
बस ड्राइवर के घर १५ दिन पहले ही हुआ था बिटिया का जन्म
इंदौर. बायपास स्थित बिचौली हप्सी पुल पर शुक्रवार शाम दिल्ली पब्लिक स्कूल की बस और ट्रक के बीच हुई भिडं़त में चार बच्चों सहित पांच लोगों की मौत हो गई। अब इस घटना के बाद परिवहन विभाग कटघरे में है। आरटीओ द्वारा जारी फिटनेस सर्टिफिकेट पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि दुर्घटना होने का कारण तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा, लेकिन इस हादसे से यदि परिवहन विभाग ने सबक नहीं लिया तो फिर अन्य मासूमों को अपनी जिंदगी से हाथ धोना पड़ेगा।
केवल कागजों पर हो रही कार्रवाई
स्कूलों पर निगरानी के लिए जीपीएस सिस्टम को लागू कर दिया गया, लेकिन मॉनीटरिंग कौन करेगा, इसकी जिम्मेदारी आज तक तय नहीं हुई है। कुछ महीने पहले कलेक्टर कार्यालय में स्कूल बसों पर जीपीएस के जरिए निगरानी के लिए समिति भी बनी थी, लेकिन अभी तक कागजों पर ही काम हो रहा है। इस संबंध में कल कलेक्टर कार्यालय में बैठक भी होना थी। समिति सदस्य जिला शिक्षा अधिकारी सुधीर ङ्क्षसह कौशल ने बताया कि जीपीएस सिस्टम की निगरानी के लिए कलेक्टर कार्यालय में ही कंट्रेाल रूम बनाया जाना है, जिससे हर एक स्कूल बस की सीधी स्थिति देखी जा सकेगी। अगर बस तेज रफ्तार में है तो तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी, लेकिन कंट्रोल रूम अब तक नहीं बना है।
८ कंपनियों के स्पीड गवर्नर हों बैन
इंदौर आरटीओ में १२ से अधिक स्पीड गर्वनर लगाने वाली कंपनियां काम कर रही हैं, जिसमें से कुछ को छोड़ बाकी के सॉफ्टवेयर ऐसे हैं, जिसमें मनचाहा बदलाव किया जा सकता है। महीनों से यह कंपनियां इंदौर में काम रही हैं, लेकिन अब जाकर आरटीओ ने करीब ८ कंपनियों के स्पीड गवर्नर को प्रदेश में बैन करने के लिए मुख्यालय को पत्र भेजा है। कल जो बस दुर्घटना ग्रस्त हुई है, उसमें भी स्पीड गवर्नर लगा हुआ था, लेकिन फिर स्पीड अधिक थी।
आरटीओ कर रहे सोमवार का इंतजार
इतना दर्दनाक हादसा होने के बाद भी इंदौर आरटीओ एमपी सिंह सोमवार को स्कूल बसों में कार्रवाई करने का कह रहे हैं। सिंह ने बताया कि आज अधिकांश स्कूलों में अवकाश घोषित कर दिया गया है, इसलिए सोमवार को ही कार्रवाई की जाएगी। वहीं आज स्कूलों ड्रायवर भी नहीं मिलेंगे। जबकि परिवहन विभाग आज भी स्कूल में जाकर कार्रवाई कर सकता था, जिससे अनफिट बसों को सडक़ पर उतरने से रोका जा सकता और दूसरा हादसा टाला जा सकता है।
अधिकांश स्कूल रहे बंद
घटना के बाद कल शाम से स्कूलों ने एक दिन के बंद की घोषणा शुरू कर दी। देर रात तक पालकों को स्कूल बंद होने की सूचनाएं फोन और मैसेज के जरिए पहुंचाई गई। हालांकि इस दौरान कुछ स्कूल चोईथराम इंटरनेशल, रॉयन इंटरनेशल, प्रोगेसिव, स्कूल, तीरथबाई हायर सेंकडरी स्कूल, सराफा स्कूल आदि खुले रहे।
सडक़ पर हो रहा वाहनों का फिटनेस
प्रदेश के हाईटेक इंदौर आरटीओ कार्यालय में व्यावसायिक वाहनों के फिटनेस सर्टिफिकेट सडक़ पर बनाए जा रहे हैं। कई एकड़ में चल रहे आरटीओ कार्यालय में फिटनेस के लिए जगह ही नहंीं है। निरंजनपुर में फिटनेस को लेकर महज खानापूर्ति की जाती है। यहां आने वाले वाहनों के केवल फोटो लिए जाते हैं और पीयूसी सर्टिफिकेट देखा जाता है। नियमानुसार वाहन के टायर से लेकर हेडलाइट तक की जांच होना चाहिए। अब सवाल यह है कि डीपीएस स्कूल की बस एमपी ०९ एफए २०२९ का फिटनेस २६ दिसंबर को ही हुआ था। ऐसे में १० दिन में स्टेरिंग या अन्य तकनीकी परेशानी कैसे आ सकती है। सर्टिफिकेट के अनुसार बस पूरी तरह से फिट थी और सालभर तक फिट की रहना थी। इतना ही नहीं उक्त बस दूसरे प्रदेश की थी, जिसका रजिस्ट्रेशन कुछ साल पहले ही इंदौर में दोबारा किया गया था। बस अपनी आयु के १५ साल भी पूरी कर चुकी है। हालांकि परिवहन विभाग के नियमानुसार २० साल तक बस को स्कूल बस के तौर पर चलाया जा सकता है।
बस ड्राइवर के घर १५ दिन पहले ही हुआ था बिटिया का जन्म
हादसे में मारे गए ड्राइवर राहुल के घर 15 दिन पहले एक बेटी का जन्म हुआ है। पड़ोसियों की मानें तो अभी बच्चे ने तो पिता का ठीक से चेहरा भी नहीं देखा था और ये हादसा हो गया। राहुल के पिता की पहले ही मौत हो चुकी है, घर में उसकी मां, पत्नी और दो बच्चियां हैं। मां और वह वह दोनोंं मिलकर घर का खर्च चला रहे थे, लेकिन फैक्ट्री बंद हो जाने से मां बेरोजगार हो गई। अब पूरे घर का दारोमदार राहुल के ऊपर ही था। इस हादसे ने परिवार का न सिर्फ सहारा छीन लिया, बल्कि आगे का परिवार का भरण पोषण के लिए भी संकट पैदा कर दिया। हादसे की सूचना पर ग्रामीण बड़े अस्पताल पहुंच गए थे। देर रात तक उनके परिजन इस आस में थे कि उसे आईसीयू में रखा गया है।
मदद की बजाय सेल्फी लेने में लगे थे युवा-हादसे के बाद यहां खासी भीड़ जमा हो गई थी। इस भीड़ में कुछ ऐसे भी थे जो कि इस हृदयविदारक हादसे को देखने के बाद, मदद तो नहीं कर रहे थे, उल्टा वहां पर खड़े होकर फोटो और वीडियो बनाने में लगे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शी अशोक राठौर ने बताया कि कुछ देर तक तो ग्रामीण और आसपास के लोग यह नजारा देखते रहे, लेकिन फिर ऐसे लोगों पर उनका गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने मोबाइल छीनकर तोडक़र उन्हें वहां से भगा दिया। वहां मौजूद लोगों की मानें तो हादसे के बाद कुछ ही देर में एंबुलेंस तो पहुंच गई थी, लेकिन ब्रिज पर जाम की स्थिति बन गई थी, इसी के चलते घायलों को नीचे तक लाना पड़ा, तब जाकर उन्हें अस्पताल ले जाया जा सका।
Published on:
06 Jan 2018 07:41 pm
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