
Dhar Bhojshala big update (photo: facebook)
Dhar bhojshala: भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर भी एक है। राजा भोज ने उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया था। उन्होंने यहां कई निर्माण कराए, जिनमें महाकालेश्वर मंदिर स्थित जूना महाकाल मंदिर भी शामिल है। यहां पत्थरों पर जिस लिपि में संस्कृत श्लोक, शिलालेख के रूप में मौजूद हैं, उसी तरह के शिलालेख परमार राजाओं के खरगोन में बनाए मंदिर में भी हैं और भोजशाला के शिलालेखों पर भी मिलते हैं। इससे साबित होता है कि यहां राजा भोज ने मंदिर का निर्माण कराया था।
धार भोजशाला विवाद को लेकर लगातार पांचवें दिन हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। याचिका दायर करने वाले कुलदीप तिवारी की ओर से वकील मनीष गुप्ता ने जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ के समक्ष भोजशाला के हिंदू मंदिर होने को लेकर दलीलें रखीं।
डेढ़ घंटे की बहस में उन्होंने पुराने साहित्य के साथ ही दार्शनिकों और भारत भ्रमण पर आए विदेशियों की किताबों का हवाला दिया।
5 दिन चली बहस के बाद अब भोजशाला मामले में 15 अप्रेल से दोबारा सुनवाई शुरू होगी।
गुप्ता ने अपनी दलीलों की शुरुआत करते हुए अपनी याचिका में आठ मांगें रखीं, जिनमें प्रमुख मांग है कि पुरातत्व अधिनियम के तहत यहां पर अन्य लोगों को पूजा का अधिकार खत्म किया जाए। चूंकि ये मंदिर है, इसलिए यहां हिंदुओं को पूजा का अधिकार दिया जाए।
उन्होंने आगे कहा कि, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने वर्ष 2003 में जो आदेश दिया था, वो गलत है। उसे खत्म किया जाए। उन्होंने कहा कि राजा भोज शिक्षा और शिक्षकों का सम्मान करते थे। उन्होंने कई ग्रंथों की रचना की थी, जिसमें समरांगण सूत्रधार भी है। यह ग्रंथ मुख्य रूप से वास्तुशास्त्र और शिल्पशास्त्र पर आधारित है। इसमें उन्होंने उस समय की वास्तुकला, मूर्तिकला और चित्रकला के सिद्धांतों का विवरण दिया है। उनके समय के निर्माणों में इसकी छाप भी मिलती है। भोजशाला में जो वास्तुकला और अन्य बातें मिली हैं, वो भी इसमें दिए गए वर्णन के मुताबिक हैं।
सरस्वती कंठाभरण की कथाओं में राजा भोज ने भोजशाला का महत्व बताया था, अभिभाषक गुप्ता ने कहा कि राजा भोज ने अपनी किताब में लिखा है कि राजा पर उसके मंत्री अंकुश लगाते हैं, इसी तरह यहां (भोजशाला) में मौजूद 500 पंडित उनके मद पर अंकुश लगाएंगे, इन्हें समय पर ग्रास देने के लिए शासन की ओर से सहायता दी जाएगी। इसी तरह से सरस्वती कंठाभरण जो कि भोजशाला का ही एक नाम है। उसको लेकर राजाभोज की किताब है। ये संस्कृत रचना है। इसमें भोजशाला के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
कोर्ट में मुस्लिम विद्वान और दार्शनिक इब्न बतूता की किताब रिहला का भी उल्लेख किया गया। इसमें जिक्र मिलता है कि खिलजी के मालवा जीतने के बाद मंदिर को तोड़कर उसके सामान का ही उपयोग करते हुए कमाल मौला की मस्जिद बनाई गई थी।
वर्ष 1303 में गुजरात से धार आए जैन दार्शनिक के अपनी किताब में भोजशाला के वर्णन की दलीलें भी कोर्ट में रखी गईं। वकील गुप्ता ने ललित सा के शिलालेखों का वर्णन कर उनकी यात्रा के समय यहां दी जाने वाली शिक्षा के बारे में बताया।
Updated on:
11 Apr 2026 09:45 am
Published on:
11 Apr 2026 09:26 am
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
