
इंदौर .दिसंबर 2014 में विजय नगर आरटीओ में सामने आए हैवी ड्राइविंग लाइसेंस फर्जीवाड़े को लेकर अब तक जांच पूरी नहीं हो पाई है। मामले में दो बाबुओं को नोटिस देने और एक का तबादला करके अफसर चुप बैठ गए, जबकि ये मामला इतना गंभीर है कि आला अफसरों ने भी इसमें दोषियों को सस्पेंड करने और एफआईआर दर्ज करवाने की बात कही थी। अब तक जांच रिपोर्ट के ही पते नहीं हैं। अब तक की जांच में करीब 35 लाइसेंस संदिग्ध मिले हैं। इसके बाद विभाग ने जांच में तेजी दिखाते हुए पुराने रिकॉर्ड को जांचना शुरू कर दिया। मार्च 2015 तक तो मामले ने खूब जोर पकड़ा, लेकिन समय बीतने के साथ धीरे-धीरे मामला ठंडा पड़ता गया। अब जांच कर रहे अफसरों के रवैये से लग रहा है कि पूरी धांधली पर लीपापोती करने का खेल चल रहा है।
एसा था फर्जीवाड़ा
आरटीओ एमपी सिंह ने एआरटीओ अर्चना मिश्रा को हैवी लाइसेंस पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। मिश्रा ने दिसंबर 2014 में ही ऐसे 4 लाइसेंस संदेह होने पर रोके थे। हैवी लाइसेंस के लिए पहले दो और चार पहिया वाहन का कम से कम एक साल पुराना लाइसेंस होना जरूरी होता है। हैवी लाइसेंस में जो लाइसेंस कार्ड लगाए थे वे कुछ दिन पूर्व ही डुप्लीकेट या रिन्यू के नाम पर निकाले गए थे। ये विभाग के रिकॉर्ड में थे ही नहीं।
इसमें बिना पूर्व लाइसेंस के 4 लोगों का फर्जी तरीके से सीधे हैवी व्हीकल्स का लाइसेंस जारी कर दिया। इसमें एजेंट, स्मार्ट चिप कंपनी के कर्मचारियों के साथ बाबुओं की मिलीभगत सामने आई है। इसके बाद कंपनी के एक कर्मचारी को निकाल दिया है। वहीं लाइसेंस बनवाने वाले चारों लोगों के लाइसेंस को निरस्त करते हुए उन्हें नोटिस भी जारी किया है। आरटीओ ने तीन माह में बने हैवी लाइसेंस की जांच के आदेश दिए थे।
दो बाबुओं का तबादला
लाइसेंस फर्जीवाड़े के बाद खुद आरटीओ एमपी सिंह भी संबंधित बाबुओं और स्मार्ट चिप कंपनी के आपॅरेटरों से पूछताछ कर चुके हैं। इनमें कुछ बाबुओं की भूमिका के साथ फाइलों को भी जांचा गया था, जिसमें बाबुओं व एजेंट भी घेरे में आए थे। इनमें बाबू दिलीप मोदिया और संतोष अहीर को नोटिस दिया था। वहीं संतोष अहीर का तबादला विजय नगर आरटीओ की लाइसेंस शाखा से केसरबाग आरटीओ की हेल्प डेस्क पर किया गया था।
जांच में पता चला था कि स्मार्ट चिप कंपनी के ऑपरेटर ने ये लाइसेंस जारी किए थे। आवेदकों के पुराने रिकॉर्ड को वेरिफाई करने की जिम्मेदारी उसकी थी, लेकिन उसने प्रक्रिया का पालन नहीं किया। आरटीओ के निर्देश पर कंपनी ने उसे तुरंत निकाल दिया है। नोटिस देते हुए स्पष्टीकरण भी मांगा है। इसके अलावा करीब 10 से ज्यादा एजेंटों के साथ ही आरटीओ में पदस्थ बाबूओं की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा था। मामले में दोषी एजेंटों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर भी होना थी, लेकिन पूरा मामला ही ठंडे बस्ते में डाल दिया।
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