
सवा साल की साफ-सफाई के लिए यूनिवर्सिटी ने खर्च किए 46 लाख, मांगा हिसाब
इंदौर. देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी को चकाचक करने की कोशिश अब जिम्मेदारों के गले पड़ गई है। यूनिवर्सिटी ने सवा साल की सफाई के लिए नगर निगम को लाखों रुपए का एकमुश्त भुगतान किया है। इस पर कार्यपरिषद सदस्य ने आपत्ति दर्ज कराते हुए जानकारी मांगी है। यूनिवर्सिटी अब यूजीसी के उसे स्वच्छता सर्वे को कारण बताने की कोशिश में हैं जो कभी हुआ ही नहीं।
यूनिवर्सिटी के तक्षशिला परिसर और आईईटी (इंस्टिट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी) की साफ-सफाई और कचरा उठाने के लिए नगर निगम ने बीते दिनों बिल दिया था। तक्षशिला परिसर के लिए करीब ३३ लाख और आईईटी के लिए करीब १३ लाख के बिल चुकाने के लिए एक सप्ताह से फाइल चल रही थी। रजिस्ट्रार अनिल शर्मा सहित अन्य अफसरों इतनी राशि पर हैरानी जताई थी। कुलपति प्रो. नरेंद्र धाकड़ के निर्देश पर वित्त नियंत्रक दिलिप वर्मा ने पर फाइल चलवाकर शनिवार को बिल मंजूर करा लिया। कार्यपरिषद सदस्य आलोक डावर को जब 46 लाख रुपए के भुगतान की जानकारी मिली तो उन्होंने आश्चर्य जताते हुए यूनिवर्सिटी से साफ-सफाई का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करने के लिए लिखा है। बताया जा रहा है निगम के 20 कर्मचारी सुबह 6 से दोपहर 2 बजे तक यूनिवर्सिटी की सफाई में लगते है। इसके अलावा दिन में तीन से चार बार निगम गाडिय़ों से कचरा उठवाता है। स्वच्छता सर्वेक्षण के बाद यूजीसी ने यूनिवर्सिटी व कॉलेजों को भी स्वच्छता सर्वे के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए थे। इसके बाद यूनिवर्सिटी निगम के सहयोग से सफाई करवा रहा है।
कमर्शियल रेट पर क्यों हुआ भुगतान
डावर का कहना है कि यूनिवर्सिटी सेल्फ फाइनेंस के भरोसे चल रही है। ऐसी फिजूलखर्ची होती रही तो कुछ साल में कर्मचारियों व शिक्षकों के वेतन के लाले पड़ जाएंगे। निगम ने यूनिवर्सिटी को सफाई का जो बिल दिया है उसमें कमर्शियल रेट लगाए गए हैं। जबकि शासकीय संस्थानों में रियायती दर लागू की जाना चाहिए।
Published on:
01 Apr 2019 01:00 pm
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