
विकास सिंह चौहान. कान्ह नदी की सफाई के लिए अब दुबई की एक्सपर्ट टीम ऑर्गेनिक तरीके से काम करेगी। दुबई की टीम ने खुद इसकी पहल की है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत लगभग 400 मीटर में काम होगा। इतने हिस्से को साफ करने में चार सप्ताह का अनुमानित समय लगेगा। इस पर होने वाले खर्च पर विस्तार से चर्चा नहीं हुई है। प्रोजेक्ट सफल होने के बाद इस पर बात होगी। निगम और संबंधित कंपनी इस कार्य को करने के लिए सीएसआर फंड पर भी विचार करेगी। यह प्रयोग सफल हुआ तो पूरे क्षेत्र में काम किया जाएगा। दावा है कि यह टीम ऑर्गेनिक तरीके से नदियों और तालाबों की सफाई में एक्सपर्ट है। इसी तकनीक से देहरादून में एक तालाब का जीर्णोद्धार किया जा चुका है।
मालूम हो, कान्ह शहर की सांस्कृतिक विरासत है। भूजल स्तर बनाए रखने में नदी की महत्वपूर्ण भूमिका थी, लेकिन अब नदी अस्तित्व खो चुकी है। कुछ वर्ष पहले तो इसे नाले का नाम दे दिया गया था। शहरवासी लंबे समय से कान्ह के जीर्णोद्धार की मांग कर रहे हैं। इसके नाम पर करोड़ों रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अपेक्षानुसार परिणाम नहीं मिले। शहर में बीते वर्ष एनआरआइ समिट के दौरान एनआरआइ फोरम गठित किया गया था। फोरम में शामिल दुबई की एक्सपर्ट टीम ने कान्ह नदी को साफ करने की इच्छा जाहिर की है। इस बारे में एक प्रोजेक्ट महापौर पुष्यमित्र भार्गव को भेजा गया है। भार्गव ने भी प्रोजेक्ट का अवलोकन किया है। जनवरी में टीम के इंदौर पहुंचने की संभावना है।
ऐसा होता है नदी सफाई का ऑर्गेनिक तरीका
दुबई की टीम ने कुछ समय पहले देहरादून के जिस तालाब को साफ किया है, वह नाले का रूप ले चुका था। लगभग ढाई माह में ऑर्गेनिक तरीके से सफाई के बाद तालाब मूल स्वरूप में आ चुका है। जहां पहले गाद भरी थी, वहां अब बड़ी संख्या में मछलियां हैं। टीम ने देहरादून के इस प्रोजेक्ट की जानकारी भी रिफ्रेंस के लिए इंदौर नगर निगम को दी है। जानकारी के मुताबिक, ऑर्गेनिक तरीके से नदी सफाई के लिए ऑर्गेनिक फॉर्म्यूलेशन को नदी में छोड़ा जाएगा। फॉर्म्यूलेशन से बैक्टीरिया विकसित होंगे और इससे पानी में घुलनशील ऑक्सीजन बढ़ेगी। समय के साथ नदी में जमा गाद खत्म होने लगेगी।
9 एसटीपी बनाए, लेकिन बेअसर रहे
कान्ह नदी को पुनर्जीवित करने के लिए नगर निगम ने 9 सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए हैं। इसमें छह नदी और तीन डाउन स्ट्रीम में हैं। इसका उद्देश्य था कि नदियों में ट्रीटेड वाटर मिल सके, ताकि नदी प्रदूषित न हो। कान्ह के तीन किलोमीटर के हिस्से को स्मार्ट सिटी के तहत सुधारा गया है। हालांकि ये प्रयास नाकाफी साबित हुए। शहर के करीब 20 किमी के हिस्से में कान्ह और 12 किमी हिस्से से सरस्वती नदी निकली है।
रखनी होगी ये सावधानियां
- नदी सफाई के लिए उन स्थानों का चयन करना होगा, जहां नाले मिलते हैं। उन्हें स्टार्टिंग पॉइंट पर ही ट्रीट करना पड़ेगा।
- कान्ह में मिलने वाली सहायक नदियों के कैचमेंट से अतिक्रमण हटाना पड़ेगा।
-जगह-जगह स्टॉप डैम बनाने होंगे।
- नदी में स्थान चयन कर वाटर रिचार्ज सॉफ्ट बनाए जा सकते हैं।
- आखिरी लेयर तक नदी को गहरा और पांच मीटर तक साफ करना होगा।
- नदी के आसपास बड़े पेड़ न लगाकर छोटे पौधे लगाने होंगे।
Updated on:
16 Dec 2023 10:55 am
Published on:
16 Dec 2023 10:54 am
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