
इंदौर. पुलिस ने सोनिया शर्मा नाम की एक लड़की को पकड़ा है जिसने पुलिस महकमे के 40 से अधिक अफसरों को हुस्न के जाल में फांसकर अपने कई बड़े काम करवाए। रिमांड के दौरान युवती ने यह भी कहा है कि कई अफसरों से उसके शारीरिक संबंध हैं और अगर उसने उनके नाम बता दिए तो बवाल मच जाएगा। युवती इस बात पर भी धमका रही है कि अगर उसके साथ कुछ गलत हुआ तो वह इन सभी अफसरों के नाम सार्वजनिक कर देगी। रिमांड के दौरान यह भी पता चला है कि सोनिया ने पुलिस अफसरों से संबंधों का फायदा उठाकर कई बड़े सौदे भी करवाए।
गिफ्ट देते थे अफसर, गाड़ी और गार्ड भी दिए
पुलिस अफसर सोनिया पर इतने मेहरबान थे कि उसे मॉल में शॉपिंग करवाते थे और गिफ्ट भी देते थे। सोनिया जब जो डिमांड करती थी कोई न कोई अफसर उसे पूरी कर देता था। कई पुलिस अधिकारी तो उस पर इतने मेहरबान थे कि उसे गाड़ी और सुरक्षा गार्ड भी दे रखे थे।
इटारसी में गिरफ्तार हुई तब किन्नर थी, सर्जरी करवाकर महिला बनी
इटारसी में नकली एसडीएम बनकर घूमने के मामले में गिरफ्तार हुई तो मेडिकल करवाया था। तब रिपोर्ट में किन्नर थी सोनाली। बाद में कनवर्ट करवाकर वह शी-मेल (महिला) बन गई थी।
खुद को बताती थी होम सेकेट्री की बेटी
सोनिया विद्यानगर में किराए के फ्लैट में साथी कृष्णा के साथ रहती थी। पुलिस टीम ने वहां छानबीन की तो पता चला कि सोनिया ने 14 हजार रुपए महीना किराए पर फ्लैट लिया था। किराए का कुछ हिस्सा कृष्णा भी चुकाता था। यहां आसपास के लोगों पर रौब जमाने के लिए सोनिया ने अपना परिचय होम सेकेट्री की बेटी के रूप में दिया था।
सरकारी ड्राइवर व गनमैन होने से सभी ने उस पर विश्वास भी कर लिया था। अफसरों को शुरुआत से ही उसके ट्रांसजेंडर होने का शक था।जिला अस्पताल में मेडिकल के दौरान कमेटी का गठन नहीं होने से इस तरह की जांच नहीं हो पाई थी।
एडीजी के नाम से लगा रखी थी ड्यूटी
डीआरपी लाइन के रिकॉर्ड मे एडीजी अजय शर्मा के बहन की ड्यूटी के नाम से ड्राइवर अलॉट किए थे, जबकि एडीजी को इस बारे में कुछ पता नहीं था। उसने सरकारी ड्राइवर व गनमैन का इस्तेमाल करीब छह महीने तक किया। इस दौरान न कभी एसपी हैडक्वार्टर व न ही आरआई ने कोई सवाल जवाब किया।
हालांकि, वर्तमान आरआई का तर्क है कि पुराने समय से यह व्यवस्था चल रही थी, जिसे उन्होंने जारी रखा। गनमैन के रूप में साथ रहे एसएएफ के अवधेश यादव को भी सस्पेंड कर दिया है। पुलिस ने उसकी सेवा में लगे 5 ड्राइवरों से बयान लिए, जिसमें उनका कहना था कि उन्हें अफसरों ने ड्यूटी पर भेजा जो वे कर रहे थे।
प्रॉपर्टी कारोबार में उठाती थी फायदा
पूछताछ के बाद अफसरों ने निष्कर्ष निकाला कि वह अफसरों की रिश्तेदार बन उसका फायदा प्रॉपर्टी कारोबार में उठाती थी। कई थाना प्रभारियों को उसने रौब दिखाकर काफी फायदा उठाया। महिला थाने में भी वह काफी समय बैठी रहती थी।
चूंकि वह खुद को एडीजी शर्मा का बहन बताती थी, ऑफिसर्स मेस में रहती थी, उसकी कार सरकारी ड्राइवर चलाता और गनमैन साथ होता, इसलिए थाना प्रभारी आसानी से उसके चक्कर में आ जाते थे। जी हजूरी करने वाले थाना प्रभारी सिरे से संपर्क को नकार रहे हैं। कई लोगों ने तो जांच अधिकारियों से फोन कर आग्रह किया कि सोनिया उनके संपर्क में थी, इसकी जानकारी किसी को नहीं दी जाए।
चार माह पहले किया था आगाह
पुलिस अफसरों का मानना है कि सोनिया पहले किन्नर थी, लेकिन बाद में उसने परिवर्तन करवाया है। परिवर्तन की आशंका को डीआईजी हरिनारायणाचारी मिश्र ने भी स्वीकारा है। एएसपी रूपेश द्विवेदी ने सोनिया के फर्जीवाड़े को लेकर अपने अफसरों की करीब 4 महीने पहले ही आगाह किया था।
डीजीपी की चुप्पी
इस मामले में जब डीजीपी ऋषिकुमार शुक्ला से सवाल किया तो वे चुप्पी साधते रहे। बाद में बोले कि जिस पर बात हो रही है उसमें जांच चल रही है। उसके बाद कार्रवाई की जाएंगी।
आधार कार्ड भी फर्जी पते का
एएसपी रुपेश द्विवेदी के मुताबिक सोनिया से पूछताछ में साफ हुआ है कि उसे पुलिस अफसरों से पहचान बनाने का शौक है। उसके माता-पिता नहीं हैं, एक रिश्ते का भाई भोपाल में रहता है। उसके नाम से भोपाल में एक प्रॉपर्टी है। पढ़ाई के लिए वह कभी स्कूल नहीं गई, साथी कृष्णा से इंग्लिश सीखती थी।
उसने पुलिस को कई झूठी बातें कहीं। उसका आधार कार्ड भोपाल के जिस पते पर बना है, वह वहां रहती ही नहीं। पुलिस ने आधार कार्ड की जानकारी मांगी तो संबंधित एजेंसी ने दिल्ली संपर्क करने का कहकर पल्ला झाड़ लिया।
टीआई को फोन कर सोनिया ने दबाव बनाया था
एएसपी के मुताबिक सोनिया ने बताया, बिल्डर विजेंद्र छाबड़ा से मुंबई यात्रा के दौरान मुलाकात होने के बाद उसने खुद के एडीजी की बहन बताकर प्रभाव डाला था। विजेंद्र का तेजाजीनगर थाने में जमीन को लेकर विवाद है। सोनिया ने खुद के प्रभाव व अफसर की बहन होने का हवाला दोकर छाबड़ा को उसके जमीन का मामला उसके पक्ष में कराने की डील की थी।
लगातार वह बिल्डर से मिलने लगी थी। सोनिया यह मामला निपटने के बाद अच्छी खासी रकम लेती। यह भी पता चला कि कई जमीन कारोबारी, जिसमें जेल जा चुके विवादास्पद कॉलोनाइजर से भी सोनिया संपर्क में थी और उन्हें भी पुलिस से मदद दिलाने का झांसा दे रखा था।
इसी मामले में तेजाजीनगर टीआई को फोन कर सोनिया ने दबाव बनाया था, जिसमें पुलिस ने केस दर्ज किया है। टीआई गिरीश कवरेती के मुताबिक उनके मामले में सोनिया को गिरफ्तार किया है। विजेंद्र छाबड़ा अभी शहर से बाहर हैं, उन्हें नोटिस देकर बयान के लिए बुलाया जाएगा।
उसे लाखों रुपए मिलने वाले थे
पुलिस अफसरों की बहन बन वीआईपी सुविधा लेने वाली सोनिया शर्मा व उसके साथी कृष्णा को रिमांड अवधि खत्म होने के एक दिन पहले ही शुक्रवार को पुलिस ने कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया। पूछताछ में सोनिया ने ज्यादा सहयोग नहीं किया। इतना जरूर पता चला है कि सोनिया ने बिल्डर से उसके जमीन के मामले को पक्ष में हल कराने के लिए डील की थी, जिसके निपटने पर उसे लाखों रुपए मिलने वाले थे। यहीं नहीं, वह जेल जा चुके कॉलोनाइजरों के भी लगातार संपर्क में थी।
एएसपी रुपेश द्विवेदी व सीएसपी वंदना चौहान ने सोनिया से घंटों पूछताछ की। पहले मामले में सीएसपी ज्योति उमठ को भी शामिल किया गया था, लेकिन सोनिया से पुराने संपर्क होने की बात सामने आने पर उन्हें पूछताछ में शामिल नहीं किया गया। पुलिस ने सोनिया को 5 मई तक रिमांड पर लिया था, लेकिन पूछताछ खत्म होने के कारण शुक्रवार को ही कोर्ट में पेश कर दिया गया। यहां से दोनों को जेल भेज दिया गया है।
Published on:
05 May 2018 11:27 am
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