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गीता-महान यात्रा, हम अर्जुन बनना चाहते है, लेकिन उसकी पात्रता-क्षमता तो है नहीं

गीता-विषाद से प्रसाद की ओर ले जाने वाली यात्रा, 60वें अभा गीता जयंती महोत्सव की धर्मसभा में गोवर्धननाथ मंदिर इंदौर के गोस्वामी दिव्येश कुमार ने उक्त

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इंदौर

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Amit Mandloi

Nov 28, 2017

sacred book in the world

इंदौर. जिस तरह एक मां अपने बेटे को पुष्ट करती है, उसी तरह गीता भवन भी अपने भक्त को पुष्ट करती हैं। गीता असल में विषाद से प्रसाद की ओर ले जाने वाली यात्रा है। साधारण वस्तु भी जब प्रभु के संसर्ग में आती है तो महाप्रसाद बन जाती हैं। भगवान ने कुरूक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को जो संदेश दिया, वह हम सबके लिए भी है। जीवन में हम जो भी कर्म करें, निष्ठा से करेंगे तो अवश्य आनंद प्राप्त होगा।

मंगलवार को गीता भवन में चल रहे 60वें अभा गीता जयंती महोत्सव की धर्मसभा में गोवर्धननाथ मंदिर इंदौर के गोस्वामी दिव्येश कुमार ने उक्त बातें कहीं। काशी पीठाधीश्वर स्वामी रामनरेशाचार्य महाराज ने कहा, हम सबके जीवन में भी हर दिन हर क्षण कुरूक्षेत्र जैसे हालात बनते रहते हैं। हमें भी ज्ञान देने वाला एक सारथी चाहिए। हम सब अर्जुन तो बनना चाहते हैं, लेकिन उसकी पात्रता और क्षमता नहीं समझ पाते। भगवान हर घड़ी हमारे साथ ही है। हमें उन्हें पहचानने, देखने और समझने की दृष्टि चाहिए जो गीता जैसे दर्शन और चिंतन से ही मिल सकती हैं। भगवान को सारथी बनाकर अपना जीवन जीने वाले कभी दुखी नहीं हो सकते। अज्ञान के स्वरूप को नापने का कोई पैमाना नहीं होता। ज्ञान के अभाव में ही मोह का सृजन होता है। सृष्टि में केवल परमात्मा ही सर्वज्ञ है। सुबह के सत्र में भजन-संकीर्तन के बाद नैमिषारण्य से आए स्वामी पुरुषोत्तमानंद, वृंदावन की साध्वी कृष्णानंदा, विदिशा की साध्वी सुगना बाई, उज्जैन के स्वामी असंगानंद एवं सनातन संस्कृति मंच हरिद्वार के संस्थापक स्वामी व्यासानंद महाराज ने भी अपने प्रभावी उद्बोधन में गीता, रामायण, महाभारत एवं वेद शास्त्रों के विभिन्न प्रसंगों की व्याख्या की। प्रारंभ में गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपालदास मित्तल, मंत्री राम ऐरन, सत्संग समिति के संयोजक रामविलास राठी, महेशचंद्र शास्त्री, सोमनाथ कोहली, प्रेमचंद गोयल आदि ने सभी संत-विद्वानों का स्वागत किया। दोपहर की सभा में दिल्ली के पं भीष्म पितामह मिश्र, रामकृष्ण आश्रम के स्वामी निर्विकारानंद, साध्वी परमानंदाजी, संत वीतरागानंद एवं झारखंड से आए गीता मनीषी स्वामी फलाहारी बाबा ने भी अपने प्रवचनों से जनसैलाब को सम्मोहित बनाए रखा।
गीता पर ये बोले संत

- हरिद्वार के स्वामी व्यासानंद ने कहा, यह चिंतन का विषय है कि भगवान को अर्जुन को उपदेश देने की जरूरत क्यों पड़ी और अर्जुन को कौन-सा मोह हो गया था। यदि मन सुखी नहीं है, तो देवराज इंद्र को भी सुख की अनुभूति नहीं हो सकती। भागवत के पवित्र वचनों के सेवन से व्यक्ति निरोगी हो सकता है।
- अजमेर से आई साध्वी अनादि सरस्वती ने कहा, हम जगत के सारे मनोरंजन में तो पूरे परिवार के साथ जाते हैं, लेकिन धर्मलाभ लेने अकेले ही जाते हैं। सत्संग में अकेले नहीं जाना चाहिए।

- वृंदावन की साध्वी कृष्णानंदा ने कहा, भगवान उन्हें प्रेम करते हैं, जिनका जीवन राधा, गोपियों और यशोदा जैसा होता है। एक बार यदि भगवान से प्रेम हो जाएगा तो फिर कभी उनसे अलग नहीं हो पाएंगे। भगवान से मिलना मुश्किल नहीं है। हमारे प्रेम में निष्कामता और निश्छलता होना चाहिए।
- उज्जैन के स्वामी असंगानंद ने कहा कि हम सब शाश्वत सुख चाहते हैं। हम यह भूल रहे हैं, संसार की कोई भी सुख सुविधा स्थायी नहीं होती। यहां तक कि हमारी सोच, समझ और समय भी बदलते रहते हैं। संसार को कोई भी व्यक्ति हमें सुखी नहीं कर सकता, दुखी बनाने वाले तो बहुत हैं। शाश्वत सुख केवल महापुरूषों की शरण में ही संभव है।

- नैमिषारण्य से आए स्वामी पुरुषोत्तमानंद ने कहा, भगवान ने स्वयं कहा है, मुझे जपने और भजने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है। मैं प्रत्येक मनुष्य में आत्मा के रूप में विद्यमान हूं। मुझे जहां, जब, जिस हाल में याद करोगे, मैं तुम्हारे समक्ष हूं। भगवान ने अर्जुन से भी यही कहा।


- रामकृष्ण आश्रम के स्वामी निर्विकारानंद ने कहा कि दुर्लभ मनुष्य जीवन हमें मिल तो गया है, लेकिन हमारी छोटी-बड़ी कामनाओं की पूर्ति के लिए हम भगवान से अलग होते जा रहे हैं। भगवान हमारे हैं और हम भगवान के हैं। हमें भगवान से अलग करने वाला कोई और नहीं, हमारी कामनाएं ही है।

आज के कार्यक्रम
गीता जयंती का मुख्य महोत्सव में बुधवार को सुबह 6.30 से 7.30 बजे तक मोक्षदा एकादशी के उपलक्ष्य में भगवान शालिग्राम के श्रीविग्रह पर विष्णु सहस्रनाम पाठ से सहस्रार्चन के बाद 8 से 10.15 बजे तक गीता के 18 अध्यायों का सामूहिक पाठ होगा। आरती के बाद 10.15 बजे से साध्वी अनादि सरस्वती, 10.30 बजे हरिद्वार के स्वामी व्यासानंद, 11 बजे स्वामी श्रीधराचार्य महाराज के प्रवचनों के बाद अध्यक्षीय आशीर्वचन होंगे। दोपहर में 2 से 3 बजे तक भजन-संकीर्तन के बाद 3 बजे से वृंदावन की साध्वी कृष्णानंदा, 3.30 बजे से नाथद्वारा उदयपुर के स्वामी वागधीश बाबा, 4 बजे से हरिद्वार की साध्वी प्रज्ञाभारती, 4.30 बजे से महामंडलेश्वर स्वामी प्रणवानंद सरस्वती 5 बजे से अहमदाबाद से आए महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, 5.30 बजे से झारखंड के गीता मनीषी फलाहारी बाबा के प्रवचनों के बाद 6 बजे से स्वामी रामनरेशचार्य महाराज के आशीर्वचन होंगे।