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जूनियर-सीनियर के संबंध मजबूत कर रही डायरी

कॉलेजों में चल रहा ट्रेंड, सीनियर्स से कॉन्टेक्ट में रहने के लिए जानकारियां नोट कर रहे जूनियर
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dheeraj sharma

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Mar 03, 2016

इंदौर.
पेन, डायरी और लैपटॉप। इसका इस्तेमाल पढ़ाई के लिए तो होता ही है, लेकिन जूनियर्स इन्हें सीनियर्स और फैकल्टी की कॉन्टेक्ट डिटेल्स, बर्थ डेट्स और उनके अनुभव लिखने में भी कर रहे हैं। शहर के कॉलेजों में डायरी सिस्टम का ट्रेंड डेवलप हो रहा है ताकि जूनियर्स और सीनियर्स के बीच बॉन्डिंग अच्छी रहे। इस बॉन्डिंग से जूनियर्स और सीनियर्स मिलकर वर्क करते हैं और हमेशा कॉन्टेक्ट में रहने की कोशिश करते हैं।


बढ़ती है बॉन्डिंग
डीएवीवी आईआईपीएस से एमबीए फाइनल ईयर कर रहे लक्ष्य सिंह शेखावत बताते हैं, कॉलेज में डायरी सिस्टम डेवलप हुआ है। इसे सीनियर्स भी अपडेट कर रहे हैं। यह सिस्टम कॉलेज में एडमिशन के बाद न्यू स्टूडेंट्स और कॉलेज पास होकर प्रोफेशनल लाइफ में जाने वाले प्रिफर कर रहे हैं। मैनें भी एक डायरी बनाई है। सीनियर्स से रेगुलर कॉन्टेक्ट में रहता हूं। फस्र्ट ईयर स्टूडेंट अमीषा गामी ने बताया, कॉलेज का एक्सपीरियंस अलग होता है। शुरुआत में कॉलेज को जानने में दिक्कत आती है। डायरी कंसेप्ट बहुत अच्छा लगा। हम सभी जूनियर्स ने भी एक डायरी बनाई है।


बड़े-बड़े काम हो जाते हैं आसान
एसजीएसआईटीएस कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग कर रही धनश्री भट्ट थर्ड ईयर में है। उन्होंने बताया, जब उनकी बैच कॉलेज में नई थी तब सीनियर्स ही उनके पहले दोस्त थे। यह दोस्ती आज तक कायम है। शुरुआत में सभी सीनियर्स से बात कर उनके कॉन्टेक्ट डिटेल्स, हॉबी और बर्थ डेट को डायरी में लिखा था। यह कंसेप्ट अब हमारे जूनियर्स भी फॉलो कर रहे हैं। धनश्री ने कहा, जूनियर्स-सीनियर्स की बॉन्डिंग से बड़े-बड़े काम आसान हो जाते हैं। उन्होंने बताया, कॉलेज में अलग-अलग क्लब्स चलते है। इसे दोनों मिलकर ही चलाते हैं। फस्र्ट ईयर मैकेनिकल स्टूडेंट समर्थ श्रीवास्तव कहते हैं, डायरी सिस्टम बेस्ट सिस्टम है। इससे सीनियर्स से आत्मीयता बढ़ी है।