराकरण कई बार समय पर नहीं होता और लोगों को परेशानी होती है। ऐसे में ड्रेनेज लाइन व चेंबर सफाई के लिए शहर चार भागों में बांटने का प्रयोग किया जा रहा है। निगम 19 जोन के हिसाब से चार टास्क फोर्स बनाएगा। तीन टास्क फोर्स के पास 5-5 और एक के पास 4 जोन रहेंगे। एक टास्क फोर्स में 20 कर्मचारी व 2 डिस्टेल्टींग मशीनों सहित अन्य संसाधन होंगे। यह पूरा सिस्टम ठेके पर रहेगा। इसको लेकर एमआइसी की पिछले वर्ष 6 दिसंबर को हुई बैठक में संकल्प पारित कर दिया पर जल यंत्रालय एवं ड्रेनेज विभाग तक नहीं पहुंचा। जैसे ही संकल्प विभाग में पहुंचेगा, वैसे ही ड्रेनेज सफाई के लिए इंदौर को चार भाग में बांटकर टेंडर जारी किए जाएंगे।
650 से ज्यादा कर्मचारी
ड्रेनेज सफाई के लिए स्थायी और मस्टर मिलाकर 650 से ज्यादा कर्मचारी 19 जोन पर तैनात हैं। इसके बावजूद ड्रेनेज समस्या बनी रहती है। इस पर ड्रेनेज विभाग के कर्मचारियों से सवाल किए तो उनका जवाब था कि कई कर्मचारी बीमारी की वजह से छुट्टी पर रहते हैं। हफ्ते में दो या तीन दिन ही काम कर सकते हैं। कई कर्मचारियों को दूसरे काम में लगा रखा है। ऐसे में स्टाफ की कमी रहती है। इसे दूर करने के लिए ड्रेनेज सफाई व्यवस्था ठेके पर देने का फैसला लिया है। मालूम हो कि ड्रेनेज सफाई के लिए निगम ने रोबोट और हाइटेक मशीनें खरीद रखी हैं, ताकि चोक ड्रेनेज लाइन साफ करने के दौरान कर्मियों को मशक्कत न करना पड़े और जहरीली गैस की वजह से जान नहीं जाए। गंभीर बीमारी से भी बचे रहें।
महापौर टास्क फोर्स में कम बचे कर्मचारी
निगम में ड्रेनेज सफाई के लिए महापौर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। इसमें 60 कर्मचारी रखेंगे, जो सीएम हेल्पलाइन और इंदौर-311 एप के साथ महापौर की शिकायतों का निराकरण करते हैं। अब महापौर टास्क फोर्स में 60 के बजाय 25 कर्मचारी ही बचे हैं। इस कारण काम करने में दिक्कत हो रही है। निगम ने शहर को चार भागों में बांटकर टास्क फोर्स का गठन ठेके पर करने का फैसला लिया है, ताकि ठेकेदार एजेंसी कहीं से भी कर्मचारी की व्यवस्था कर काम कराएगा। पूरा कंट्रोल निगम का रहेगा। ड्रेनेज सफाई ठेके पर देने के बाद महापौर टास्क फोर्स के कर्मचारियों को दूसरे काम पर लगाया जाएगा।
Published on:
16 Jan 2023 11:02 am
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