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गुरु ग्रंथ साहिब की जगह रखेंगे गीता-रामायण

गुरुद्वारा में जमा हुए 82 ग्रंथ, सिंधी समाज का बड़ा फैसला  

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गुरु ग्रंथ साहिब की जगह रखेंगे गीता-रामायण

गुरु ग्रंथ साहिब की जगह रखेंगे गीता-रामायण

इंदौर। अमृतसर की निहंग कमेटी के कड़े रुख पर सिंधी समाज ने अपने गुरुद्वारों व मंदिरों में रखे गुरु ग्रंथ साहिब को कल इमली साहिब गुरुद्वारा में जमा करवा दिया। दिनभर ये सिलसिला चला, जिसमें 82 ग्रंथ जमा हो गए। वर्षों से ग्रंथ की सेवा करने वालों की आंखों में आंसू भी थे। समाज ने अब तय किया है कि गुरु ग्रंथ साहिब की जगह गीता और रामायण रखकर पूजा की जाएगी।

इंदौर में 70 से अधिक गुरुद्वारे व सिंधी मंदिर हैं, जिनमें वर्षों से गुरु ग्रंथ साहिब की पूजा होती आ रही है। कुछ दिनों पहले अचानक अमृतसर की निहंग कमेटी सक्रिय हो गई, जिसने ग्रंथ की बेअदबी का आरोप लगाते हुए सभी को ग्रंथ गुरुद्वारे में जमा कराने के निर्देश दिए। पहले तो सिंधी समाज कुछ समझ नहीं पाया, लेकिन एक पखवाड़े पहले निहंग जत्था अन्नपूर्णा रोड के एक सिंधी मंदिर में पहुंच गया, जहां जमकर बवाल हुआ।
बात चार दिन पहले राजमहल कॉलोनी के गुरुद्वारे पर जत्थे के पहुंचने के बाद बढ़ गई। उसके बाद सिंधी समाज के मंदिर व गुरुद्वारों ने पांच सदस्यों की कमेटी बनाई, जिसने श्री गुरुसिंघ सभा के महासचिव राजा गांधी से मुलाकात की। गांधी ने साफ कर दिया कि ग्रंथ लौटाने पड़ेंगे तो जत्थे ने 12 जनवरी तक का समय दिया, लेकिन सिंधी समाज ने बड़ी संख्या में कल ही ग्रंथ जमा करा दिए। दिनभर में कल 82 ग्रंथ जमा करा दिए गए।
श्री गुरुसिंघ सभा के रिकॉर्ड अनुसार 104 ग्रंथ जमा कराए जाने हैं। अभी भी 22 आना बाकी हैं, जो संभवत: आज जमा हो जाएंगे। इधर, सिंधी समाज ने तय किया है कि अब मंदिर व गुरुद्वारों में गीता और रामायण को रखा जाएगा। हिंदू जागरण मंच के संजय भाटिया व उनकी टीम रामायण व गीता के साथ गुरु नानकदेव जी की तस्वीर भेंट करेंगे ताकि गुरु ग्रंथ साहिब के नहीं होने पर उनकी पूजा हो।

भावभीनी विदाई
गुरु ग्रंथ साहिब को लौटाने पहुंचे पुजारी व सेवादारों ने कल तक सेवा की। इमली साहिब गुरुद्वारा पहुंचने पर ग्रंथ को माथे पर रखकर प्रवेश किया। जब ग्रंथ जमा कराने की प्रक्रिया चल रही थी, तब माहौल गमगीन था। कई सेवादारों की आंखों में आंसू थे तो अधिकतर के गले भरे हुए थे। वर्षों से जिस ग्रंथ की वे पूजा कर रहे थे, आज उनसे जुदा हो रहे थे। मजबूरी में उन्हें लौटाना पड़ रहे थे। ये सिलसिला शाम तक चलता रहा।