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क्राइम ब्रांच ने पकड़ा: पीएससी में असफल हुई तो फर्जी एसडीएम बन करने लगी ठगी

सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए ऐंठ चुकी

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क्राइम ब्रांच ने पकड़ा: पीएससी में असफल हुई तो फर्जी एसडीएम बन करने लगी ठगी

क्राइम ब्रांच ने पकड़ा: पीएससी में असफल हुई तो फर्जी एसडीएम बन करने लगी ठगी

इंदौर. क्राइम ब्रांच ने एक ऐसी शातिर महिला ठग को गिरफ्तार किया है, जो खुद को देपालपुर की एसडीएम बताकर लोगों को झांसा देती थी। डीसीपी निमिष अग्रवाल ने बताया, आरोपी नीलम पाराशर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपए ऐंठ चुकी है। आशंका है कि वह करीब 100 लोगों को अपना शिकार बना चुकी है।

उन्होंने बताया, गौतमपुरा के साड़ी व्यापारी ने ब्रांच में शिकायत की थी कि आरोपी ने खुद को देपालपुर की एसडीएम बताकर उनसे 70 से 75 हजार की साड़ियां खरीदी थी, लेकिन कई दिनों तक रुपए नहीं दिए। बाद में चेक दिया जो बाउंस हो गया। इस आधार पर टीम आरोपी को पूछताछ के लिए लेकर आई तब मामले का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि नीलम पीएससी की प्रतियोगी परीक्षा में असफल हो चुकी है। एसडीएम बनने का सपना टूटा तो फर्जी तरह से अधिकारी बन गई।

कार में बैठकर सेल्फी लेते फोटो आया सामने

महिला आरोपी का फोटो सामने आया है, जिसमें वह किसी कार में बैठी है। कार के पिछले कांच में मप्र शासन लिखा है। गले में मेडल पहना है जिसमें लिखा है गोल्ड मेडलिस्ट अधिकारी को 12 स्टार लगने पर सहृदय शुभकामनाएं। एक बैच में तो आरोपी महिला का फोटो लगा है। उसमें एसडीएम सागर लिखा है।

सरकारी नौकरी दिलाने के लिए 2 लाख लिए

डीसीपी निमिष अग्रवाल ने बताया, आरोपी नीलम पति अनिरूध्द पाराशर निवासी शिखरजी नगर, तेजाजी नगर के कई कारनामे सामने आए हैं। उसने कलेक्टर कार्यालय में फरियादी को गार्ड की नौकरी दिलाने का झांसा दिया और फर्जी नियुक्ति पत्र देकर 2 लाख लिए। फिर गुमराह करने लगी। बाद में गार्ड की फर्जी ड्रेस, आइडी बनाकर दी। इसके बाद भी फरियादी को न नौकरी मिली और न पैसा।

इनसे भी की धोखाधड़ी

एक अन्य पीड़ित ने खुलासा किया कि आरोपी ने खुद को एसडीएम बताकर वार्ड क्र. 75 पत्थर मुंडला में जोनल अधिकारी का पद और 45 हजार तनख्वाह दिलाने का झांसा दिया। फरियादी की पत्नी को महिला बाल विकास परियोजना में 35 हजार तनख्वाह पर सुपरवाइजर पद दिलाने का झांसा दिया। दोनों से 7.5 लाख लिए।

- महिला बाल विकास के देवगुराडिय़ा स्थित सान्निध्य कार्यालय में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर एक पीड़ित से 3.5 लाख की धोखाधड़ी की।

कलेक्टर के नाम बना दिया फर्जी लेटर

क्राइम ब्रांच ने आरोपी से फर्जी नियुक्ति पत्र बरामद किया है। इसमें कार्यालय जिला दंडाधिकारी इंदौर के नाम का आदेश है। पत्र में लिखा है योगेश मालवीय को अपर कलेक्टर अजय देव शर्मा के गार्ड के रूप में की गई है। दो माह तक वेतन 10 हजार इसके बाद 28 हजार प्रतिमाह मिलेगा। इसमें 3 हजार भत्ता कटेगा।

पकड़ाने पर कई अधिकारियों से बताने लगी पहचान

सूत्रों के मुताबिक जब आरोपी पकड़ाई तो वह पुलिस अधिकारी से लेकर कई विभाग के अधिकारी से अपनी पहचान बताने लगी। अधिकारियों ने उसे महिला थाने भेजा तो वह वहां भी असली अधिकारी बनने का नाटक करने लगी। बचने के लिए वह पुलिस अधिकारी को अपना भाई बताने लगी। हालांकि उसकी एक न चली।

किराए की कार में घूमती थी

रौब दिखाने के लिए नीलम किराए की कार में घूमती थी, जिसमें मप्र शासन लिखा है। मूलत: सागर की रहने वाली आरोपी एक साल से धोखाधड़ी कर रही है। वर्तमान में वह पति के साथ तेजाजी नगर थाना क्षेत्र में रहती है। ठगी में पति के लिप्त होने की आशंका है।

वसूलती 4 से 5 लाख

आरोपी नीलम युवा बेरोजगार को महिला बाल विकास, पीडब्ल्यूडी में इंजीनियर, बाबू, गार्ड की नौकरी दिलाने का झांसा देती। प्रत्येक नियुक्ति के लिए 4 से 5 लाख वसूलती। फर्जी नियुक्ति पत्र भी थमा देती। टीम ने बड़ी संख्या में फर्जी नियुक्ति पत्र भी बरामद किए हैं। इस केस के सामने आते ही 7 से 8 लोग शिकायत लेकर पहुंचे हैं।

फर्जी आदेश पत्र मिला

डीसीपी ने बताया, आरोपी नीलम ने देपालपुर के एक पूर्व एसडीएम के सरनेम का गलत फायदा उठाया। टीम को एक फर्जी लेटर भी मिला जो कुछ देर बाद वायरल हो गया। इसमें कार्यालय मध्यप्रदेश, गृह भवन विभाग मप्र लिखा है। पत्र पर तारीख 25 जुलाई 2022 है। इसमें नीलम को देपालपुर से राऊ में पदस्थ करने के संबंध में जानकारी है।