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पाकिस्तानी जासूस महिला पर फिसली नीयत तो मेजर ने कैप्टन को मारी गोली, फिर खुला ये राज

शो मेकर्स और अष्टरंग इंदूर ने खेला नाटक ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, बताई सैनिकों की मर्यादा

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इंदौर

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Hussain Ali

Jul 29, 2019

indore

पाकिस्तानी जासूस महिला पर फिसली नीयत तो मेजर ने कैप्टन को मारी गोली, फिर फिर खुला ये राज

इंदौर. मध्यप्रदेश नाट््य विद्यालय भोपाल की अध्ययन अनुदान योजना के तहत शहर के युवा रंगकर्मी अंकित दास के निर्देशन में नाटक सर्जिकल स्ट्राइक का मंचन रविवार शाम प्रीतमलाल दुआ सभागृह में किया गया। नाटक को शोमेकर्स स्टूडियो और अष्टरंग इंदूर के सहयोग से मंचित किया गया।

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नाटक प्रवीण तर्डे के लिखे मराठी नाटक का हिन्दी रूपांतरण है। इसे अनिल चापेकर ने रूपांतरित किया है। नाटक की कहानी भारत-पाक सीमा पर एक चौकी की है, जहां एक मेजर और एक कैप्टन ड्यूटी पर हैं। सीमा पर उन्हें एक पाकिस्तानी जासूस महिला मिलती है, जिसे कैप्टन गिरफ्तार कर सीमा चौकी पर लाता है। उसके हाथ बंधे हुए हैं। इस बीच कैप्टन बार-बार उस महिला को भोगने की इच्छा जताता है, लेकिन मेजर उसे रोकता है। मेजर उसे भारतीय संस्कृति के बारे में बताता है, जिसमें महिलाओं का सम्मान किया जाता है, भले ही वह दुश्मन क्यों न हो। काफी देर तक कैप्टन और मेजर के बीच बहस होती है।

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कैप्टन कहता है, मैं इस महिला से जबरदस्ती करूंगा क्योंकि मैं मर्द हूं, उधर हाथ बंधी हुई महिला डर जाती है। मेजर उसे बताता है कि असली मर्दानगी मयार्दापूर्ण व्यवहार करने में है, स्त्री की रक्षा करने में है । यह बहस चल ही रही होती है कि कैप्टन महिला के साथ जोर-जबरदस्ती करने लगता है, तभी मेजर उसे रोकता है, कैप्टन नहीं रुकता तो वह कैप्टन पर गोली चला देता है।

मेजर को बता देती है दुपट्टे पर बना नक्शा

कैप्टन वहीं ढेर हो जता है और मेजर महिला के बंधे हाथ खोल देता है। महिला समझती है कि मेजर उसे चाहने लगा है और वह अपने दुपट्टे पर बना नक्शा मेजर को बता देती है। वह यह भी बता देती है कि अगले दो दिनों में पाकिस्तानी सेना सीमा पर बड़ा मूवमेंट करने वाली है। जब वह सारी जानकारी दे चुकती है तभी मरने का नाटक कर रहा कैप्टन उठ खड़ा होता है और दोनों मिलकर फिर से महिला के हाथ बांध देते हैं और उच्च अधिकारियों को पूरी जानकारी दे देते हैं। पाकिस्तानी जासूस हैरान रह जाती है कि उसे फंसाने के लिए दोनों ने यह नाटक खेला था।

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नाटक में कैप्टन बने शाकिर हुसैन, मेजर की भूमिका में खुद निर्देशक अंकित दास और जासूस के रूप में अनिष्का सेठिया का अभिनय बढि़या था। नाटक का प्रस्तुतिकरण, कलाकारों की बॉडी लैंगवेज और माहौल ठीक तरह से क्रिएट हुआ। हालांकि कहानी में इस पर यकीन कर पाना कुछ मुश्किल लगता है कि मेजर के गोली चलाते ही दूसरे ही पल पाकिस्तानी जासूस तमाम जानकारियां मेजर को दे देती है।