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दावा: इंदौर-भोपाल में अपराध कम,   जबलपुर-ग्वालियर में भी जल्द कमिश्नर प्रणाली

गृहमंत्री बोले- विचार कर रहे, डायल-100 पर शिकायतों मेें 27 प्रतिशत की कमी  

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दावा: इंदौर-भोपाल में अपराध कम,   जबलपुर-ग्वालियर में भी जल्द कमिश्नर प्रणाली

दावा: इंदौर-भोपाल में अपराध कम,   जबलपुर-ग्वालियर में भी जल्द कमिश्नर प्रणाली

इंदौर. इंदौर और भोपाल में कमिश्नर प्रणाली लागू हुए करीब 11 महीने हो गए हैं और अब अपराधों की स्थति की समीक्षा हो रही है। इंदौर में अपराध कम होने का दावा है। डायल-100 पर करीब 27 प्रतिशत की कमी आई है। लगातार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से अपराधों की रोकथाम की बात कही जा रही है। इंदौर-भोपाल में काम की समीक्षा के साथ जबलपुर व ग्वालियर में भी कमिश्नर प्रणाली लागू करने पर सरकार विचार कर रही है। पुलिस मुख्यालय में इसकी तैयारी भी चल रही है।

सरकार ने 9 दिसंबर 2021 को इंदौर-भोपाल में कमिश्नर प्रणाली लागू की थी। भोपाल में मकरंद देउस्कर तो इंदौर मेें आइजी हरिनारायणाचारी मिश्र को कमान सौंपी। नई व्यवस्था से सरकार संतुष्ट नजर आ रही है। इंदौर-भोपाल की कमान आइजी स्तर के अफसरों के हाथ है, लेकिन जबलपुर-ग्वालियर में डीआइजी स्तर के अधिकारी को कमिश्नर बनाने पर विचार चल रहा है। प्रदेश के गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने पत्रिका से चर्चा में माना कि जबलपुर-ग्वालियर में इसे लागू करने पर विचार चल रहा है। इंदौर-भोपाल में एक साल के कार्यकाल की समीक्षा चल रही है और सरकार जल्द फैसला लेगी।

मुख्य अपराधों में आई कमी, हत्याएं बढ़ीं

पुलिस कमिश्नर मिश्र के मुताबिक, पिछले साल के मुकाबले इस साल मुख्य अपराधों में कमी आई है। संपत्ति संबंधी अपराध, चेन स्नेचिंग, लूट में कमी है। एक लाख से कम की चोरियां भी कम हुई हैं, महिला संबंधी अपराधों में भी कमी आई है। हत्या की वारदातें जरूर वर्ष 2021 की तुलना में 2022 में ज्यादा हुई हैं। जोन 1 में 8 हत्याएं हुई थीं, जो इस साल 18 हो गईं। हालांकि अधिकांश वारदात आपसी व घरेलू विवाद में हुई है। कई में भाई ने भाई की तो पति ने पत्नी की हत्या की है। समीक्षा के बाद कड़े कदम उठाए जाएंगे। ऑपरेशन मुस्कान के तहत प्रदेश में सबसे ज्यादा बच्चों को लाने में इंदौर अव्वल है।

प्रतिबंधात्मक कार्रवाई का असर

पुलिस कमिश्नर ने डायल-100 पर आने वाले शिकायतों की समीक्षा की। दावा है कि लगातार प्रतिबंधात्मक कार्रवाई से अपराध कम हुए हैं। पिछले साल 7 महीने में धारा 107-116 के 10900 केस हुए थे, जो इस साल 15104 हुए। धारा 122 के केस 51 से बढ़कर 62 हुए तो जिलाबदर के 135 केस की तुलना में इस साल 188 केस दर्ज किए हैं। डेढ़ गुना ज्यादा कार्रवाई होने से अपराधों में कमी आई है।