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Republic Day: शहर के गणतंत्र बना रहे मजबूत

बुलंद आवाज और जज्बे से सिस्टम में शहर के लोग ला रहे बदलाव

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Kamal Singh

Jan 26, 2016

इंदौर. हर जगह फैले भ्रष्टाचार, कुरीतियां, लचर कानून व्यवस्था जैसी बुराइयों से हमारा तंत्र यानी सिस्टम बिगड़ चुका है, लेकिन शहर के कुछ गण ने इस बिगड़े तंत्र के खिलाफ बुलंद आवाज उठाई और इसे मजबूत बनाने का संकल्प लिया। वे हर बुराई को खत्म कर अच्छाई फैलाने के लिए आवाज उठा रहे हैं। इसका असर भी देखने को मिला है, क्योंकि इस आवाज से सिस्टम में कई बदलाव आए हैं। शहर के लोग कुछ ऐसा ही कर रहे हैं। ये ऐसे गण हैं जो तंत्र में बदलाव ला रहे हैं। इस प्रकार वे देश के प्रति सच्ची देशभक्ति कर रहे हैं। शहर के ऐसे ही गण से हम आपको गणतंत्र दिवस के उपलक्ष्य में रूबरू करा रहे हैं -

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भ्रष्टाचार के खिलाफ उठाई आवाज
शहर के रहने वाले महज 20 साल के दीपक बिंदोरिया ने भ्रष्टाचारियों के खिलाफ आवाज उठाकर दूसरों के लिए मिसाल कायम की। दीपक ने 2013 में कलेक्टर ऑफिस में जाति प्रमाण पत्र को लेकर चल रही रिश्वतखोरी को रोका। वे कलेक्टर में अपनी बड़ी बहन और छोटे भाई के जाति प्रमाण पत्र के लिए गए थे। कई बार चक्कर काटने के बाद वे एसडीएम कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें एक बाबू ने काम को जल्दी करने के लिए रिश्वत मांगी। दीपक ने रिश्वत देकर जल्दी काम कराने की बजाय इसकी शिकायत तुरंत लोकायुक्त में की। इससे उस बाबू को पकड़ लिया गया। वर्तमान में दीपक भ्रष्टाचार रोकने के लिए सबको प्रेरित करते हैं। वे लगातार दोस्तों और परिचितों को रिश्वतखोरी के खिलाफ आवाज उठाने के लिए कहते हैं। दीपक इंडस्ट्रियल ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट का कोर्स कर रहे हैं।

मूक बधिरों की बने आवाज

आवाज अभिव्यक्ति का माध्यम होती है। बुराई या अत्याचार के खिलाफ हम आवाज ही उठाते हैं, लेकिन आवाज ही न हो तो भला इंसाफ कैसे मिले। मूक बधिरों के लिए ये बहुत बड़ी परेशानी थी कि थाने में उनकी शिकायत ही दर्ज नहीं हो पाती थी। तंत्र की खामी को शहर के गण यानी ज्ञानेंद्र पुरोहित ने दूर करने का सार्थक प्रयास किया।

उन्होंने इंदौर में साउथ एशिया का पहला मूक बधिर थाना खुलवाया। इस थाने में अब तक 256 एफआईआर और 1 हजार से अधिक शिकायतें लिखी जा चुकी हैं। खास बात यह है कि 10 मामलों में फैसले भी सुनाएं जा चुके हैं। साथ ही उन्होंने मूक बधिरों के लिए राष्ट्रगान तैयार किया। इसे केंद्र सराकर ने स्वीकृत किया और अब पूरे देश में सभी मूक बधिर उसी रूप में राष्ट्रगान गाते हैं। हाल में ज्ञानेंद्र ने प्रधानमंत्री को साइन लैंग्वेज को संविधान की 33वीं भाषा का दर्जा दिलाने की एप्लिकेशन दी है, ताकि मूक बधिरों को मदद मिल सके।

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