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मालवा-निमाड़ में आदिवासी कोटे से मंत्री के चार बड़े दावेदार

इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर संगठनात्मक स्तर पर जोड़-घटाव शुरू हो गए हैं। लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय के साथ सोशल इंजीनियरिंग भी की जाएगी। इसके चलते मालवा-निमाड़ में आदिवासी वर्ग से दो मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं प्रबल हैं, क्योंकि चार लोकसभा में समाज का वर्चस्व है।

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

इंदौर में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सरकार के मंत्रिमंडल को लेकर संगठनात्मक स्तर पर जोड़-घटाव शुरू हो गए हैं। लोकसभा चुनाव को देखते हुए क्षेत्रीय के साथ सोशल इंजीनियरिंग भी की जाएगी। इसके चलते मालवा-निमाड़ में आदिवासी वर्ग से दो मंत्री बनाए जाने की संभावनाएं प्रबल हैं, क्योंकि चार लोकसभा में समाज का वर्चस्व है।

विधानसभा चुनाव में प्रदेश की 230 में से 163 सीटों पर भाजपा जीती है। इनमें से मालवा-निमाड़ की 66 में से 48 सीटों पर पार्टी ने कब्जा जमाया। संगठन ने इसका इनाम देने में कसर नहीं रखी। डॉ. मोहन यादव को मुख्यमंत्री तो जगदीश देवड़ा को उप मुख्यमंत्री बनाया गया। सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी क्षेत्रीय, जातिगत, महिला सहित सारे समीकरणों का संतुलन बनाकर मंत्री बनाएगी।

इससे मालवा-निमाड़ से आदिवासी वर्ग से दो मंत्री बनाने के संभावना बन रही है। कारण यह है कि क्षेत्र की एक तिहाई विधानसभा आदिवासी हैं तो एक दर्जन सामान्य सीटों पर उनका खासा वोट बैंक है, जो परिणाम को प्रभावित करता है। लोकसभा चुनाव की दृष्टि से देखें तो रतलाम-झाबुआ, खरगोन-बड़वानी और धार लोकसभा तो आरक्षित है, लेकिन खंडवा सीट पर भी समाज का खासा प्रभाव है।

आदिवासी समाज को साधने के लिए भाजपा पूरी ताकत लगाएगी। पार्टी यह भी चिंता कर रही है कि असंतोष न फैले। क्षेत्रीय संतुलन बनाने के लिए इस वर्ग को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है।

चार बड़े दावेदार
22 आदिवासी सीटों में से भाजपा ने 9 पर जीत हासिल की। मंत्री पद के मजबूत दावेदारों में विजय शाह, नागरसिंह चौहान और निर्मला भूरिया हैं। शाह आठ बार के विधायक हैं और पहले भी मंत्री रहे हैं। वे खंडवा लोकसभा में खासा प्रभाव रखते हैं। नागर सिंह दो बार के विधायक हैं। रतलाम-झाबुआ लोकसभा से भूरिया भी मजबूत दावेदार हैं। भूरिया को मंत्री बनाया जाता है तो महिला कोटा भी पूरा हो सकता है। कालूसिंह ठाकुर एक मात्र आदिवासी विधायक हैं, जो धार लोकसभा से ताल्लुक रखते हैं।

इंदौर का फैसला आसान नहीं
इंदौर जिले की नौ विधानसभाओं में भाजपा के विधायक हैं। कैलाश विजयवर्गीय की वरिष्ठता को देखते हुए संभावनाएं कम नजर आ रही हैं। मजबूत दावेदारों में तुलसीराम सिलावट, उषा ठाकुर, रमेश मेंदोला हैं तो महेंद्र हार्डिया, मालिनी गौड़ और मनोज पटेल भी जुगत लगा रहे हैं। भाजपा में एक बार के विधायक को मुख्यमंत्री बनाए जाने से पहली बार के विधायक मधु वर्मा व गोलू शुक्ला को भी उम्मीदें हैं।

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