शहर से नजदीक एक गांव एेसा भी है, जहां आज भी सवर्णों और दलितों के बीच असमानता का व्यवहार देखा जा रहा है। यहां आज भी अंतिम संस्कार के लिए सवर्णों का अलग श्मशान घाट है और दलितों के लिए अलग। बताया जा रहा है कि जिस जमीन पर सवर्णों ने श्मशान बनाया है, वह उनकी निजी भूमि है इसलिए वहां कोई भी दलित को अंतिम संस्कार की इजाजत नहीं है। सवर्णों ने यहां एेसा प्रभाव बना रखा है, कोई भी दलित परिवार उनकी खींची रेखा लांघने की कोशिश भी नहीं कर सकता। सवर्णों के श्मशान तक दलित न जाएं, इसलिए उनके लिए एक अलग श्मशान बनवाया है।