
Holika Dahan 2023
इंदौर। लगातार दूसरे वर्ष इस बार भी होलिका दहन पर भद्रा का साया है। ऐसे में फिर होलिका दहन को लेकर संशय की स्थिति निर्मित हो गई है। ज्योतिषयों का कहना है कि होलिका दहन और रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान दिया जाता है। ऐसे में शास्त्र मतानुसार ही होलिका दहन करना उचित होगा।
मप्र ज्योतिष व विद्वत परिषद के प्रदेशाध्यक्ष आचार्य पं. रामचंद्र शर्मा वैदिक ने बताया, शास्त्रों के अनुसार इस वर्ष पूर्णिमा 6 मार्च को शाम 4.17 बजे बाद प्रारंभ होकर होकर 7 मार्च को शाम 6.10 बजे तक रहेगी। भद्रा 6 मार्च को शाम 4.18 से 7 मार्च को सुबह 5.15 बजे तक रहेगी। 6 मार्च को प्रदोषकाल शाम 6.38 से रात 9.08 बजे तक व भद्रा का पुच्छकाल रात 12.43 से रात 2.01 बजे तक रहेगा। इससे स्पष्ट है कि 6 मार्च को पूर्णिमा पूर्ण प्रदोषव्यापिनी है। 7 मार्च को भी पूर्णिमा भारत के कुछ हिस्सों में प्रदोषव्यापिनी रहेगी। शास्त्रों के अनुसार भद्रारिहत प्रदोषकाल व्यापिनी फाल्गुन पूर्णिमा में होलिका दहन किया जाता है। यदि दो दिन पूर्णिमा प्रदोषव्यापिनी हो या दूसरे दिन प्रदोष के एकदेश को व्याप्त करे तो पहले दिन भद्रादोष से होलिका दहन दूसरे दिन ही किया जाता है।
जानिए कब होगा दहन
दूसरे दिन प्रदोष का वह स्पर्श ही न करे व पहले दिन प्रदोष में भद्रा विद्यमान हो पर दूसरे दिन पूर्णिमा साढ़े तीन प्रहर तक व अगले दिन प्रतिपदा वृद्धिगामिनी यानी पूर्णिमा से अधिक मान वाली हो तो दूसरे दिन ही प्रदोषव्यापिनी प्रतिपदा में होलिका दहन होता है। यदि प्रतिपदा पूर्णिमा से कम मान वाली हो तो पहले दिन भद्रा के पुच्छ में या भद्रा के मुख को छोडकऱ भद्रा में ही होलिकादहन किया जाता है। ऐसे में इंदौर सहित प्रदेशभर में भद्राव्यापिनी प्रदोषकाल में होलिका दहन 6 मार्च को करना शास्त्र सम्मत है। वहीं, 7 मार्च को स्नान-दान की पूर्णिमा रहेगी।
भद्रा के मुख को छोड़कर करें होलिका दहन
पं. शर्मा के अनुसार यदि भद्रा निशीथ के बाद समाप्त हो रही है तो भद्रा के मुख को छोडकऱ होलिका दहन किया जाना चाहिए। इसके अतिरिक्त प्रदोष में भद्रामुख हो तो भद्रा के बाद अथवा प्रदोष के बाद होलिका दहन किया जाना चाहिए। दोनों दिन प्रदोष में पूर्णिमा स्पर्श न करे तो पहले दिन ही भद्रा पुच्छ में होली जलाएं।
Published on:
26 Feb 2023 05:58 pm
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