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घर बनाना हुआ महंगा: लोहे की कीमत 40 फीसदी बढ़ी, सरिया 52 से 80 रुपए किलो पहुंचा

उद्योगों के उत्पादन से लेकर सरकार से जुड़े प्रोजेक्ट पर भी दिखेगा असर

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इंदौर

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jay dwivedi

Mar 21, 2022

घर बनाना हुआ महंगा: लोहे की कीमत 40 फीसदी बढ़ी, सरिया 52 से 80 रुपए किलो पहुंचा

घर बनाना हुआ महंगा: लोहे की कीमत 40 फीसदी बढ़ी, सरिया 52 से 80 रुपए किलो पहुंचा

विकास मिश्रा

इंदौर. पिछले साढ़े तीन महीनों में ही लोहे की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी हो गई है। कच्चे माल की कीमतों में करीब 40 फीसदी तक का इजाफा हो गया है। निर्माण क्षेत्र में काम आने वाले लोहे के सरियों की कीमतें भी ढाई महीने में 50-52 रुपए किलो से बढ़कर 80-82 रुपए किलो पहुंच गई है। ब्रांडेड सरिया 85 रुपए किलो तक बाजार में मिल रहा है। इस बढ़ाेतरी ने मप्र सहित देशभर के उद्योग जगत को प्रभावित किया है। वहीं आम आदमी का घर बनाने का सपना भी महंगा कर दिया है। निर्माण से जुड़े सरकार के प्रोजेक्ट पर भी असर आ रहा है। जिन दरों पर ठेकेदार कंपनियों ने प्रोजेक्ट बनाने का टेंडर लिया था, अब उसकी कीमत में 10-15 फीसदी का इजाफा हो गया है।

17 दिन में 5 हजार बढ़े

लोहे का कारोबार करने वाले अंकित सक्सेरिया के मुताबिक लोहे के कच्चे माल (बिलेट) की कीमतेें साढ़े तीन महीने में करीब 40 फीसदी तक बढ़ गई है। एक दिसंबर 2021 को लोहे की प्रति मेट्रिक टन (प्रति हजार किलो) कीमत 43,600 रुपए थी, जो बढ़कर 56,600 रुपए पहुंच गई है। पिछले 17 दिनों दामों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 28 फरवरी को कीमत 51,600 रुपए थी जो 17 मार्च को 56 हजार 600 रुपए तक पहुंच गई है। रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध के चलते शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव को भी कीमतें बढ़ने की वजह माना जा रहा है।

सरिए के भाव में तूफानी तेज

लोहा व्यापारी संघ के प्रभात मिश्रा के मुताबिक, निर्माण क्षेत्र में उपयोग होने वाले सरिए के दामों में ढाई महीने में तेजी से बढ़ोतरी हुई। ब्रांडेड सरिया 85 रुपए किलो तक बिक रहा है। लगातार कीमतें बढ़ने से मांग में कमी आई है। कई निजी प्रोजेक्ट के काम रोक दिए गए हैं।

उत्पादन 15 से 20 फीसदी घटा

कीमतों में इजाफे के कारण उद्योगों का उत्पादन 15 से 20 फीसदी कम हो गया है। सबसे अधिक असर इंजीनियरिंग, मशीनरी, एग्रीकल्चर उत्पाद बनाने वाले उद्योगों पर हुआ है।

तरुण व्यास, सहसचिव, एआइएमपी

मुश्किल में ऑटोमोबाइल सेक्टर

लोहे की कीमतें बढ़ने से ऑटोमोबाइल सेक्टर मुश्किलों का सामना कर रहा है। वे अपने उत्पादों की कीमतें बार-बार नहीं बदल सकते हैं, इसलिए उन्हें घाटा वहन करना पड़ रहा है। बड़ी कंपनियों के साथ ही ऑटो कम्पोनेंट बनाने वाली छोटी कंपनियों ने भी फिलहाल उत्पादन कम किया है।

शिवनारायण शर्मा, बस बॉडी बिल्डर

घर का काम फिलहाल रोका

घर बनाने की लागत इस वृद्धि के कारण 10 से 15 फीसदी बढ़ गई है। सुपर कॉरिडोर पर घर बना रहे अखिलेश पांडे बताते हैं, दो महीने में सरिए के दाम बढ़ने के चलते फिलहाल घर का काम रोक किया है। रेट कुछ कम होने पर काम फिर चालू करेंगे। ठेकेदार से जिस रेट में बात हुई थी उसमें बढ़ोतरी के चलते काम रोका है।

प्रदेश की 50 रोलिंग मिलों पर असर

इंदौर, पीथमपुर, भोपाल और देवास सहित प्रदेश में करीब 50 रोलिंग मिल संचालित होती हैं। लोहे के कच्चे माल की कीमतों में लगातार इजाफे से इनके उत्पादन पर असर पड़ रहा है। दाम बढ़ने से डिमांड कम हुई है। स्टॉक भी नहीं किया जा रहा है। निजी के साथ ही सरकारी निर्माण पर भी असर हो रहा है।

सतीश मित्तल, अध्यक्ष, रोलिंग मिल एसोसिएशन