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दिवाली के पटाखों पर जीएसटी का बम

28% जीएसटी से 35 प्रतिशत बढ़े भाव

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सुधीर पंडित @इंदौर. जीएसटी की मार से पटाखों की गूंज कमजोर रहेगी। पटाखों पर २८ प्रतिशत जीएसटी लगने से भाव लगभग ३५ प्रतिशत बढ़े हैं। वहीं कई फैक्ट्रियां बंद होने से व्यापारियों को माल भी मिलना मुश्किल हुआ है। बाजार में दीपावली को लेकर पटाखों की मांग भी कमजोर है।
दीपावली पर इस बार पटाखों पर लगाए गए जीएसटी से टैक्स दरें दोगुनी हो गई हैं। इससे पटाखा कारोबार पर भी सीधा असर हुआ है। व्यापारियों की कमर ही टूट गई है। पहले १४ प्रतिशत टैक्स होता था, जो बढक़र २८ प्रतिशत हो गया है। अन्य व्यय और खर्चे बढऩे से पटाखों के भाव में ३५ प्रतिशत का उछाल आया है।

मुख्य पटाखों के भाव

पटाखे पहले अब
फुलझड़ी 150 से 350 250 से 400
अनार 100 से 250 200 से 400
चकरी ५० से 200 100 से 250
म्यूजिकल 140 से 200 230 से 330
कचरा बम 200 से 300 400 से 700
लड़ 150 से 400 250 से 500
12 शॉट 50 से 200 100 से 400
थोक व्यापारी
स्थाई- 45
अस्थाई- 12
ग्राउंड पर दुकान लगने वाले अस्थाई व्यापारी- 400

कहां से आते हैं पटाखे
शिवाकाशी- सभी तरह के पटाखें
राजस्थान-फुलझड़ी
रोहतक- मिट्टी के अनार

पिछले साल पटाखों पर टैक्स १४ प्रतिशत था जो जीएसटी में २८ प्रतिशत हो गया। इसका सीधा असर पटाखा व्यवसाय पर पड़ेगा। कुल ३५ प्रतिशत भाव बढ़ जाएंगे।
शंकर बालचंदानी, सचिव, पटाखा व्यापारी एसोसिएशन

जीएसटी लगने से छोटी कंपनियां बंद हो गई हैं। पहले से ही भाव मेंं बढ़ोतरी हुई है। टैक्स अलग से ज्यादा हो गया है। पहले से ही व्यापार नहीं है। स्टॉक नहीं कर पा रहे हैं। जैसे-जैसे माल आ रहा है बेच रहे हैं।
ललित परियानी, व्यापारी

जीएसटी के कारण दीपावली पर उठाव कम रहने की आशंका है। टैक्स बढऩे और सख्ती से कई फैक्ट्रियां बंद हो गई हैं। कम मार्जिन पर व्यवसाय कर रहे हैं।
किशोर भीमवानी, व्यवसायी

पहले से पटाखा व्यापार कम है। इस पर पटाखा पर टैक्स बढऩे से परिवार कम ही खरीदारी करते हैं। जीएसटी से व्यापार पूरी तरह चौपट हो गया है। शासन से जमीन नहीं मिलने से अस्थाई दुकानों का खर्च भी बढ़ गया है।
मुकेश बालचंदानी, व्यापारी