20 जनवरी 2026,

मंगलवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

यशवंत क्लब की दीवारों से झांकता है इंदौर क्रिकेट का इतिहास

आज से ठीक एक शताब्दी पूर्व इंदौर में होलकर रियासत ने यशवंत क्लब की शुरुआत यशवंत क्रिकेट क्लब के नाम से ही की थी।

2 min read
Google source verification
yashwant club

yashwant club

इंदौर. शहर में क्रिकेट को लेकर दीवानगी होलकर राज के समय से कायम है। क्रिकेट इंदौरियों के डीएनए में ही है। रेसकोर्स रोड पर मौजूद यशवंत क्लब की दीवारों पर टंगी तस्वीरों पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि आज से ठीक एक शताब्दी पूर्व इंदौर में होलकर रियासत ने यशवंत क्लब की शुरुआत यशवंत क्रिकेट क्लब के नाम से ही की थी। करीब 10 साल बाद अंग्रेजों के राज में क्लब से एेसे-एेसे नायाब क्रिकेटर जुड़े, जो देश की पहली क्रिकेट टीम के मुखिया बने।

इंदौर में प्रतिस्पर्धात्मक क्रिकेट की औपचारिक शुरुआत होलकर राजवंश ने 1927 में एक टीम गठित कर की थी। इसके बाद 1940 के दशक में शहर में प्रथम श्रेणी क्रिकेट की शुरुआत हुई। बेटे महाराज यशवंतराव होलकर च्द्वितीयज् के क्रिकेट प्रेम को देखते हुए पिता तुकोजीराव होलकर ने 1916 में यशवंत क्रिकेट क्लब स्थापित किया। तब इसका मैदान वर्तमान जीएसआईटीएस कॉलेज की जगह था। टीम को प्रशिक्षण देने के लिए उन्होंने प्रसिद्ध लेग ब्रेक गेंदबाज एएस कैनेडी और गुगली के प्रणेता बीजेटी बोसांके को इंदौर आमंत्रित किया था। बेहतरीन गेंदबाज एसएम जोशी इंदौरी क्रिकेट से जुडऩे वाले पहले बाहरी खिलाड़ी थे। इसके अलावा अक्कल कोट से जेजी नवले, जयपुर से प्यारे खां व तेज गेंदबाज बलसारा को बुलाया गया।

कर्नल सीके नायडू : महाराज तुकोजीराव ने 1924 में वर्तमान यशवंत क्लब की नींव रखी थी। उनके निमंत्रण पर कोट्टारि कंकैया (सीके) नायडू इंदौर आकर यशवंत क्रिकेट क्लब से जुड़े और इंदौर के ही होकर रह गए। 1946-47 में वे यशवंत क्लब के चेयरमैन भी रहे। भारत को 1932 में टेस्ट टीम का दर्जा मिला और होलकर टीम के सीके नायडू भारतीय टेस्ट टीम के पहले कप्तान बने। कर्नल की उपाधि उन्हें होलकर राजवंश ने ही प्रदान की थी।

विदेशी धरती पर इंदौरी क्रिकेटर का पहला शतक : होलकर टीम से जुड़े सैयद मुश्ताक अली 1934 में भारतीय टेस्ट टीम में शामिल किए गए। उन्होंने मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान पर 1936 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट शतक जडक़र इतिहास रचा था। इंदौर के किसी क्रिकेटर का विदेशी धरती पर यह कारनामा पहले टेस्ट शतक के रूप में इतिहास में दर्ज है।

लंदन से बैट, ब्रिटेन से आती थी बॉल
क्लब के प्रत्येक खिलाड़ी के पास विख्यात गन एंड मूर कंपनी के चार-पांच बैट हुआ करते थे। खिलाडिय़ों की ड्रेस मुंबई की एसक्विथ एंड लॉर्ड और कोलकाता की रेंकिन्स जैसी सिलाई फर्मों से आती थी। बॉलर को ब्रिटेन की च्ड्यूकज् गेंद उपलब्ध थी।

25 खिलाड़ी जुड़े थे क्लब से
शुरुआत में 25 खिलाड़ी यशवंत क्लब के सदस्य थे। कप्तान रियासत के तत्कालीन गृहमंत्री अब्दुल रशीद थे। टीम अखिल भारतीय स्तर के क्रिकेट मैचों में भाग लेने अजमेर , दिल्ली, हैदराबाद व ग्वालियर तक जाती थी।