
शराब से सरकार की बंपर कमाई, 27 ग्रुप की नीलामी से कमाए 514 करोड़
इंदौर। अप्रैल से लागू होने वाले शराब के नए ठेकों की ऑनलाइन नीलामी कल हो गई। ६४ में से २७ ग्रुप चले गए, जबकि वर्तमान में कारोबार कर रहे सिंडिकेट ने नीलामी की प्रक्रिया में भाग नहीं लिया। इसके बावजूद आबकारी विभाग की मांग से कई अधिक कीमत पर दुकानों की नीलामी हो गई। चौंकाने वाली बात ये है कि निपानिया दुकान की कीमत ३२ करोड़ रुपए लगाई थी, जो ४४ करोड़ में गई।
कुछ दिनों पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रदेश की नई आबकारी नीति घोषित करते हुए सिंडिकेट के कारोबार पर नकेल कसने का प्रयास किया था। प्रदेश के १७ जिलों में ये कारोबार सिंडिकेट के हाथ में था, जो मनमानी कीमतों पर शराब परोस रहा था। नई नीति के हिसाब से ऑनलाइन शराब के टेंडर बुलाए गए थे, जो कल खुल गए। इसमें इंदौर में चौंकाने वाला परिणाम सामने आया। उसमें सरकारी की रणनीति सफ ल साबित हुई।
इंदौर में शराब दुकानों के ६४ ग्रुप हैं, जिनमें से २७ ग्रुप की ऑनलाइन नीलामी कल हो गई। ऐसा भी कहा जा सकता है कि शहर में अच्छा कारोबार करने वाली अधिकतर दुकानें बिक गईं, जिसमें व्यक्तिगत फर्म और कंपनियों ने जमकर हिस्सा लिया। कुछ लोग तो इस कारोबार में नए भी शामिल हुए। कुछ दुकानों की बोली उनकी सरकारी कीमत से कहीं अधिक पर गई।
विभाग को सबसे ज्यादा कीमत निपानिया की दुकान की मिली। दो दुकानों का ये ग्रुप ४४ करोड़ रुपए में गया जबकि सरकार ने उसकी कीमत ३२ करोड़ रुपए लगाई थी। इसके अलावा कनाडिय़ा का भी दो दुकानों का ग्रुप ३२ करोड़ ५० लाख रुपए में गया जिसकी सरकारी बोली २४ करोड़ रुपए थी। बड़ी बात ये है कि ये दोनों ही ठेके सूरज रजक नाम के शख्स ने लिए हैं जो नया शराब कारोबारी है। कुछ समय पहले दो नंबर विधायक रमेश मेंदोला ने कथाकार देवकीनंदन ठाकुर की कथा कराई थी जिसमें रजक ने बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया था।
इसके अलावा शराब कारोबारी रिंकू भाटिया ने राऊ, मोहन ठाकुर ने खंडवा रोड की दुकान ली। वहीं, रेवती की दुकान की सरकारी कीमत ६ करोड़ ५७ लाख थी लेकिन ठेकेदार योगेंद्र सिंह ने उसे ११ करोड़ ५२ लाख में ली। ट्रांसपोर्ट नगर की दुकान तो सवा दो गुना अधिक कीमत पर गई। सरकारी बोली ६ करोड़ ९४ लाख थी जो १५ करोड़ से अधिक में गई। इस दुकान की नीलामी में १८ ठेकेदारों ने भाग लिया था।
सिंडिकेट ने बनाई दूरी
गौरतलब है कि मौजूदा इंदौर में ठेका सिंडिकेट के पास है। पिछले दिनों दुकानों के लेनदेन को लेकर ग्रुप में विवाद हो गया था। विजय नगर स्थित कार्यालय पर ठेकेदार अर्जुन ठाकुर पर हेमू और चिंटू ठाकुर ने गोली भी चलाई थी। अर्जुन ने इन दोनों के साथ में एके सिंह व पिंटू भाटिया के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज कराया था बाद में हिस्सेदारी बढ़ाकर समझौता कर लिया। इस बार सिंडिकेट के मां कस्तूरी व महाकाल ग्रुप ने नीलामी में भाग नहीं लिया। बताते हैं कि ग्रुप के कुछ सदस्यों ने तो अलग अलग ग्रुप की नीलामी पर आपत्ति भी दर्ज कराई थी और मूहिम भी चलाई थी। इतना सबकूछ होने के बावजूद अच्छी कीमतों पर दुकानें चली गई। नीलामी के बाद सिंडिकेट में हड़कप मचा हुआ है।
ये हैं आंकड़े
- इंदौर में कुल ६४ ग्रुप हैं, जिनकी सरकारी बोली १३ अरब ४९ करोड़ ३८ लाख है।
- २७ ग्रुप की दुकानें चली गईं, जिसमें १५३ टेंडर आए थे।
- २७ दुकानों की सरकारी बोली ४ अरब ३४ करोड़ ४२ थी।
- अब ३८ ग्रुप बचे हैं, जिनकी नीलामी में किसी ने भाग नहीं लिया। इसको लेकर आबकारी विभाग जल्द नई तारीख घोषित करेंगा। चौंकाने वाली बात ये है कि नए ठेकेदारों की नीलामी में उत्साह को देखकर अब कई पुराने ठेकेदार फिर से मैदान पकडऩे के मूड में है।
Published on:
08 Feb 2022 11:44 am
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