देवी अहिल्याबाई होलकर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर विमानों की लैंडिंग अब सुविधाजनक और सुरक्षित हो जाएगी। खराब मौसम में भी विमान आसानी से लैंड कर पाए, इसलिए एयरपोर्ट पर अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (आईएलएस) लगाया जा रहा है। मई 2016 तक पुराना सिस्टम बदल दिया जाएगा।
200 उड़ानें प्रभावित
खराब मौसम का सबसे ज्यादा असर विमान की लैंडिंग पर होता है। ठंड में कोहरे या तेज बारिश की वजह से कई बार विमान को लैंड करवाने के बजाय आसमान में ही चक्कर लगवाए जाते हैं। विजिबिलिटी स्पष्ट होने के बाद ही लैंडिंग की अनुमति मिलती है। सालभर में इंदौर एयरपोर्ट पर 200 से ज्यादा उड़ानें खराब मौसम की वजह से प्रभावित हुई हैं। विमान की लैंडिंग में रनवे की सेंटर लाइन और ऊंचाई का सटीक आकलन जरूरी है। पायलट को एयरपोर्ट पर लगे आईएलएस की मदद से इसकी जानकारी मिलती है। इंदौर एयरपोर्ट पर लगे आईएलएस की पुरानी टेक्नोलॉजी होने से ज्यादा खराब मौसम में पायलट को लैंडिंग में दिक्कत आती थी।
आसान होगी नाइट लैंडिंग
इंदौर एयरपोर्ट पर रोजाना 22 फ्लाइट आती-जाती है। रात 8 बजे के बाद जेट एयरवेज, इंडिगो और एयर इंडिया की फ्लाइट ही आकर आधे-आधे घंटे के अंतराल में रवाना होती हैं। एविएशन एक्सपट्र्स के अनुसार कभी-कभी अच्छे मौसम में भी रात को लैंडिंग और टेक ऑफ में दिक्कत होती है। आईएलएस के कारण देर रात को भी लैंडिंग आसान हो जाएगी।
यह होता है आईएलएस
रनवे की पोजिशन और विमान की लोकेशन पता चलती है।
लैंडिंग के लिए एटीसी (एयर ट्रैफिक कंट्रोल) और पायलट के बीच तालमेल रहता है।
कोहरे और खराब मौसम में भी विमान को रनवे की सही स्थिति पता चलती है।
लैंडिंग के समय रनवे के साथ विमान के बाहर की भी पूरी जानकारी कॉकपिट में मिल जाती है।
एडवांस्ड है नया आईएलएस
एयरपोर्ट पर आईएलएस बदलने का काम शुरू हो चुका है। नया आईएलएस मौजूदा की तुलना
में एडवांस्ड है। उम्मीद है, मई 2016 तक आईएलएस लग जाएगा।
- मनोज चंसोरिया, डायरेक्टर, एयरपोर्ट