
हाई कोर्ट ने डीएवीवी से पूछा - हजारों विद्यार्थियों के परीक्षा देने के बाद क्यों रद्द की सीईटी?
इंदौर. देवी अहिल्या विश्वविद्यालय की कॉमन इंट्रेंस टेस्ट (सीईटी) रद्द करने के खिलाफ हाई कोर्ट में दायर याचिका पर बुधवार को सुनवाई हुई। जस्टिस एससी शर्मा और जस्टिस शैलेंद्र शुक्ला की युगल पीठ ने यूनिवर्सिटी से पूछा कि हजारों विद्यार्थियों द्वारा परीक्षा देने के बाद उसे क्यों रद्द किया? हालांकि कोर्ट ने विवि की एडमिशन प्रक्रिया पर किसी तरह की रोक लगाने से इंकार कर दिया है।
यूनिवर्सिटी की ओर से जवाब पेश किया गया कि सीईटी के आयोजन में अनियमिताएं सामने आने के बाद उसे रद्द किया है। मप्र विश्वविद्यालय अधिनियम की धारा 7 और 14 के तहत हमें सीईटी के अलावा दूसरे तरीके से भी एडमिशन करने का अधिकार है और उसी के तहत हम मेरिट के आधार पर विद्यार्थियों को एडमिशन दे रहे हैं।
याचिका दायर होने से पहले ही विवि की ओर से हाई कोर्ट में केविएट दायर की थी, इसलिए बिना नोटिस के ही बुधवार को सुनवाई के दौरान विवि की ओर से जवाब पेश कर दिया गया। करीब 15 पेज के जवाब में यूनिवर्सिटी ने मेरिट के आधार पर एडमिशन देने की व्यवस्था का बचाव किया है।
याचिकाकर्ता आदित्य गिलके के वकील अभिषेक गिलके ने कहा, यूनिवर्सिटी ने अपने जवाब में एक भी जगह यह जानकारी नहीं दी कि सीईटी की अनियमितता के चलते कितने विद्यार्थी परीक्षा देने से चूके। कोर्ट ने 2 अगस्त को याचिका पर अगली सुनवाई के आदेश दिए हैंं।
याचिका में मांग की गई है कि जिन विद्यार्थियों की परीक्षा में कोई समस्या नहीं आई उनके परिणाण घोषित करें और जो परीक्षा नहीं दे सके हैं, उनकी फिर परीक्षा ली जाए।
एडवोकेट गिलके ने बताया, हमने याचिका में बिंदु जोड़ा है कि करीब 17600 विद्यार्थियों के सीईटी में शामिल होना था। इन सभी से 1500 रुपए परीक्षा शुल्क भी वसूला गया है। 23 जून को हुई सीईटी में करीब 1300 विद्यार्थी परीक्षा नहीं दे सके थे, जबकि बाकी परीक्षा हुई थी। अब सिर्फ 1300 विद्यार्थियों के लिए 16300 को परेशान करना अनुचित हैं। हालंकि राज्य सरकार ने सभी विद्यार्थियों की फीस वापस लौटाने का निर्णय लिया है और पिछली कक्षाओं की मेरिट के आधार पर एडमिशन प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
इधर, कुलपति का यू टर्न-पूरी फीस नहीं लौटाएगी यूनिवर्सिटी,खर्च के आधार पर तय होगी राशि
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के सीईटी को रद्द करने के बाद शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने 17600 विद्यार्थियों की परीक्षा फीस लौटाने के आदेश दिए हैं। विवि ने शुल्क के रूप में 1500 रुपए प्रति छात्र वसूल किए थे। इस तरह करीब 2 करोड़ 66 लाख रुपए विश्वविद्यालय को दिए थे। मंत्री द्वारा फीस वापस करने के आदेश के बाद अब यूनिवर्सिटी पैसा वापस करने की तैयारी कर रही है।
कुलपति रेणु जैन का कहना है, पैसे तो वापस किए जाएंगे, लेकिन परीक्षा आयोजित कराने में जो खर्च हुआ है उसे कम किया जाएगा। कुलपति ने एक कमेटी गठित की है जो खर्च के हिसाब से छात्रों को वापस की जाने वाली राशि तय करेगी। कमेटी की रिपोर्ट के बाद छात्रों को तय राशि वापस की जाएगी।
Published on:
01 Aug 2019 03:07 pm
बड़ी खबरें
View Allइंदौर
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
