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भजन अब शांत नहीं लाउड हो गए हैं: विनोद अग्रवाल

भजन गायन में बहुत से गायक हैं। इनमें से कई अच्छा गा रहे हैं। इन दिनों भजन बहुत लाउड हो गए हैं।

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Narendra Hazare

Apr 23, 2016

vinod agrawal

vinod agrawal

इंदौर।
भजन गायन में बहुत से गायक हैं। इनमें से कई अच्छा गा रहे हैं। इन दिनों भजन बहुत लाउड हो गए हैं। उनमें सुरीलेपन से ज्यादा शोर भरा हुआ है। भजन गायन कम से कम वाद्ययंत्रों से होना चाहिए, पर अनावश्यक रूप से ज्यादा इंस्ट्रूमेंट इस्तेमाल किए जा रहे हैं। यह बात मशहूर भजन गायक विनोद अग्रवाल ने कही। वे शनिवार को एक कार्यक्रम में प्रस्तुति देने के सिलसिले में इंदौर में थे। पत्रिका से चर्चा करते हुए उन्हांेने कहा कि भजन गायन के जरिये लोग ईश्वर को नहीं पब्लिक को रिझाना चाहते हैं।

कव्वाली, गजल शैली से युवा करीब आए

विनोद अग्रवाल ने भजन में कव्वाली शैली का प्रयोग किया। वे गजलों के अंदाज में भी भजन गाते हैं। उनके भजनों में काफी उर्दू होती है। इस शैली के प्रयोग के बारे में उनका कहना है हरि नाम का प्रचार करना उनका लक्ष्य था और है। वे युवाओं को हरिनाम की ओर लाना चाहते थे, इसलिए उन्होनें उर्दू के शब्दों का और सूफी शैली का प्रयोग किया।

संकीर्ण लोगों ने किया विरोध

जब भजनों में उर्दू और कव्वाली शैली का प्रयोग किया तो कई संकीर्णतावादियों ने विरोध किया। कई लोगों ने कीर्तन में आना छोड़ दिया पर ऐसे लोगों की तादाद कम थी। ज्यादातर लोगों को यह प्रयोग पसंद आया। मैने हमेशा खुले मन से नई चीजें स्वीकार कीं।

पाकिस्तान से आया था बुलावा

मेरे गाने की शैली पाकिस्तान में भी लोकप्रिय हुई। वहां से कई बार बुलावे आए। एक बार तो कराची में कार्यक्रम भी तय हो गया था पर किसी आतंकी घटना की वजह से जाने का संयोग नहीं बन पाया। संगीत को बंधनों में नहीं बांधा जा सकता। जिसे जो अच्छा लगता है वह कहीं पर भी सुन सकता है।

निर्गुण भजन कम समझते हैं लोग

आम लोग निर्गुण भजनों में छुपे रहस्य को नहीं समझ पाते, इसलिए एेसे भजन मैं कम गाता हूं, क्योंकि लोग कनेक्ट नहीं हो पाते। उर्दू के भी वही शब्द लेता हूं जो आसान हैं।

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